
ऐप्जा संगठन ने उच्च स्तरीय जांच के लिए एसडीएम लहरपुर को दिया प्रार्थना पत्र,
पत्रकार उत्पीड़न की न्यायोचित जांच न होने धरना प्रदर्शन का दिया अल्टीमेटम
विकास मिश्रा
नैमिष टुडे संवाददाता
सकरन/ सीतापुर।ऑल इंडियन प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (ऐप्जा) के तत्वाधान में तहसील लहरपुर इकाई तथा सकरन व तंबौर के पत्रकारों ने पत्रकारों की सुरक्षा एवं स्वतंत्र पत्रकारिता के मुद्दे को लेकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) लहरपुर को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए थाना सकरन में दर्ज एफआईआर संख्या 0220 की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच तथा मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की है। संगठन ने प्रशासन को 30 जुलाई 2026 तक का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई तो 30 जुलाई से तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 20 जुलाई 2026 को थाना सकरन में पत्रकार सतीश सिंह के विरुद्ध एफआईआर संख्या 0220 दर्ज की गई। संगठन का आरोप है कि यह मुकदमा बी-पैक्स समिति से संबंधित समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद उत्पन्न रंजिश के चलते दर्ज कराया गया है। ऐप्जा का कहना है कि पत्रकार ने निष्पक्ष एवं निर्भीक पत्रकारिता करते हुए समाचार प्रकाशित किया था, जिसके कारण उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया। संगठन ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि घटना से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान तथा अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध हैं। यदि इन सभी साक्ष्यों की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच कराई जाए तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि यदि किसी पत्रकार को केवल समाचार प्रकाशित करने के कारण झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है तो यह न केवल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता पर गंभीर हमला है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने का प्रयास भी माना जाएगा। प्रार्थना पत्र में संगठन ने प्रशासन के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं। इनमें एफआईआर संख्या 0220 की किसी वरिष्ठ अधिकारी से उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराना, घटना से जुड़े सभी वीडियो, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक जांच कराना, जांच पूरी होने तक किसी भी निर्दोष पत्रकार के विरुद्ध पक्षपातपूर्ण अथवा उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करना तथा यदि जांच में मुकदमा दुर्भावनापूर्ण, रंजिशवश अथवा असत्य तथ्यों के आधार पर दर्ज पाया जाए तो उसे समाप्त कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने की मांग शामिल है। संगठन ने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान थाना प्रभारी (एसएचओ) सकरन की भूमिका पक्षपातपूर्ण, लापरवाहीपूर्ण या नियमों के विपरीत पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही जनपद के सभी पत्रकारों के साथ निष्पक्ष, सम्मानजनक एवं संवैधानिक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार का उत्पीड़न न हो। प्रार्थना पत्र के अंत में एप्जा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 30 जुलाई 2026 को प्रातः 10:00 बजे तक उनकी मांगों पर कोई ठोस एवं न्यायोचित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन 30 जुलाई 2026 को प्रातः 10:00 बजे से उपजिलाधिकारी कार्यालय, तहसील लहरपुर परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संगठन ने यह भी कहा है कि वह लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के तहत उत्तर प्रदेश शासन, माननीय राज्यपाल, मानवाधिकार आयोग तथा अन्य सक्षम न्यायिक मंचों का भी दरवाजा खटखटाएगा। संगठन ने कहा कि यदि धरना-प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उप जिलाधिकारी धामिनी एस दास ने तथ्यों व सबूतो का अवलोकन एक सप्ताह की समय अवधि देते हुए मामले की जांच किए जाने के बाद अग्रिम कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिया है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से ऐप्जा तहसील अध्यक्ष अभिनव त्रिवेदी, महामंत्री आकाश सिंह, प्रभारी एहतिशाम बेग, देशप्रीत सिंह, ओमकार वर्मा, आलम अंसारी, खुर्शीद गौरी, खालिद मंसूरी, विश्व पाल सिंह, राममोहन राजपूत, आशु मलिक, रिंकू शुक्ला, अजीत जायसवाल, विपिन तिवारी, अभिषेक मिश्रा, मिंटू गोस्वामी, समीर अंसारी, अरविंद, अंशुमान शुक्ला, जितिन प्रसाद, छोटेलाल, रितेश कुमार, इरफान, प्रेम कुमार, मेराज, अतीक, मसूद खान, राजेश कुमार, अमरेंद्र कुमार मिश्रा, सतीश कुमार सिंह, विकास कुमार सहित पत्रकार मौजूद रहे।