पंजीयन हेतु प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में सीएमएस-ईडी डिप्लोमा धारकों ने सौंपा ज्ञापन


पंजीयन हेतु प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में सीएमएस-ईडी डिप्लोमा धारकों ने सौंपा ज्ञापन

 

 

सीतापुर। जनपद में “ज्योति स्वास्थ्य सेवा संस्थान” के प्रदेश अध्यक्ष डॉ० अजय पाल के नेतृत्व में सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा धारकों ने सीतापुर सीएमओ कार्यालय पहुंच कर सीएमओ मधु गौरेला को कोर्ट के आदेश की प्रतियां संलग्न कर ज्ञापन सौंपते हुए रजिस्ट्रेशन करने की मांग की है। आरोप है कि सीएमओ सीतापुर ने कोर्ट की प्रतियां गलत कहते हुए सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा धारकों को ऑफिस से निकाल दिया गया एवं ज्ञापन को फाड़ कर फेक दिया। जिससे आहत होकर न्याय के लिए डिप्लोमा धारकों ने जिलाधिकारी अनुज सिंह की चौखट पर दस्तक दी और अपनी व्यथा सुनाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंप कर न्याय दिलाये जाने की गुहार लगाई है।

 

प्रदेश अध्यक्ष डॉ० अजय पाल ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों में सैकड़ों डिप्लोमा कॉलेज है जिसमें ग्रामीण अंचलों के युवाओं को प्राथमिक उपचार के करने की आज़ादी बता कर दो वर्षीय सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा कराया जा रहा है। लेकिन सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा धारकों को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उन्हें फर्जी बता कर प्राथमिक उपचार करने से रोका जा रहा है और कार्यवाही करने की बात कही जा रही है। दावा यह भी किया है कि उच्च व सर्वोच्च न्यायालय ने क्रमशः 2003 व 2021 में सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा धारकों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए वैध बताते हुए पंजीयन कराने का आदेश पारित किया था। जिस क्रम में सहारनपुर व श्रावस्ती के सीएमओ ने नैदानिक स्थापना अधिनियम 2010 के अंतर्गत सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा धारकों को पंजीयन कर प्राथमिक उपचार की आज़ादी दी है। लेकिन सीएमओ सीतापुर के द्वारा सैकड़ों डिप्लोमा धारी छात्र उपेक्षा का शिकार है। वहीं ज्योति स्वास्थ्य सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की है कि अगर सीएमएस ईडी डिप्लोमा मान्य नही है तो ऐसे तमाम कॉलेजों को बंद कराया जाए जिनमे सीएमएस एंड ईडी डिप्लोमा कराया जा रहा है ताकि किसी भी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो अन्यथा की स्थिति में ज्योति सेवा संस्थान के बैनर तले समस्त डिप्लोमा धारक धरने के लिए बैठने पर विवश हो जाएंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होगी। एडिशनल सीएमओ डॉक्टर उदय प्रताप से पूरे प्रकरण में वार्ता करने पर उन्होंने बताया कि सीएमस-ईडी डिप्लोमा धारकों को स्टेट मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराना अनिवार्य है अन्यथा इसे फ़र्ज़ी माना जाएगा। सीएमएस-ईडी धारक बिना रजिस्ट्रेशन कराए उपचार नही कर सकते। साथ ही यह भी बताया कि ऐसे कॉलेज जो बिना रजिस्ट्रेशन के डिप्लोमा सर्टिफिकेट दे रहे ऐसे लोगो के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।


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