नैमिषारण्य के चौरासी कोसीय परिक्रमा पथ पर लोक भारती करेगी हरिशंकरी पौधा रोंपण ।

 

मिश्रित सीतापुर / चौरासी कोसी परिक्रमा हरिशंकरी माला अभियान चलाया जा रहा है प्रदेश में चार प्रमुख तीर्थों पर चौरासी कोसी परिक्रमा करने का विधान है I अयोध्या धाम , चित्रकूट धाम , मथुरा ब्रज चौरासी कोसी परिक्रमा , नैमिषारण्य धाम। भक्तगण अपने परिवारों के साथ पैदल ही परिक्रमा करते थे। उनके साथ में बच्चे , वृद्ध जनों के लिए तथा भोजन व्यवस्था और रात्रि निवास व्यवस्था आदि के लिए बैलगाड़ी रहा करती थीं। चौरासी कोसी परिक्रमा लग भग 300 कि.मी. होती है । जबकि ब्रज चौरासी कोसी परिक्रमा 360 कि.मी. की है । जो 40 दिन में पूरी होती है । यात्रा के समय मार्ग में छाया, पीने, भोजन व्यवस्था और स्नान आदि के लिए स्वच्छ जल, आवागमन हेतु सुविधा जनक मार्ग तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की आवश्यकता होती है। प्रदेश सरकार इस दृष्टि से सड़क का चौड़ीकरण, पड़ाव स्थलों का निर्माण तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के साथ सौन्दर्यीकरण का कार्य भी करवा रही है। इन यात्राओं में भौतिक सुविधाओं से अधिक सामाजिक सहभाग और सहयोग का अत्यधिक महत्त्व है । जो सरकारी मशीनरी के द्वारा ही सम्भव नहीं है I लोकभारती ने सामाजिकसहभागिता के द्वारा पूरे परिक्रमा पथ पर कुछ कार्य कराने का संकल्प लिया है । प्रत्येक कोस पर चबूतरे और सुरक्षा व्यव्स्था के साथ हरिशंकरी रोपण। हरिशंकरी अर्थात एक थाले में एक साथ पीपल, बरगद और पाकड़ के पौधों का रोपण। एक हरिशंकरी रोपण से निम्नलिखित पुण्य प्राप्त होते हैं यह तीनो पौधे वर्षा जल को अत्यधिक संरक्षित करने वाले पौधे हैं । इनका रोपण होगा वहां जल कलश की स्थापना हो जाएगी I सनातन में प्रत्येक शुभ कार्य जल कलश स्थापना से ही प्रारम्भ होता है I इस जल कलश से भूगर्भ जल स्तर बढ़ जाएगा जिससे कुआं तथा अन्य जलस्रोत पुनर्जीवित होने लगेंगे। इनके बड़े होने पर बड़ी एवं सघन छाया का निर्माण होता है जिसके नीचे अतिथि को छाया, गांव की चौपाल, यात्रियों के लिए धर्मशाला बन जाएगी I यह तीनो फल दार पौधे हैं । जो पूरे वर्ष फल देते हैं । चिडियों के लिए घर और भोजन दोनों उपलब्ध होगा, जिससे भंडारे का पुण्य प्राप्त होगा। यह तीनो पौधे सर्वाधिक आक्सीजन देने वाले पौधे हैं । इसके लगने से एक फैक्ट्री का निर्माण हो जाएगा। अनेकानेक जीवो को संरक्षण देने के कारण जैव विविधता का संरक्षण होता है
हरिशंकरी माला- लोकभारती ने उत्तर प्रदेश के चारो तीर्थों अयोध्या, चित्रकूट, ब्रज और नैमिषारण्य के चौरासी कोसी परिक्रमा पथ पर प्रत्येक कोस पर विविध अन्य व्यवस्थाओं के साथ हरिशंकरी रोपण का का किया जाएगा अर्थात प्रत्येक परिक्रमा पथ 84- 84 हरिशंकरी पौधों का रोपण किया जाएगा।
लोकभारती ने तय किया है कि सबसे पहले नैमिषारण्य में 24, 25, 26 दिसंबर को हरिशंकरी रोपण की तैयारी यात्रा होगी, उसके पाश्चात्य अप्रैल माह में चित्रकूट में तैयारी यात्रा आयोजित की जाएगी।

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