सरकार के नौ साल पूरे होने पर नवरात्र के 9 दिन भाजपा का जनता दरबार:सीएम योगी

सरकार के नौ साल पूरे होने पर नवरात्र के 9 दिन भाजपा का जनता दरबार:सीएम योगी

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नौ वर्षों की यात्रा 9 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को लोक भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। सीएम योगी ने कहा कि सरकार उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 9 विषयों पर आधारित 9 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है,जो बसंत नवरात्रि से प्रारंभ हो रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि नवरात्र के 9 दिन भाजपा का जनता दरबार का अयोजना किया जाएगा।इसका उद्देश्य है कि यह जन-चर्चा का विषय बने और समाज के सभी वर्ग,युवा, किसान,श्रमिक,महिलाएं और गरीब इसमें सहभागी बनें। संवाद के माध्यम से न केवल बीते 9 वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया जाएगा, बल्कि आने वाले समय के लिए विकास का विजन भी तय किया जाएगा। सीएम कहा कि 9 एक शुभ अंक है,जो पूर्णता का प्रतीक है और यह कार्यक्रम भी उसी पूर्णता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सीएम योगी ने कहा कि आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। पिछले 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने सुरक्षा,इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश,रोजगार,किसानों के कल्याण,महिलाओं के सशक्तीकरण और गरीबों के उत्थान के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए हैं। सीएम ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से दलितों,वंचितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी लाभ पहुंचाने का काम किया गया है। शिक्षा,स्वास्थ्य,पर्यावरण और सेवा क्षेत्रों में सुधार करते हुए सुशासन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।साथ ही प्रदेश की आस्था,संस्कृति व परंपराओं को सम्मान देते हुए उन्हें नई पहचान दिलाने के प्रयास भी लगातार जारी हैं, जिससे उत्तर प्रदेश आज एक नई पहचान के साथ देश और दुनिया में उभर रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि इन 9 वर्षों की यात्रा को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि 2017 से पहले प्रदेश की स्थिति क्या थी। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे असीम संभावनाओं वाले राज्य को पहचान के संकट का सामना करना पड़ रहा था।दुनिया की सबसे उर्वर भूमि और प्रचुर जल संसाधनों के बावजूद किसान आत्महत्या के लिए मजबूर था। प्रदेश का कारीगर,जो अपनी कला के लिए प्रसिद्ध था, वह उद्यमी बनने के बजाय श्रमिक बनकर पलायन करने को विवश था। सीएम ने कहा कि युवाओं के सामने पहचान और रोजगार का संकट था, भर्ती प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार और वसूली से प्रभावित थीं। कानून-व्यवस्था की स्थिति ऐसी थी कि न बेटियां सुरक्षित थीं,न व्यापारी और न ही आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करता था। प्रदेश में विकास के लिए कोई स्पष्ट विजन नहीं था, जिसके कारण युवा वर्ग निराश होकर या तो पलायन करता था या संघर्ष में उलझा रहता था।

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