पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारतीय सेना और वायु सेना द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘मेगा सर्जिकल नेत्र शिविर’ में सेना के डॉक्टरों ने 374 मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाई

पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारतीय सेना और वायु सेना द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘मेगा सर्जिकल नेत्र शिविर’ में सेना के डॉक्टरों ने 374 मरीजों की आंखों की रोशनी लौटाई

इस ‘मेगा नेत्र शिविर’ में सर्जिकल टीम का नेतृत्व विश्व-प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ तथा आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली के नेत्र विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा द्वारा किया गया

भारतीय सेना और वायु सेना द्वारा संयुक्त रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली बार आयोजित अत्याधुनिक ‘मेगा सर्जिकल नेत्र शिविर’ का आज’ 12 वायु सेना अस्पताल’, गोरखपुर में सफलतापूर्वक औपचारिक समापन हुआ। करुणा और बेहतरीन सर्जरी का उदाहरण पेश करते हुए भारतीय सेना और वायु सेना की विशिष्ट नेत्र चिकित्सा टीम के नेतृत्व में संचालित इस ऐतिहासिक अभियान ने “राष्ट्र प्रथम” की पवित्र भावना के तहत सैकड़ों लोगों के जीवन में नया प्रकाश भर दिया।
इस अवसर पर एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सेंट्रल एयर कमांड एयर मार्शल बी. मणिकांतन उपस्थित रहे। इस क्रम में सर्ज वाइस एडमिरल डॉ. आरती सारिन, महानिदेशक सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं (DGAFMS) तथा एयर मार्शल संदीप थरेजा, महानिदेशक चिकित्सा सेवाएं (वायु) [DGMS (Air)] द्वारा उच्च स्तरीय निरीक्षण किया गया।
भारतीय सेना और वायु सेना द्वारा आयोजित यह ‘मेगा सर्जिकल नेत्र शिविर’ एक बड़ी मानवीय उपलब्धि है, जिसने राज्य के इस हिस्से में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। इस ‘मेगा नेत्र शिविर’ सेना के चिकित्सकों द्वारा अथक परिश्रम करते हुये रिकॉर्ड 374 लोगों के आंखों का ऑपरेशन करके उन्हें एक नया जीवन दिया गया। ‘मेगा नेत्र शिविर’ की शुरुआत बेहद प्रभावी रही और पहले ही दिन 100 से अधिक लोगों की आंखों कासफल ऑपरेशन किया गया। ‘मेगा नेत्र शिविर’ आयोजन के दूसरे दिन तक यह विशेष अभियान समाज के उपेक्षित वर्गों तक पहुंचा और ‘माटी फाउंडेशन’ के 20 मरीजों के आंखों की सर्जरी की गई। यह ‘मेगा नेत्र शिविर’ पूरे क्षेत्र के लिए आशा की नयी किरण बना, जहां पड़ोसी देश नेपाल के साथ – साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, देवरिया, महराजगंज और गोरखपुर जिलों के ग्रामीण इलाकों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
इस अभियान का मानवीय प्रभाव गोरखपुर निवासी 69 वर्षीय श्री अमरनाथ गुप्ता की आंखों से सबसे अच्छी तरह समझा जा सकता है, जिनकी दुनिया धीरे – धीरे एक डरावनी, अंधेरी धुंध में बदल गई थी। कई वर्षों से कमजोर होती नजर के कारण वे अपने पोते – पोतियों के चेहरे देखने की साधारण खुशी से भी वंचित हो थे। इस ‘मेगा नेत्र शिविर’ में सफल सर्जरी के बाद भावनाओं से अभिभूत श्री गुप्ता उन सैकड़ों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें “नई रोशनी का जीवन” मिला है और उनकी कहानी इस बात की मार्मिक याद दिलाती है कि भारतीय सेना के चिकित्सकों की यह विशिष्ट टीम हमारे देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक क्यों पहुंचती है।
इस “फ्लाइंग हॉस्पिटल” का नेतृत्व आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर), नई दिल्ली के नेत्र विज्ञान विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा, ने किया, जिन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल रवि चौहान और मेजर अमृता जोशी सहित समर्पित सर्जिकल टीम का सहयोग मिला, जिनके अथक प्रयासों ने इस शिविर की ऐतिहासिक सफलता सुनिश्चित की।

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