चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

चतुरी चाचा ने प्रपंच की शुरुआत करते हुए कहा- जलवायु परिवर्तन केर असर द्याखव भइय्या। फागुन महीना लगतय विकट गरमी होय लागि रहय। सगरा फागुन जेठ की तिना तपा हय। काल्हि चैत लागि गा। आजु काल्हि संझा क घाम देखिक दुपहर लागति हय। हमरी यादि म कबहुँ फागुन अउ चैत म यतनी तगड़ी धूप नाय निकरी। गरमी अउ घाम क कारन गेंहू समय ते पहिलेन पाकि गवा। जउन अगमन गेंहू चैत म कटती उई फागुन म कटिगे। यहै पखवारा म पछमनव गेंहू काटि-माड़िय जइहैं। जल्दी पाके ते गेंहू क दाना पातर निकर रहा। नतीजा यू हय कि गेहूं क पैदावार थोरी घटि गय। समय ते पहिले गरमी होय क कारन औरी फसलन प बुरा प्रभाव परी रहा। जलवायु परिवर्तन क्यारु दुष्प्रभाव आम जनजीवन प द्याखय लाग हय।

चतुरी चाचा अपने प्रपंच चबूतरे पर बैठे बेना हांक रहे थे। आज सुबह चटक धूप थी। हवा बिल्कुल थम सी गई थी। चैत्र महीने के दूसरे दिन प्रचंड गर्मी थी। गांव के बच्चे चबूतरे से थोड़ी दूर पर सियर-सटकना खेल रहे थे। पुरई श्यामा गाय और उसके बछड़े को नहला रहे थे। ककुवा, कासिम चचा, मुंशीजी व बड़के दद्दा आपस में समय से पहले पड़ रही गर्मी पर खुसुर-पुसुर कर रहे थे। मेरे चबूतरे पर पहुँचते ही चतुरी चाचा ने बतकही का आगाज़ कर दिया। चतुरी चाचा का कहना था कि जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिखने लगा है। मार्च महीने में इतनी विकट गर्मी कभी नहीं हुई। जो गेंहू की फसल अप्रैल महीने में पकनी थी, वो फसल मार्च में ही पक गई। एक तरह से यह कह सकते हैं कि प्रचंड गर्मी और धूप के कारण गेंहू की फसल सूख गई। इससे गेहूं का दाना पतला निकल रहा है। फलस्वरूप, गेंहू के उत्पादन में थोड़ी कमी देखने को मिल रही है। इस वर्ष समय से काफी पहले गर्मी शुरू होने से अन्य रबी की अन्य फसलों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का बुरा असर आम जन जीवन पर भी पड़ रहा है।

ककुवा ने चतुरी चाचा के विचारों से समहत होते हुए कहा- हमरी उमर 75 साल हय। अपनी उमर म कबहुँ फागुन यतना तपत नाय द्याखा। चैत लगतय पंखा गरम हवा फैंकय लाग। अबहीं तौ पूरा चैत, बैसाख अउ जेठ परा हय। इ तीन महीना कितना कटिहैं। युहु सोचिक जीव सिहर जात हय। हम पंच तौ पंखय क सहारे हन। भाई, जिनके घरन म एसी लागि हय। उई तौ यह गरमी मजे त बितयहैं। मुदा, हम पँचन की मरन होय जाइ। अब मौसम क मिजाज बिगर चुका। न समय त बरसात होत हय अउ न समय त जाड़ा-गरमी। कुछु सालन ते गरमी जादा होय लागि हय। यहिका सब ते जादा असर खेती प परि रहा। जलवायु परिवर्तन क्यार खामियाजा सबका भुगतय परि रहा। यहिमा भगवान की कौनिव गलती नाय। युहु सब हमरे करमन का फलु आय। हम पंच बिरवा-पालव काटत जाय रहेन। वातावरण का प्रदूषित करय म कौनिव कसर नाय छोड़ि रहेन। सगरी धरती प जल, वायु अउ ध्वनि प्रदूषण बढ़त जाय रहा। हमका इ सब चीजन केरा नतीजा भुगतय परी।

इसी बीच चंदू बिटिया परपंचियों के लिए जलपान लेकर आ गई। आज जलपान में ककड़ी, खीरा और काला नमक एवं जीरे वाला मट्ठा था। हम सबने सेंधा नमक के साथ ककड़ी और खीरे खाये। फिर छांछ के साथ पँचायत आगे बढ़ी।

