
इटारा जूनियर स्कूल परिसर में हरे-भरे नीम के पेड़ों का कटान, प्रधानाध्यापिका और ग्राम प्रधान के बयानों में विरोधाभास
मैगलगंज/खीरी ग्राम इटारा स्थित जूनियर हाई स्कूल परिसर और ग्राम समाज की जमीन पर खड़े हरे-भरे नीम के पेड़ों की कटान का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि छांव देने वाले पेड़ों को स्कूल की प्रधानाध्यापिका और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से कटवा दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि नीम जैसे उपयोगी और छायादार पेड़ गांव की धरोहर होते हैं। अगर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही ऐसे पेड़ों की कटान करवाएंगे तो आने वाले समय में गांवों में हरियाली और छांव खत्म होती चली जाएगी।
मामले की जानकारी लेने पर जूनियर स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने बताया कि इस संबंध में ग्राम प्रधान को जानकारी है। वहीं जब ग्राम प्रधान से इस विषय में पूछा गया तो उन्होंने इससे साफ इनकार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी कटान की जानकारी नहीं है और यह कटान जूनियर हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका द्वारा ही कराई गई है।
ग्रामीणों के अनुसार नीम की लकड़ी से भरी ट्रॉली की सूचना वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी दी गई थी, लेकिन आरोप है कि विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रॉली में भरी नीम की लकड़ी को पलटवा दिया गया, लेकिन मामले में कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर बिना अनुमति सरकारी स्कूल परिसर और ग्राम समाज की जमीन पर खड़े पेड़ों की कटान हुई है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अब देखने वाली बात होगी कि वन विभाग और संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले में जांच कर क्या कदम उठाते हैं या मामला सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।