गौशालाओं को समय से मिले पैसा तो भुखमरी से बचें संरक्षित गोवंश

 

गौशालाओं को समय से नहीं मिल पा रहा पैसा परिणाम स्वरुप भुखमरी का शिकार बन रहे गोवंश।

सांडा(सीतापुर)- सकरन की दर्जन भर अस्थाई गौशालाओं में 200 से 300 बेसहारा गौवंश प्रत्येक गौशाला में संरक्षित किए गए हैं। गौशालाओं में संरक्षित गोवंशों को जीवन जीने के लिए समुचित मात्रा में चारा पानी मिल सके इसके लिए गौशाला संचालकों को समय पर पैसा नहीं मिल पाता है। कई गौशाला संचालक प्रधान ब्याज पर पैसा लेकर पशुओं के लिए चारा पानी की व्यवस्था करते हैं जो पशुओं के जीवन जीने के लिए पूरी नहीं पड़ती है। ऐसे में बड़ी संख्या में पशु कुपोषण का शिकार होकर असमय जान गँवा देते हैं।
गौशाला संचालक कई प्रधानों का कहना है कि गोवंश के चारा पानी के लिए मिलने वाला पैसा चार से पांच माह तक का करीब 20 से 25 लाख रुपया बकाया है। ऐसे में वह ब्याज पर कर्ज लेकर किसी तरह से चारा पानी की व्यवस्था करते हैं जो पशुओं के लिए पर्याप्त नहीं होती है। समुचित चारा पानी न मिल पाने के कारण पशु कमजोर हो जाते हैं। वहीं क्षेत्रवासी विनोद तिवारी,आनंद अवस्थी,कृष्णकांत गुप्ता, राकेश जयसवाल,रामजी गुप्ता,अनुपम जायसवाल, दिनेश गुप्ता,गौरव गुप्ता,अमन गुप्ता, शुभम गुप्ता,विकास जायसवाल,राहुल मिश्रा, पुष्पेंद्र वर्मा,उपेंद्र शुक्ला, आदित्य अवस्थी आदि का कहना है कि अब जब पशुओं को चारा पानी के लिए मिलने वाली धनराशि सरकार ने ₹30 से बढ़ाकर ₹50 कर दी है तब भी गौशालाओं में पशु कुपोषित होकर जान गंवा रहे हैं यह सोंचनीय विषय है। यदि ब्लॉक,तहसील और जनपद स्तरीय आला अधिकारी समय-समय पर गौशालाओं का नियमित निरीक्षण करें तो गौशालाओं में गोवंशों के जीवन से हो रही लापरवाही पर शायद विराम लग सकेगा।

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