
काशी से चुनार तक बेसहारा हुई गंगा की धारा,चंद कदमों में पूरी नदी पैदल नाप रहे लोग
वाराणसी/मीरजापुर।बुजुर्ग बताते हैं कि गंगा कलियुग खत्म होने से पहले गंगा धरती से विलुप्त हो जाएंगी।धरती से कब गंगा का अस्तित्व खत्म होगा यह तो आने वाला समय बताएगा,लेकिन वर्तमान की जो हालत है वह मानो ऐसा है कि मर्ज बढ़ता ही गया।गंगा की धारा को निर्मल अविरल करने की चाह और थाह की कोई सीमा नहीं,गंगा के लिए अरबों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।दावे वादे सब आप गंगा में इन दिनों थाह ले सकते हैं।
गंगा में सिर्फ गंगा का ही पानी नहीं है,यमुना,चंबल सहित कई अन्य नदियों का पानी भी सदानीरा को वेग प्रदान करते रहे हैं। भगीरथ धरती पर तो गंगा ले आए थे,लेकिन यह दुर्दशा देखकर आप भागीरथी के हालातों पर आंसू बहा सकते हैं। आपको हालात देखना है तो अधिक दूर नहीं बस बनारस से चुनार के बीच वाराणसी-मीरजापुर के ठीक बीच अदलपुरा के पास शीतला धाम के पास चले जाइए।
मां गंगा की दुर्दशा देखकर आप चौंक जाएंगे।कहां पहाड़ों पर मां गंगा के वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया था और कहां बालू की गंगा की धारा के बीच चंद बोरियों को फांद कर आप पूरी गंगा की मुख्य धारा को यहां पार कर जाएंगे।गंगा में पानी बनारस में भी है और कुछ आगे जाकर चुनार में भी है,लेकिन दोनों के ठीक बीच में अदलपुरा में गंगा की धारा महज कुछ फीट ही है और लोग आसानी से गंगा को पैदल ही पार कर रहे हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां क्रूज,मालवाहक चलाने की बात हो रही है,लेकिन बीते माह से यहां नौका संचालन तक के लिए पानी नहीं है।स्थानीय लोग गंगा की यहां बह रही धारा को महज पांच सेकंड में पार कर जा रहे हैं। गंगा की यह दुर्दशा शीतलाधाम के पास लोग बताते हैं कि पहली बार उनके जीवन में हुआ है।गंगा की धारा पर बालू का ही कब्जा है और चारों ओर दूर तक रेता के बीच नाला की तरह बह रही धारा देख लोग यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि यह अपनी ही गंगा की धारा है।
भारत सरकार के बंदरगाह,जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की ओर से गंगा की लहरों पर वर्षभर मालवाहक चलाने का बड़ा दबाव है, लेकिन स्थिति यह है कि यहां पर नाव भी नहीं चल सकती। जबकि मंशा इसको प्रयागराज तक ले जाने का है।
अदलपुरा स्थित शीतला धाम मंदिर के सामने सूखी गंगा नदी में पैदल आर-पार होते लोग इन दिनों आपको सहज नजर आ जाएंगे।अदलपुरा शीतला धाम पर गंगा नदी सूखने के कारण धाम के बगल में गंगा नहर में पानी छोड़ने के लिए कैनाल पंप के पास तक गंगा नदी से पानी लाने के लिए चुनार घाट के पास से लगभग तीन-चार किलोमीटर तक जेसीबी लगाकर रेत में बालू की खोदाई की जा रही है। जेसीबी से विशाल गहरा कृत्रिम नदी का निर्माण किया जा रहा है। चुनार से अदलपुरा तक कैनाल पंप के पास तक गंगा नदी के जल को लाने के लिए जेसीबी से नदी की कृत्रिम धारा भी बनाई जा रही है। हालांकि इसमें भी पानी के नाम पर कुछ खास नहीं है।
ट्रांसफर पोस्टिंंग का दौर चल रहा है तो कई लोगों का स्थानांतरण हो चुका है और इसकी विभागीय प्रक्रिया चल रही है,लेकिन जो मौके पर गंगा में कार्य हो रहा है वह मुख्य पंप कैनाल तक गंगा का पानी तीन किलोमीटर तक सूखने के बाद गंगा में लिफ्ट कैनाल के पंप के पास पानी पहुंचाने की चुनौती है।
गंगा में कैनाल बनाने के लिए प्रयास जारी हैं और तीन किलोमीटर रेता को हटाकर लिफ्ट कैनाल के पंप तक पानी पहुंचाने का प्रयास है। लगभग 500 मीटर रेत का ऊंचा टीला सबसे बड़ी बाधा है जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि मुख्य पंप कैनाल तक पानी आ सके,जिससे पानी आगे भेजकर किसानों के बेहन के लिए पानी की व्यवस्था की जा सके।
सिंचाई विभाग ने तीन किलोमीटर दूर धारा जाने के बाद लिफ्ट कैनाल के पंप तक पानी पहुंचाने के लिए जेसीबी से आनन फानन नहर बनाकर पानी पहुंचाने की कोशिश शुरू की है,लेकिन अगेती धान की नर्सरी डालने की मियाद बीतने को है और पिछेती का समय भी सामने खड़ा है। पखवारे भर में लिफ्ट कैनाल के पंप चालू नहीं हो सके तो धान की पिछेती फसल पर भी संकट के मानो बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में गंगा में पर्यटन नौकायन तो छोड़िए सिंचाई के लिए पानी का अकाल किसानों के खेतों का हलक तक तर नहीं कर सका तो सह कृषि सीजन चौपट होना तय है।