मुंशीजी ने कहा- जलवायु परिवर्तन को लेकर पूरे विश्व को चिंता करनी चाहिए। ग्लोबल वार्मिंग से सारी दुनिया परिचित हो चुकी है। भीषण गर्मी के कारण हिमालय के ग्लेशियर पिघलने लगे हैं। भविष्य में समुद्रों का बढ़ना शुरू हो सकता है। तब तटीय इलाकों के डूबने के खतरा बढ़ेगा। दूसरी तरफ भूजल की सतह नीचे खिसकती जा रही है। नदियों और तालाबों का अस्तित्व खतरे में है। जल संरक्षण-संवर्धन पर अपेक्षित कार्य नहीं किया जा रहा है। परिणाम स्वरूप, निकट भविष्य में पेयजल का भारी संकट खड़ा होना निश्चित हो गया है। कुछ लोग तो कह रहे हैं कि आने वाले वर्षों में पानी के लिए महाभारत होंगे। हम लोग ने पूरे वातारण को प्रदूषित कर डाला है। मैदान और पहाड़ ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष तक कचरा ही कचरा है। हरियाली पर दिनरात आरा चल रहा है। विश्व बिरादरी को जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण व ध्वनि प्रदूषण पर तत्काल काबू पाना चाहिए। कागज के बजाय जमीन पर पौधरोपण होना चाहिए। पेयजल के दुरुपयोग को रोकने के साथ जल संरक्षण पर गम्भीर होना चाहिए।

कासिम चचा ने विषय परिवर्तन करते हुए कहा- पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो गए। गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में भाजपा ने अपने पुराने मुख्यमंत्री फिर से बैठा दिए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपना विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बावजूद भाजपा ने दोनों को फिर से उसी पद पर विराजमान कर दिया। इस मामले में जनमत को ठुकरा दिया गया। यूपी में एमएलसी चुनाव चल रहे हैं। भाजपा सत्ता के दम पर इस चुनाव को जीतने का मंसूबा बांधा है। उसने अपने नौ उम्मीदवारों को निर्विरोध चुनवा लिया है। बाकी 27 सीटों पर एक तरफा मतदान कराने की जुगत भिड़ाई है। अब भाजपा गुजरात और हिमाचल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए जुट गई है। साथ ही, आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारी अभी से करने लगी है। भाजपा हर हाल में सत्ता में रहना चाहती है। भाजपा नेता मंहगाई और बेरोजगारी पर कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं। भाजपा धर्म के नाम पर सत्ता के शिखर पर रहना चाहती है। उसे आम जन से जुड़े मुद्दों पर भी काम करना चाहिए। सच पूछिए तो भाजपा जनता को मुफ्तखोर बनाने में लगी है। वह लाभार्थियों का वोट बैंक पक्का कर रही है।

बड़के दद्दा भड़क कर बोले- चचा, आपको भाजपा के राष्ट्रवादी एवं कल्याणकारी कार्यों से दिक्कत होती है। आप प्राइमरी सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। आपको गरीबों का दर्द पता नहीं है। मोदी जी ने इस देश के गरीबों का दर्द समझा। तभी वह गरीब परिवारों को मुफ्त राशन, पक्का आवास, शौचालय, बिजली का कनेक्शन व गैस सिलेंडर-चूल्हा आदि दे रहे हैं। प्रधानमंत्री किसानों, कामगारों व महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं। इससे पूरा देश मजबूत हो रहा है। इसमें वोट की कोई बात ही नहीं है। हर शहर और गांव का गरीब आदमी मोदी की खूब जय-जयकार कर रहा है। कोरोना काल में मोदी ने जो कदम उठाए हैं। उन कार्यों की चर्चा पूरे संसार में हो रही है। विश्वपटल पर भारत की धाक बहुत बढ़ गई है। देश में आतकंवादी घटनाएं कम हुई हैं। देश और प्रदेश आत्मनिर्भर बन रहे हैं। आम मतदाता यह सब देखकर भाजपा को बार बार सत्ता सौंप रहा है।

मैंने परपंचियों को कोरोना महामारी का अपडेट देते हुए बताया कि विश्व में अबतक करीब 49 करोड़ लोग कोरोना की जद में आ चुके हैं। इनमें 61 लाख 70 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह भारत में चार करोड़ 30 लाख 26 हजार से अधिक लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। देश में अबतक करीब पांच लाख 21 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में काफी दिनों से कोरोना नियंत्रित चल रहा है। देश के शत-प्रतिशत लोगों का टीकाकरण अंतिम चरण में है। देश में कोरोना योद्धाओं और बुजुर्गों को बूस्टर डोज और 12 से 18 वर्ष आयु वाले बच्चों को कोरोना वैक्सीन देने का कार्य भी समापन की ओर है। भारत के टीकाकरण अभियान की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। बहरहाल, हमें कोविड नियमों का पालन करना चाहिए। तभी हम सब कोरोना महामारी से सुरक्षित रहेंगे।

अंत में चतुरी चाचा ने सभी को भारतीय नववर्ष संवत्सर-2079, नवरात्र व रमजान की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही के साथ फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान, स्वतंत्र पत्रकार

जँगलवा, रामपुर देवरई, बख़्शी का तालाब, लखनऊ-226201

7800001525

03 अप्रैल, 2022

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