
गोबर से आकर्षक राखियां बनाकर स्वदेशी गौवंश संरक्षण की अनूठी पहल
गोबर से तैयार हो रहे उपयोगी उत्पाद, युवाओं और महिलाओं को मिल रहा रोजगार का अवसर
अजय भार्गव
नैमिष टुडे संवाददाता गोंदलामऊ
सीतापुर। स्वदेशी गौवंश के संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कामधेनु फाउंडेशन द्वारा अनूठी पहल की जा रही है। स्वदेशी गोविज्ञान अनुसंधान केन्द्र में गौमाता के गोबर से आकर्षक एवं उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए इन दिनों केन्द्र पर गोबर से बनी आकर्षक राखियां विशेष रूप से तैयार की जा रही हैं, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
फाउंडेशन द्वारा गोबर को अनुपयोगी समझने के बजाय उसे रोजगार और आय का साधन बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। केन्द्र पर मूर्तियां, दीपक, धूपबत्ती, माला, कंडे, श्री यंत्र, मोबाइल स्टैंड, नेम प्लेट, खाद, राखियां और विभिन्न प्रकार के सजावटी सामान सहित कई उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। युवाओं, महिलाओं और किसानों को इन उत्पादों को बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे गांव में ही उत्पाद तैयार कर उनकी बिक्री के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
कामधेनु फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष मदन पाल सिंह अर्कवंशी ने बताया कि स्वदेशी गौवंश को आर्थिक उपयोगिता से जोड़ना उनके संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम हो सकता है। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र से जैविक खेती को बढ़ावा देकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि फाउंडेशन का उद्देश्य केवल उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि निराश्रित गौवंशों के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। यदि गोबर को आय के साधन के रूप में विकसित किया जाए तो गौपालकों को आर्थिक लाभ मिलेगा और गौवंश को संरक्षित रखने के प्रति लोगों की रुचि भी बढ़ेगी।
फाउंडेशन की यह पहल गौवंश संरक्षण, स्वच्छ एवं पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के निर्माण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। इससे युवाओं, महिलाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिलने के साथ ही स्वदेशी गौवंश के संरक्षण को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।