ईओ के आदेश से गरमाया माहौल, पत्रकारों को नसीहत देने पर उठे सवाल

ईओ के आदेश से गरमाया माहौल, पत्रकारों को नसीहत देने पर उठे सवाल

– ममूदाबाद नगर पालिका परिषद का भ्रष्टाचार उजागर होने पर ईओ बौखलाए, मीडिया को दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
– आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची पर सवाल उठने के बाद जारी किया बिना दस्तखत वाला फरमान
– कहा- बिना पुष्टि भ्रामक खबरें प्रसारित न करें, वरना होगी वैधानिक कार्रवाई
– 190 कर्मचारियों की सूची, 72 लाख की स्ट्रीट लाइट और 42 टेंडरों पर उठे हैं सवाल

सीतापुर
महमूदाबाद नगर पालिका में आउटसोर्स कर्मचारियों से लेकर विकास कार्यों और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठने के बाद पालिका प्रशासन ने पत्रकारों को ही हिदायत दी है। भ्रष्टाचार में महारत हासिल ईओ पवन किशोर मौर्य की ओर से जारी फरमान में विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया चैनलों के व्हाट्सऐप समूहों में प्रसारित सूचनाओं को भ्रामक, तथ्यहीन और मनगढंत बताया गया है। साथ ही बिना तथ्यों की पुष्टि सूचना प्रसारित करने पर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की धमकी दी गई है। हालांकि जारी फरमान में उठे आरोपों का बिंदुवार जवाब देने के बजाय पालिका अभिलेखों में कर्मचारियों का पूरा विवरण उपलब्ध होने की बात कही गई है।
नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की परतें खुलने के डर से बौखलाए ईओ ने पत्रकारों को अर्दब में लेने का शगूफा तैयार किया है। आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची, करीब 72 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और करीब डेढ़ करोड़ रुपये के 42 विकास कार्यों के टेंडर में फर्जीवाड़े के आरोपों के बीच पालिका के भ्रष्टाचारी अधिशासी अधिकारी पवन किशोर मौर्य ने खुद पर बड़ी कार्रवाई होने के डर से मीडिया और सोशल मीडिया समूह को तुगलकी फ़रमान के जरिये खबरदार रहने को कहा है। पालिका की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर विभिन्न समाचार पत्रों और मीडिया चैनलों के व्हाट्सऐप समूहों में भ्रामक, तथ्यहीन और अपुष्ट सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं। पालिका ने दावा किया है कि उसके यहां कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का नाम, पदनाम और कार्यस्थल समेत पूरा विवरण अभिलेखों में उपलब्ध है। किसी को जानकारी चाहिए तो कार्यालय में उपलब्ध सूची का अवलोकन कर प्रमाणित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किसी कर्मचारी के संबंध में सूचना प्रसारित करना अनुचित है। भविष्य में ऐसी सूचना प्रसारित किए जाने पर पालिका की ओर से नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और इसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी।

सवालों का जवाब जांच से क्यों नहीं?

दरअसल, पालिका में करीब 190 आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची सामने आने के बाद शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि इसमें कई ऐसे नाम हैं, जिनकी मौके पर मौजूदगी नहीं मिलती, जबकि उनके खातों में वेतन पहुंच रहा है। शिकायत में कर्मचारियों की फाइलों के साथ पिछले तीन महीने की सीसीटीवी फुटेज से जांच और भौतिक सत्यापन की मांग की गई है। इसी तरह करीब 72 लाख रुपये की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में गुणवत्ता और भुगतान को लेकर सवाल उठाए गए हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपये के 42 विकास कार्यों के टेंडर पर भी प्रक्रिया को लेकर शिकायत हुई है। मामले में एडीएम स्तर से ईओ से जवाब मांगे जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि यदि पालिका के अभिलेख दुरुस्त हैं तो 190 कर्मचारियों का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराकर उठे सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया जाता? आरोप गलत हैं तो जांच से तस्वीर साफ हो सकती है। वहीं जांच में अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

 

शाबाश ईओ! खुद ही व्हाट्सएप समूहों में प्रसारित कर दिया मनगढ़ंत फरमान

महमूदाबाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी पवन किशोर मौर्य का फरमान अब चर्चा का विषय बना हुआ है। मौका पाकर चौका मारने वाले ईओ की ओर से जारी फरमान में विभिन्न मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में प्रसारित सूचनाओं को भ्रामक और अपुष्ट बताया गया, वही विज्ञप्ति सबसे पहले खुद व्हाट्सएप समूहों में प्रसारित भी कर दी। ऐसे में लोग चर्चा कर रहे हैं कि अगर खबरें भ्रामक थी तो इतनी जल्दी हड़बड़ाहट में आकर फरमान जारी करने की क्या जरूरत थी। और अगर विज्ञप्ति जारी ही की थी तो हस्ताक्षर क्यों नहीं किये। इतना ही नहीं खुद ही क्यों व्हाट्सएप समूहों पर क्यों वायरल किया। जब चोरी की नही तो सफ़ाई देने की जरूरत क्या थी।

तुरुप का इक्का फेंकने से नहीं छिपेगा सच

 

महमूदाबाद नगर पालिका में गड़बड़ियों का मामला अब शतरंज की बाजी सरीखा बन गया है। आउटसोर्स कर्मचारियों की सूची, स्ट्रीट लाइट और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच ईओ पवन किशोर मौर्य बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को कुछ सभासदों के हस्ताक्षरों से पत्रकारों के सत्यापन की मांग वाला ज्ञापन सामने आने के बाद नगर की सियासत में इसे पालिका पर लगे आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। चर्चा यह है कि पालिका में फैली अनियमितताओं पर उठ रहे सवालों के बीच अब मोहरा बदलकर नई बहस खड़ी की जा रही है। हालांकि सवाल वही हैं, जो पहले थे कि 190 आउटसोर्स कर्मचारियों का सत्यापन कब होगा, 72 लाख की स्ट्रीट लाइट की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और 42 टेंडरों की प्रक्रिया पर उठे सवालों का जवाब कौन देगा। शतरंज की इस बिसात पर चालें चाहे जितनी चली जाएं, लेकिन जानकारों का कहना है कि तुरुप का इक्का फेंक देने भर से सच नहीं छिपता, असली जवाब तो जांच और तथ्यों से ही सामने आएगा।

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