विद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जा: जिला पंचायत के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, कब मिलेगा नौनिहालों को उनका अधिकार?

 

विद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जा: जिला पंचायत के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश, कब मिलेगा नौनिहालों को उनका अधिकार?

नैमिष टुडे/संवाददाता

लखीमपुर खीरी। जिले के कई विकास खंडों में विद्यालयों के नाम दर्ज भूमि पर जिला पंचायत ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। दो दशकों से अधिक समय से इन जमीनों को ठेकेदारों के हाथों सस्ते दामों पर लीज पर दिया गया, जिससे निजी स्वार्थ के लिए मोटी रकम वसूली गई। जबकि कानून के जानकारों का कहना है कि 1997 में शासन द्वारा जारी आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि विद्यालयों की जमीनों को अधिग्रहित कर उन्हें ठेके या नीलामी पर दिया जाए। फिर भी जिला पंचायत ने मनमानी करते हुए सरकारी स्कूलों की भूमि को ठेकेदारों को सौंप दिया, जिससे बच्चों के खेल मैदान और अन्य सुविधाओं के विकास पर सीधा असर पड़ा।

कानून की अनदेखी कर हुआ बड़ा खेल

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए ठेकेदारों से मोटी रकम लेकर विद्यालयों की जमीन को नीलामी के जरिए सौंप दिया। जबकि नियमों के अनुसार, जिला पंचायत को केवल अपनी स्वयं की जमीन को ठेके पर देने और उससे प्राप्त धन से बाजार या कॉम्प्लेक्स बनाकर किराया वसूलने का अधिकार था। लेकिन अधिकारियों ने इस आदेश की गलत व्याख्या कर विद्यालयों की भूमि को भी ठेके पर दे दिया। जागरूक नागरिकों का कहना है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, पर प्रशासन मौन

सरकार जहां बच्चों की शिक्षा और उनके शारीरिक विकास को लेकर तमाम योजनाएं चला रही है, वहीं जिला पंचायत द्वारा स्कूलों की जमीन को ठेके पर देकर निजी जेबें भरना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि नैतिक रूप से भी निंदनीय है। अगर विद्यालयों को उनकी जमीन वापस मिल जाए, तो वहां खेल मैदान और अन्य सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं, जिससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक और शारीरिक विकास का अवसर मिलेगा।

अब क्या होगी कार्रवाई?

अगर इस घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि इस गंभीर मामले पर तुरंत संज्ञान ले और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। जागरूक नागरिकों और अभिभावकों ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गड़बड़ी को लेकर कब तक कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?

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