विधवा से डेढ़ लाख रुपये मांगने और शारीरिक शोषण का गंभीर आरोप! ADO पंचायत प्रभात सिंह उर्फ हंस प्रकाश सिंह को नोटिस, अकबरपुर के पुराने कार्यकाल की जांच की मांग

विधवा से डेढ़ लाख रुपये मांगने और शारीरिक शोषण का गंभीर आरोप! ADO पंचायत प्रभात सिंह उर्फ हंस प्रकाश सिंह को नोटिस, अकबरपुर के पुराने कार्यकाल की जांच की मांग

भीटी में विधवा की शिकायत से मचा हड़कंप, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच की मांग; जलालपुर के ADO प्रकरण ने भी बढ़ाए सवाल

नैमिष टुडे /सवाददाता

अम्बेडकरनगर। सरकारी दफ्तरों में अपने जरूरी दस्तावेज के लिए पहुंचने वाली एक विधवा महिला को क्या कथित तौर पर डेढ़ लाख रुपये मांगने और शारीरिक शोषण जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा? भीटी विकासखंड में तैनात ADO पंचायत प्रभात सिंह उर्फ हंस प्रकाश सिंह पर लगे गंभीर आरोपों ने पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में कारण बताओ नोटिस जारी होने की खबर के बाद अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

मामला नोकरापुर निवासी शोभावती उपाध्याय की शिकायत से जुड़ा है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, महिला के पति का निधन 5 अगस्त 2026 को हुआ था। इसके बाद परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराने और उसकी नकल प्राप्त करने के सिलसिले में संबंधित अधिकारी से संपर्क करने पर डेढ़ लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है। महिला ने शारीरिक शोषण का भी गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उसके पास मौजूद है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कथित रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की जांच अभी आवश्यक है।

जिला पंचायत राज अधिकारी बोले शिकायतें मिली हैं, जांच कराकर होगी कार्रवाई

मामले को लेकर मीडिया और जिला पंचायत राज अधिकारी, अम्बेडकरनगर के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता में अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच कितनी निष्पक्षता और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तथा शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

नोटिस जारी, लेकिन अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

प्रकाशित खबर के मुताबिक, पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के बाद 23 अक्टूबर को जिलाधिकारी को भी प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद विभाग की ओर से संबंधित ADO पंचायत को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

अब सवाल यह है कि क्या विभाग केवल नोटिस जारी करके अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगा, या शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच भी कराई जाएगी? कथित धन मांगने, शारीरिक शोषण और ऑडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े तथ्यों की जांच सक्षम अधिकारियों से कराई जानी चाहिए। संबंधित अधिकारी का पक्ष भी दर्ज किया जाना जरूरी है।

अकबरपुर में पूर्व तैनाती के दौरान के कार्यों की भी हो जांच

ADO पंचायत प्रभात सिंह उर्फ हंस प्रकाश सिंह कुछ ही दिन पहले अकबरपुर विकासखंड में तैनात थे। उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में अकबरपुर में उनकी तैनाती के दौरान कराए गए विकास कार्यों, सरकारी धन से हुए भुगतानों, योजनाओं के क्रियान्वयन और संबंधित अभिलेखों की नियमानुसार समीक्षा कराई जानी चाहिए।

यदि उस अवधि में भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित शिकायतें दर्ज हुई थीं, तो उनकी भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, पूर्व कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सामने आना आवश्यक है। केवल आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

जलालपुर के ADO बृजेश सिंह का प्रकरण भी चर्चा में

इसी बीच जलालपुर के ADO पंचायत बृजेश सिंह से जुड़ी मारपीट की एक घटना का भी जिक्र किया जा रहा है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले कई महिलाओं ने उनके साथ मारपीट की थी। हालांकि, इस घटना के कारणों, संबंधित शिकायतों और पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।

दोनों मामलों को एक ही घटना या एक जैसी परिस्थितियों का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। फिर भी, पंचायत विभाग के अधिकारियों से जुड़े मामलों में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।

प्रशासन से सीधे सवाल जांच कब और कार्रवाई कैसे?

– क्या विधवा की शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
– क्या कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की तकनीकी जांच होगी?
– क्या अकबरपुर में पूर्व तैनाती के दौरान हुए कार्यों और भुगतानों की समीक्षा कराई जाएगी?
– क्या जांच की प्रगति और अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे?

इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग को देना चाहिए। गंभीर शिकायतों को केवल विभागीय औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विधवा को न्याय मिलना चाहिए और शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, यदि पूर्व तैनाती के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य मिलते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई हो।

क्योंकि सरकारी पद जनता की सेवा और अधिकारों की रक्षा के लिए है किसी भी व्यक्ति की मजबूरी का कथित लाभ उठाने के लिए नहीं।

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