आम की फसल को कीट एवं व्याधि से बचायें

सीतापुर दिनांक 26 फरवरी 2022  जिला उद्यान अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि आम के गुणवत्तायुक्त उत्पादन के लिए सम-सामयिक महत्व के कीट एवं रोगांे का उचित समय प्रबन्धन नितान्त आवश्यक है, क्योंकि बौर निकलने से लेकर फल लगने तक की अवस्था अत्यन्त ही संवदेनशील होती हे। वर्तमान में आम की फसल को मुख्य रूप से भुनगा एवं मिज कीट तथा खर्रा रोग से क्षति पहुॅचने की सम्भावना रहती हैै।
आम के बागों में भुनगा कीट कोमल पत्तियों एवं छोटे फलों के रस चूसकर हानि पहुॅचाते हैं। प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है साथ ही यह कीट मधु की तरह का पदार्थ भी विसर्जित करता है, जिससे पत्तियों पर काले रंग की फफूॅद जम जाती है, फलस्वरूप पत्तियों द्वारा हो रही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मंद पड़ जाती है। इसी प्रकार से आम के बौर में लगने वाला मिज कीट मंजरियों एवं तुरन्त बने फलों तथा बाद में मुलायम कोपलों में अण्डे देती है, जिसकी सूॅडी अन्दर ही अन्दर खाकर क्षति पहुॅचाती है, प्रभावित भाग काला पड़ कर सूख जाता है। भुनगा एवं मिज कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड (0.3मि0ली0 प्रति लीटर पानी) या क्लोरपाइरीफस (2.0मि0ली0/ली0 पानी) अथवा डायमेथोएट (2.0मि0ली0/ ली0 पानी) की दर से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।
इसी प्रकार खर्रा रोग के प्रकोप से ग्रसित फल एवं डंठलों पर सफेद चूर्ण के समान फफॅूद की वृद्धि दिखाई देती है। प्रभावित भाग पीले पड़ जाते हैं तथा मंजरियॉं सूखने लगती हैं। इस रोग से बचाव हेतु ट्राइडोमार्फ 1.0मिली0 ली0 या डायनोकेप 1.0मिली0ली/ली0पानी की दर से भुनगा कीट के नियंत्रण हेतु प्रयोग किये जा रहे घोल के साथ मिलाकर छि़काव किया जा सकता है।
बागवानों को यह भी सलाह दी जाती है कि बागों में जब बौर पूर्ण रूप से खिला हो तो उस अवस्था में कम से कम रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जाये जिससे पर-परागण क्रिया प्रभावित न हो सके।

कीटनाशक के प्रयोग में बरती जाने वाली सावधानियॉं-
1. कीटनाशक के डिब्बों को बच्चों व जानवरों के पहुॅंच से दूर रखना चाहिए।
2. कीटनाशक का छिड़काव करते समय हाथों में दस्ताने, मुॅह को मास्क व ऑखों पर चश्मा पहनकर ढंक लेना चाहिए, जिससे कीटनाशी त्वचा व ऑखों में न जाये।
3. कीटनाशक का छिड़काव शाम के समय जब हवा का वेग अधिक न हो तब करना चाहिए अथवा हवा चलने की विपरीत दिशा में खड़े होकर करना चाहिए।
4. कीटनाशक के खाली पाउच/डिब्बों को मिट्टी में दबा देना चाहिए।

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