साहबों की फाइलों में गौशालाओं का मौसम गुलाबी है

 

गौशालाओं में संरक्षित पशुओं को हांड कंपाती सर्दी से बचाव के लिए नहीं किए गए समुचित उपाय।

बीमार,कमजोर और गोवंश के छोटे बछड़ों को सर्दी से बचाने के लिए उन पर नहीं डाली गई टाट के बोरों की झाल।

गौशालाओं में विद्युतीकरण न होने से रात के अंधेरे में गोवंशों पर हमला कर रहे हिंसक जंगली जानवर।

सांडा(सीतापुर)सुधीर सिंह कुम्भाणी- योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल गोवंश की सुरक्षा जो आज के समय में लाभ न दे पाने के कारण बेसहारा हो गया है। बेसहारा गोवंश का जीवन बचाने के लिए जहां बड़ी संख्या में गौशालाओं का निर्माण कराया गया है वही उनके भरण पोषण की राशि अब 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही व अनदेखी से न तो उन्हें जीवन बचाने के लिए समुचित रूप से चारा पानी मिल पा रहा है न ही माह पूस की हांड कंपाती ठंड से बचने के लिए जरूरी सुविधाएं।
क्षेत्र में गन्ने की पत्ती और धान का पुवाल बहुतायत में उपलब्ध होने के बावजूद गौशालाओं में संरक्षित गोवंशों को कड़ाके की सर्दी से बचाने के लिए उनके सेड में नहीं डाला जा रहा है। बीमार व कमजोर तथा गोवंश के छोटे बछडों को इस हांड कंपाती ठंडक से बचाने के लिए उन पर टाट के बोरों की झाल भी नहीं डाली गई है। गौशालाओं में सुरक्षा के लिए पर्याप्त उजाला और ठंड से बचाव के लिए अलाव का प्रबंध भी नहीं हो पा रहा है। गौशालाओं में संरक्षित पशुओं को हरा चारा देने के लिए बड़ी संख्या में ग्राम समाज की सरकारी जमीन और चरागाहों को अवैध कब्जे से मुक्त तो करा लिया गया है लेकिन अब इस जमीन पर चारा नहीं उग पा रहा है। गौशालाओं में तपती गर्मी के मौसम में पशुओं को छांव देने के लिए वृक्षारोपण जैसे जरूरी काम भी नहीं हो पाए हैं। गौशालाओं में इतनी अव्यवस्थाओं के बावजूद आला अधिकारियों की फाइलों में सब कुछ चकाचक है।
क्षेत्रवासी राकेश वर्मा, रामजीवन वर्मा,श्रीकेशन भार्गव,गुलशन सिंह,राजेश यादव, विजय प्रताप सिंह,गौरव गुप्ता,दिनेश गुप्ता,सर्वेश यादव,बबलू वर्मा,राम प्रकाश,संजय गुप्ता, विनोद तिवारी,महेश मिश्रा,आनंद अवस्थी, अरविंद दीक्षित,जगदीश वर्मा,अनूप भारती,अमित जायसवाल,पप्पू सिंह, रमेश भार्गव,आशीष गुप्ता आदि का कहना है यदि समय-समय पर आला अधिकारी गौशालाओं का औचक निरीक्षण करें तो गौशालाओं में संरक्षित गौवंशों की बदहाली की हकीकत उजागर होगी।आज जिस दर से गौशालाओं में संरक्षित गौवंशों की भूख प्यास और मौसम की मार से मौत हो रही है यदि इस पर विराम नहीं लगा तो आने वाले कुछ वर्षों में गौशालाएं पशु विहीन हो जाएंगी।

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