
कस्बा मिश्रित का दधीचि कुंड तीर्थ उपेक्षा का सिकार
मिश्रित सीतापुर / महर्षि दधीचि की पावन तपो भूमि कस्बा मिश्रित में प्रत्येक वर्ष महर्षि दधीच की स्मृति में होने वाला 84 कोशीय धार्मिक होली परिक्रमा अपने 10 बाहरी पड़ाव पार करता हुआ दिनांक 28 फरवरी को कस्बा मिश्रित आ जाएगा । परंतु कस्बा मिश्रित की सभी व्यवस्थाए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं । आपको बताते चले कि बीते 12 वर्षों से केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की आध्यात्मिक सरकार है । और बीते 9 वर्षों से आध्यात्मिक सरकार उत्तर प्रदेश में मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सरकार बनी हुई है । लेकिन आज तक किसी की नजर धार्मिक कस्बा मिश्रित पर नहीं गई है । यहां के पवित्र दधीचि कुंड तीर्थ में त्रलोक्य के सब तीर्थों का जल मिश्रित है । जिसमें महर्षि दधीचि ने स्नान किया था । इस लिए इस क्षेत्र का नाम मिश्रित तीर्थ पड़ा है । आज यह पवित्र तीर्थ स्थल आध्यात्मिक सरकार होने के बावजूद भी पूरी तरह से उपेक्षा का सिकार होकर रह गया है । आपको बता दें कि बीते समय यह 84 कोशीकय धार्मिक परिक्रमा मिश्रित तीर्थ के दधीचि कुंड से प्रथम पड़ाव कोरौना को जाता था । परंतु यहां पर उपेक्षाओं का शिकार होने के कारण यह 84 कोशीय परिक्रमा कुछ सिकायती लोग नैमिषारण्य लेकर चले गए । और वहां के चक्र तीर्थ से यह परिक्रमा संपन्न होने लगा है । जो सतयुग कालीन महर्षि दधीचि का अपमान है । सियासतों के चलते अब नैमिषारण्य चक्र तीर्थ में स्नान करने के उपरान्त पहला आश्रम से डंका बजने के बाद यह परिक्रमा शुरू हो जाता है । जब कि प्रदेश सरकार द्वारा निर्देश था । कि साधू , संतों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया जाय । लेकिन इस स्वागत समांरोह के दौरान भाजपा विधायक रामकृष्ण भार्गव की पुत्र वधू नगर पालिका मिश्रित नैमिषारण्य की अध्यक्ष है । वह मौके पर नहीं पहुंची न ही कोई भारतीय जनता पार्टी का जनप्रतिनिधि सांसद और विधायक भी नहीं पहुंचा । तो क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुनेंद्र अवस्थी व रामगढ़ चीनी मिल के अध्यक्ष राम गोपाल अवस्थी आदि व्यक्तियों ने मौके पर पहुंचकर साधू संतों को पुष्प वर्षा करते हुए स्वागत किया । आज यह 84 कोशीय परिक्रमा अपने बाहरी 10 पड़ाव पार करके एकादशी के दिन कस्बा मिश्रित आ जाएगा । जहां पर लाखों परिक्रमार्थी , संत , महंत 5 दिनों तक कस्बा मिश्रित का रैन बसेरा करते हुए यहां महर्षि दधीचि की पंचकोसी परिक्रमा करेंगे । और पूर्णिमा के दिन महर्षि दधीच कुंड तीर्थ में बुड़की स्नान करके सभी परिक्रमार्थी पने अपने ग्रह जनपदों को चले जाएंगे ।