डीपीएस का अनोखा आदेश, बच्ची के साथ आया भी स्कूल भेजो, वरना एंट्री नहीं

 

विष्णु सिकरवार
आगरा। दयालबाग स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल की जूनियर विंग में नर्सरी कक्षा में पढ़ने वाली चार साल की बच्ची को स्कूल में एंट्री नहीं दी जा रही है। बच्ची के पेरेंट्स से कहा गया है कि साथ में आया भेजो। स्कूल ने पेरेंट्स को मेल भेजे हैं।
पश्चिमपुरी के चिकित्सक दंपत्ति ने बताया कि साढ़े चार वर्षीय पुत्री का डीपीएस में पिछले वर्ष नर्सरी में प्रवेश कराया था। स्कूल प्रबंधन ने नवंबर माह में उन्हें मेल किया कि आपकी बेटी चंचल ज्यादा है। उसके साथ स्कूल के समय अलग से आया की व्यवस्था कीजिए।उन्होंने प्रधानाचार्य से बात की। प्रधानाचार्य ने उनसे बच्ची को स्कूल से निकालने या आया भेजने को कहा।
विगत छह फरवरी को स्कूल की ओर से उन्हें मेल भी भेजा गया। स्पष्ट शब्दों लिखा कि यदि आप आया नहीं भेजेंगे तो बच्ची को कक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा। वह सोमवार को बच्ची को लेकर स्कूल गईं तो उन्हें गेट से लौटा दिया गया। इससे वह और बेटी दोनों तनाव में हैं।
पेरेंट्स ने इसकी शिकायत प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस में की है। बच्ची की मां एसएन मेडिकल कॉलेज में हैं और पिता आंखों के प्राइवेट डॉक्टर हैं। दोनों ने बताया कि नर्सरी में प्रवेश के दौरान स्कूल प्रबंधन को बताया गया था कि बेटी चंचल है, कुछ अक्षरों को बोलने में समस्या आती है। एडमिशन हो गया। अक्टूबर, 2023 तक सब ठीक चला। नवंबर में स्कूल की तरफ से पहले मौखिक रूप से कहा गया कि बच्ची के साथ एक आया भेजें। इसके बाद तीन मेल भेजे गए। 6 फरवरी को मेल किया कि अगर आया साथ में नहीं भेजी तो स्कूल में बैठने नहीं दिया जाएगा।
बच्ची की मां डॉ. सुप्रिया का कहना है कि स्कूल के द्वारा पूरी फीस जमा करवा ली गई है। ट्रांसपोर्ट मिलाकर लगभग दो लाख रुपये फीस है। इसके बाद भी इस तरीके का अशोभनीय व्यवहार किया जा रहा है। मेरा परिवार और मेरी बेटी दोनों मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। एक महीने से बच्ची स्कूल नहीं जा रही। इसलिए घर पर परेशान हो रही थी। इस दौरान आया ढूंढने की कोशिश भी की। लेकिन आया नहीं मिली। स्कूल पहुंचने पर कॉर्डिनेटर ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। कहा कि बिना आया के एंट्री नहीं मिलेगी। डॉ. सुप्रिया का कहना है कि वे लीगल एक्शन भी लेंगी।
इस बारे में स्कूल के प्रिंसिपल आरपी पांडेय का कहना है कि बच्ची हाइपर एक्टिव है। क्लास में नहीं बैठती है। टेबल पर चढ़ती है। टीचर नहीं संभाल पा रही है। हमारे स्कूल में ऐसा सिस्टम है कि हम कुछ दिनों के लिए केयर टेकर को बुलाते हैं। बच्चा सेटल हो जाता है, तो केयर टेकर को बुलाना बंद कर देते हैं।

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