सरकार को सलाह 2000की नोट बदलने को लेकर पूर्व कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने सरकार को कुछ नियम सुझाए है


सरकार को सलाह 2000की नोट बदलने को लेकर पूर्व कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह ने सरकार को कुछ नियम सुझाए है ।

नोट बदलने की प्रक्रिया हर बैंक में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में हो और हर नोट बदलने वाले की रिकॉर्डिंग सीसीटीवी में जरूर हो और कंट्रोल रूम हर जिले में बनाकर वहां पर हर बैंक की नोट बदलने की सीसीटीवी फुटेज देखकर निगरानी की जाए और शाम को हर बैंक से सूचना लेकर मिलान किया जाए।

               सरकार को नियम सुझाव प्रस्तुत है।

 

2000 रुपए के नोट बंद करके सरकार ने बहुत अच्छा कदम उठाया है।,क्योंकि जितने 2000 के नोट सरकुलेशन में नहीं थे उनको कहीं न कहीं काले धन के रूप में लोगों ने अपनी तिजोरी में रख रखा है। क्योंकि₹500 की नोटों की गड्डीयों की अपेक्षा 2000 के नोट की गड्डियों को रखना आसान था। 2000की नोट जो भी अब बैंक में आएंगे उनमें से अधिकांश रुपए कालेधन वालों के ही होंगे और वह यदि पकड़ा जाए तब 2000की नोट को बंद करने का लाभ अर्थव्यवस्था को भी होगा सरकार को भी होगा और भ्रष्टाचार पर चोट भी होगी।

       अब सरकार ने नया जो सर्कुलर जारी किया उसके हिसाब से कोई भी 10 नोट्स लेकर किसी बैंक में भी जाए उसके बदले उसे दूसरे नोट मिल जाएंगे इसका हिसाब नहीं रखा जाएगा कि यह 10 नोट कौन बैंक में बदलने के लिए आया था। इसका मतलब एक व्यक्ति जिसने रुपए काले धन के रूप में छिपा रखे हैं वह आसानी से अपने 2000 के नोटो को ₹500 के नोटों में 3 महीने में बदल लेगा।

      दूसरा बैंक को मजे आ गए बैंक से सांठगांठ करके करोड़ों रुपए कोई भी व्यक्ति बैंक मैनेजर को देगा और बैंक मैनेजर उससे कुछ कमीशन लेकर 2000 नोटों के बदले उसे 500 आराम से दे देगा क्योंकि बैंक को रुपए बदलने वाले का हिसाब नहीं रखना है और ना ही जो नोट बदल रहा है उसे अपना विवरण देना है।

      काली कमाई करके जिन्होंने 2000 के नोट तिजोरी में बंद करके रखे हैं उन्हें कोई नुकसान वर्तमान बनाई गई व्यवस्था से होने वाला नहीं बल्कि कुछ पैसे बैंक मैनेजर को दे करके करोड़ों रुपए भी आसानी से काला धन रखने वाले लोग बदल लेंगे।

 मेरे विचार से हर बैंक में नोट बदलने वालों का ही सी टी वी कैमरा में रिकॉर्ड जरूर हो कि कौन व्यक्ति आया कितने रुपए बदले भले लिखित में स्लिप न ली जाए। और इन सीसीटीवी कैमरे की मॉनिटरिंग किसी न किसी कंट्रोल रूम में हो और हर बैंक से शाम को हिसाब लिया जाए कि कितने लोग आए थे कितने नोट बदले गए और इसकी मिलान सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से किया जाए। नहीं तो वास्तव में आएंगे कम और वह दिखा देगा ज्यादा। क्योंकि वास्तव में लोग आएंगी नहीं एक आदमी आएगा अपने करोड़ों रुपए बैंक मैनेजर को दे जाएगा और बैंक मैनेजर कमीशन लेकर के काले धन वाले के लिए बदल देगा।

 इसलिए अगर किसी बैंक द्वारा इस तरह की हेरा फेरी किसी कालेधन वालों के साथ मिलकर की जाती है इस वीडियो को देख करके पता लगा सकता किस दिन कितने लोग आए थे और कितने नोट बदले गए अगर उससे ज्यादा नोट बदले गए हैं अनुपातिक रूप में तो आसानी से उस बैंक मैनेजर को पकड़ा जा सकता है।

  दूसरा खुफिया तंत्र को हर बैंक की निगरानी करने के लिए लगा देना चाहिए कौन बैंक मैनेजर गड़बड़ी कर रहा है नहीं तो नोटबंदी की तरह बैंक मैनेजर इस 2000 के नोट की बदलने में भी काले धन वालों की मदद करके व्यवस्था को फेल कर देंगे।

सरकार को बिना देर किए नोट बदलने की प्रक्रिया को भले लिखित में कोई फार्म ना भराया जाए लेकिन सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में करना चाहिए और सीसीटीवी की फुटेज एक कंट्रोल रूम में देखी जाए और शाम को हर बैंक से कितने लोगों ने नोट बदला कितने नोट बदले और उसका मिलान सीसीटीवी फुटेज से करके सुनिश्चित कर लिया जाए जिससे बैंक मैनेजर कमीशन लेकर के नोट बदलने का काम ना कर सके और व्यवस्था काले धन वालों के ऊपर एक चोट लगे।


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