*कैसे लगा राजा परीक्षित को श्राप और कैसे कथा सुनकर राजा परीक्षित ने अपना तरणतार किया*

 

मछलीशहर/जौनपुर ब्यूरो चीफ अरुण कुमार दुबे नैमिष टुडे

मछली शहर विधानसभा के चकिया–भटहर गांव में श्री बंशीधर तिवारी माधुरी तिवारी समाजसेविका, परीक्षित के रूप में श्री मद भागवत कथा सुन रही है सुखदेव के रूप में आचार्य रमाकांत त्रिपाठी जगन्नाथ पुरी धाम के प्रसिद्ध आचार्य है आज कथा के तीसरे दिन उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप कैसे लगा और उस श्राप का राजा परीक्षित ने खुद अपने परिश्रम से तरण तारणहार कैसे किया इस कथा का वर्णन किया । आचार्य रमाकांत त्रिपाठी जगन्नाथ पुरी धाम ने बताया कि मानव जीवन अनमोल है जीवन का असली साथी धर्म है बड़े भाग मानुष तन पावा इसी तन में हजारों जीवन की रक्षा का दायित्व एक मनुष्य तन के ऊपर होता है दया दान दक्षिणा, धर्म का प्रथम कर्तव्य है क्रोध माया मोह को मनुष्य को अपने अंदर संयम में रखना चाहिए । इस संसार में मनुष्य ना कुछ लेकर आया है ना कुछ लेकर जाएगा मुट्ठी बंद कर आया है जाते समय हाथ प्रसार कर जाएगा परलोक जाते समय पूर्व जन्म के पूण्य ही आत्मा के साथ बंधकर जाएंगे । इस अवसर पर जज सिंह अन्ना सहित गांव के प्रमुख माताएं बहने बच्चियों ध्यान मग्न होकर कथा का अमृत रसपान सुन रही है आचार्य रमाकांत त्रिपाठी बहुत ही विद्वान पंडित है जिनका स्थाई निवास सतना है और जगन्नाथ पुरी में अपना आश्रम बनाए हुए हैं ।

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