राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु के संयोजन में सामाजिक समरसता कविगोष्ठी का आयोजन

बिसवां -सीतापुर
राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु के संयोजन में सामाजिक समरसता कविगोष्ठी का आयोजन किया गया। महर्षि विद्या मंदिर इंटर कालेज लखनऊ में आयोजित इस कवि गोष्ठी के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक अध्यक्ष जगदीश मित्तल परमार्थी व अध्यक्ष वरिष्ठ कवि नरेंद्र भूषण ने मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण कर कवि गोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि व अध्यक्ष सहित अति विशिष्ट अतिथि अनूप श्रीवास्तव प्रबंधक महर्षि विद्यामंदिर व विशिष्ट अतिथि केजीएमयू लखनऊ ट्रामा सेंटर के अधीक्षक डा अमिय अग्रवाल क्षेत्र अध्यक्ष शिवकुमार व्यास तथा अवधप्रांत अध्यक्ष अजय प्रधान का माल्यार्पण कर व अंगवस्त्र भेंटकर स्वागताध्यक्ष कवि कृष्ण पाल सिंह दिनकर ने सम्मानित किया। कविगोष्ठी का शुभारम्भ कवि संगम लखनऊ उत्तर इकाई की अध्यक्ष डा शोमा दीक्षित भावना द्वारा प्रस्तुत वाणी वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि जगदीश मित्तल परमार्थी ने अपने संबोधन में कहा की राष्ट्र जागरण व समाज प्रबोधन का सशक्त माध्यम है कविता और कविता की मशाल को प्रज्वलित रखने का माध्यम हैं कविगोष्ठी। कविगोष्ठी के अध्यक्ष नरेंद्र भूषण ने कविगोष्ठी के बृहद स्वरुप की सराहना करते हुए कवि संगम की टीम को बधाई दी। अपने दोहे सुनाकर गागर में सागर भर दिया। संयोजक कमलेश मौर्य मृदु ने समाजिक समरसता को समर्पित छंद पढ़ कर खूब तालियां बटोरीं
हम राम को बेर खिलाते रहे खुद खाने में हैं सकुचाते रहे।
गले केवट राम लगाते रहे हम छाया से भी कतराते रहे।
जड़ पत्थर की रहे पूजते मूर्तियां चेतन को ठुकराते रहे।
इसी पाप का शाप लगा हमको लुटते पिटते पछताते रहे।।
उन्होंने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि
हम सिर्फ कथायें सुनायें नहीं उनकी भी व्यथाएं सुनें तो सही।
सबमें सियाराम का अंश विराजित आचरणों में गुनें तो सही।
“मृदु” भेद के भाव की भित्ति ढहाकर प्रेम का पंथ चुनें तो सही।
नव नील व भील गले लगने को हैं आतुर राम बने तो सही।।
हमीरपुर से पधारे कुलदीप कृष्ण ने कहा
सामाजिक समरसता का मैं मूलमंत्र बतलाता हूं
राम का जीवन गाता हूं मैं रात का जीवन गाता हूं।।
महराज नगर सीतापुर की युवा कवयित्री कु . दिव्या वर्मा विद्यार्थी ने श्रृंगार का गीत सुनाकर सबका मन मोह लिया
प्रेम मे हारे ये कारे कारे नयन।
रात-भर राह तकते हमारे नयन।।
सीतापुर कसे पधारी होनहार युवा कवयित्री कु. विदुषी विदु ने अपनी भावनाओं को इस तरह उकेरा
अपना सबकुछ समर्पित किया था तुम्हें।
अपनी सांसों में हर पल जिया था तुम्हें ।
वरिष्ठ कवि मनोज अवस्थी शुकदेव के मुक्तक बहुत सराहे गए
काम से काम रखना बड़ा काम है। जिंदगी बस सुबह दोपहर शाम है।
राम के नाम का नित करें स्मरण,
राम से भी बड़ा राम का नाम है।।
कवि अमित श्रीवास्तव ने श्रृंगार की ग़ज़ल सुनाकर वाह वाही लूटी
गुल के बिना यह गुलशन कैसा।
इश्क बिना यह जीवन कैसा।
सबके प्रति यदि प्यार न हो तो,
समरसता का चिन्तन कैसा।।
आजमगढ़ की ओजस्वी कवयित्री डा रेनू सिंह ने रानी लक्ष्मीबाई पर रचना सुनाकर वीररस का परिपाक किया।
इस समरसता कवि गोष्ठी में वरिष्ठ हास्य कवि मुकुल महान, वरिष्ठ कवि रविमोहन अवस्थी, ख्यातिलब्ध कवयित्री शिखा श्रीवास्तव, पं विजयलक्ष्मी, अनुपमा श्रीवास्तव, श्रीमती मधु पाठक, रामप्रकाश त्रिपाठी, राजुल मेहरोत्रा, विजय तन्हा, कृष्ण कुमार मौर्य सरल, प्रभाकर शुक्ला, सिद्धांत अवस्थी, श्रीमती सरोज बाला, सुनीता प्रभाकर, अतुल बाजपेई, कुमार तरल, महेश प्रसाद गुप्ता, संध्या त्रिपाठी, उमेश प्रकाश सक्सेना, शिवम् श्रीवास्तव , शीतला प्रसाद त्रिपाठी मृदुल, मृगांक श्रीवास्तव, रविप्रकाश रुद्रांश, श्रीमती छाया त्यागी, रुद्रनाथ पाठक, सुनील हर्ष , अमित वर्मा, जी एल गांधी, प्रवीण पाण्डेय, डा गौरीशंकर वैश्य विनम्र, कृष्णानंद राय, इंदु श्रीवास्तव, डा बबली सिंह , विनोद कलहंस, प्रियांशु अवस्थी, अरूण कुमार गंवार, राघवेंद्र प्रताप वर्मा , युवा ओज कवि मनुव्रत बाजपेई व विकलांग साथी ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु कांत मिश्र सहित 76 कवियों ने काव्यपाठ कर कविगोष्ठी को ऊंचाइयां प्रदान कीं। कविगोष्ठी का सफल संचालन बाराबंकी से पधारे हास्य कवि संदीप अनुरागी ने किया। इस अवसर पर कृष्णपाल सिंह दिनकर को राष्ट्रीय कवि संगम लखनऊ के मंत्री व विजय तन्हा को लखनऊ उत्तर इकाई का महामंत्री मनोनीत किया गया। लखनऊ उत्तर इकाई की अध्यक्ष डा शोमा दीक्षित भावना ने आभार प्रकट किया।

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