अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में सामाजिक संस्था के द्वारा भागवत कथा के आयोजन का हुआ विश्राम-डॉ. कौशलेन्द्र पाण्डेय

 

श्रीमद् भगवद् फाउंडेशन द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन संत कुटी पलटू दास आश्रम लखनऊ उत्तर प्रदेश में किया गया यह कथा 17 जनवरी से प्रारंभ हुई और 24 को कथा का विश्राम दिवस था 25 को पूर्णाहुति एवं भंडारा हुआ इस कथा के कथा वाचक डॉ. श्री कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महराज ने कहा कि भागवत रूपी अमृत कलश की एक भी बूंदें व्यर्थ नहीं जानी चाहिए कौशलेंद्र महराज जी ने कहा कि भागवत जिज्ञासा का विषय है हम जीवन में हर क्षण जाने – अनजाने में पाप कर्म लादते चल रहे हैं ! कलयुग में भक्ति ही एकमात्र उपाय है जो इस दुर्लभ मनुष्य जीवन को मंजिल तक पहुंचा सकता है ! जीवन में सफलता के लिए जिस तरह जोश और होश की जरुरत होती है , उसी तरह भागवत श्रवण में भी जोश के साथ होश भी जरुरी है ! यह ऐसा अमृत कलश है जिसकी एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जानी चाहिए ! भागवत न तो ज्ञानियों का विषय है और न ही मूर्खों का ! भक्ति , भक्त , भागवान और भागवत परमात्मा से मिलने के एक दुसरे जुड़े सेतु हैं
भागवत ज्ञानयज्ञ के शुभारम्भ में श्रोताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा की जीव जब कथाश्रवण करता है तो उसके विचारसुन्दर हो जाते है। इससे उसका लौकिक और पारलौकिक जीवनसुखमय हो जाता है। भागवत सभी रोगों का निवारण करने वाली औषधी है लेकिन जरूरत है तो इसक गुणों को जानने की। अहंकार,लोभ, क्रोध,लालच,और पापों से दूर रहनेके लिए भागवत कथा का श्रवणअनिवार्य है। पूज्य कौशलेंद्र महाराज जी ने कहा कि मानव वह नहीं जो गलती करके उसे स्वीकार न करे बल्कि सच्चा इंसान तो वह है जो गलती करके उसे स्वीकार करने के साथ-साथ आगे से न दोहराने की शपथ लेता हो और यह भागवत हमेंक् सिखाती है कि क्या गलत है व क्या सही है। आज का इंसान भागवत महापुराण से अपने सुखी जीवन के लिए जो कुछ भी मांगता है असल में वह सुख की वस्तुएं नहीं बल्कि सांसारिक भोग विलास की वस्तुएं हैं। सच्चा सुख अगर किसी में है तो वो मेरे गोविंद की भक्ति में है।अरे कलयुग के प्राणियों कलयुग में तो भगवान का नाम मात्र लेने से ही व्यक्ति सांसारिक भोग विलास से मुक्त होकर भगवान के धाम में पहुँच जाता है। भागवत कथा का श्रवण मात्र ही हमारे जीवन के साथ-साथ हमारी मृत्यु को भी संवार देता है। इस महा आयोजन में अतुल शास्त्री, सूरज शास्त्री, खुशबू दिनेशानन्द, आशुतोष, नीरज,सुमन मिश्रा, शीलू सिंह,प्रमोद सिंह आदि अपार श्रोताओं की भीड़ जमा थी और श्रोताओं ने अमृतमय कथा का लाभ लिया ।

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