
स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के आदेशों को ठेंगा!ऑट में बंद मिला आरोग्य मंदिर
लापरवाह सीएचओ के ऊपर कार्रवाई करने से कांप रहे मिश्रिख एवं जिले के अधिकारी!
मिश्रिख, सीतापुर
ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के सरकारी दावे जमीनी धरातल पर हवा साबित हो रहे हैं। ताजा मामला मिश्रिख ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ऑट ग्राम पंचायत का है, जहां स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर अपनी बदहाली, स्टाफ की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के आंसू रो रहा है। यहां तैनात सीएचओ नेहा कदीर की मनमानी के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।समय का कोई पाबंद नहीं, बंद रहता है केंद्रस्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र पर तैनात सीएचओ नेहा कदीर कभी भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंचती हैं। स्वास्थ्य केंद्र खुलने का कोई निश्चित समय नहीं है। ऑट ग्राम पंचायत और आसपास के क्षेत्रों से जब गरीब मरीज सुबह इलाज और दवा लेने पहुंचते हैं, तो उन्हें केंद्र के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका मिलता है। घंटों इंतजार करने के बाद भी जब मैडम नहीं आतीं, तो मरीजों को मजबूरन बिना इलाज के वापस लौटने के लिए विवश होना पड़ता है।कार्रवाई करने से कतरा रहे मिश्रिख एवं जिले के जिम्मेदार अधिकारी हैरानी की बात यह है कि इस पूरी लापरवाही की जानकारी होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो मिश्रिख एवं जिले के संबंधित अधिकारी इस लापरवाह सीएचओ के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से सीधे तौर पर डर रहे हैं। अधिकारियों की इस ढुलमुल नीति के कारण नेहा कदीर के हौसले और बुलंद हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर गरीब ग्रामीण मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।फोन पर बात करने से बचते हैं साहब, सीधा जवाब देने के बजाय फोन काट देते हैं टालमटोल अधिकारियों की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि जब इस लापरवाही और बंद केंद्र के संबंध में उनसे फोन पर बात की जाती है, तो वे सीधे जवाब देने से साफ बचते नजर आते हैं। जिम्मेदार अधिकारी मामले की गंभीरता को समझने के बजाय फोन पर सिर्फ टालमटोल की बातें करते हैं और बात को रफा-दफा करने की कोशिश में जुट जाते हैं। अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें जनता की दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं है।उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक से शिकायत करने की तैयारी नेहा कदीर की इस रोज-रोज की अनुपस्थिति और जिम्मेदार अधिकारियों की इस टालमटोल की नीति से ऑट ग्राम पंचायत की जनता का सब्र अब टूट चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों और डरे हुए अधिकारियों की वजह से पूरी व्यवस्था ठप हो चुकी है। पीड़ित ग्रामीणों ने अब स्थानीय अधिकारियों पर भरोसा छोड़कर, सीधे उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से इस पूरे मामले और अधिकारियों की साठगांठ की लिखित शिकायत करने का मन बना लिया है।