डीएम न्यायालय के आदेश को नहीं नही मानते मिश्रित तहसील में तैनात राजस्व अधिकारी 

डीएम न्यायालय के आदेश को नहीं नही मानते मिश्रित तहसील में तैनात राजस्व अधिकारी

पिपरी गांव में गाटा संख्या 22 की 0.178 हेक्टेयर भूमि को लेकर आमने-सामने आए पक्षकार, शिकायतकर्ता ने एसडीएम से डीएम के आदेश का अनुपालन कराने की उठाई मांग ।

मिश्रित, सीतापुर। तहसील मिश्रित क्षेत्र के ग्राम पिपरी में आबादी की सुरक्षित भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव निवासी पुतानी पुत्र मटरू ने उपजिलाधिकारी मिश्रित को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है । कि गांव में स्थित गाटा संख्या 22, रकबा 0.178 हेक्टेयर आबादी की भूमि काफी समय से सुरक्षित चली आ रही है। शिकायतकर्ता के मुताबिक उक्त भूमि पर उसके सहित कई ग्रामीणों के मकान भी बने हुए हैं । पुतानी का आरोप है । कि उक्त भूमि को लेकर 6 मार्च 2024 को जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा अंतिम आदेश पारित किया जा चुका है।आदेश में संबंधित कार्यवाही समाप्त करते हुए उपजिलाधिकारी मिश्रित को राजस्व अभिलेखों में दर्ज त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही आदेश की प्रति अनुपालनार्थ उपजिलाधिकारी को भेजी गई थी । शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिलाधिकारी के स्पष्ट आदेश के बावजूद तहसील स्तर पर उसका अपेक्षित अनुपालन नहीं किया गया। इसी को लेकर उसने अब एसडीएम मिश्रित से मांमले में हस्तक्षेप करते हुए जिलाधिकारी के आदेश का अनुपालन कराने तथा राजस्व अभिलेख दुरुस्त कराने की मांग की है।

क्या है जिलाधिकारी का आदेश ?
दिनांक 6 मार्च 2024 को न्यायालय जिलाधिकारी ने वाद संख्या डी 2017 10 64 000 1195, राकेश बनाम चौड़े आदि में पारित आदेश के अनुसार वादी राकेश कुमार की ओर से प्रस्तुत पट्टा निरस्तीकरण वाद की गतिमान कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।
आदेश में उपजिलाधिकारी मिश्रित को निर्देशित किया गया था कि निर्णय के आलोक में राजस्व अभिलेखों में हुई त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को दुरुस्त कराकर आदेश की प्रति एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में उपलब्ध कराई जाय। आदेश की प्रति अनुपालनार्थ उपजिलाधिकारी को तथा मूल आवंटन वाद पत्रावली सहित तहसीलदार को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजने का भी उल्लेख आदेश में किया गया था। इस आदेश के बावजूद जमीन की बिक्री और दाखिल-खारिज का आरोप
विवाद का नया पेंच तब सामने आया, जब शिकायतकर्ता के अनुसार इसी गाटा संख्या 22 की भूमि के आधे हिस्से, रकबा 0.089 हेक्टेयर, को सुदर्शन उर्फ शिवदर्शन पुत्र मन्तू उर्फ मन्तूलाल निवासी फौलादगंज, परगना औरंगाबाद द्वारा बिक्री कर दिया गया।शिकायतकर्ता के मुताबिक उक्त भूमि का पंजीकृत बैनामा संख्या 4822 दिनांक 18 जून 2026 को तेजीपुरवा निवासी गंगाराम पुत्र रामलाल के पक्ष में 20 हजार रुपये के प्रतिफल पर कराया गया। इसके बाद नायब तहसीलदार मिश्रित न्यायालय में पीठासीन अधिकारी अजय कुमार द्वारा 18 जून 2026 को क्रेता के पक्ष में दाखिल-खारिज का आदेश पारित किए जाने और उसे संक्रमणीय भूमिधर के रूप में सहखातेदार दर्ज किए जाने की कार्यवाही की गई।
यही कार्यवाही अब विवाद का मुख्य कारण बनी हुई है। एक ओर शिकायतकर्ता जिलाधिकारी के पुराने आदेश का हवाला देकर भूमि को आबादी के लिए सुरक्षित बता रहा है । वहीं दूसरी ओर उसी भूमि के हिस्से का बैनामा और उसके आधार पर दाखिल-खारिज किए जाने का मांमला सामने आ रहा है।
अब सवाल—डीएम के आदेश का अनुपालन हुआ या नहीं?
पूरे मांमले में सबसे बड़ा सवाल यही है । कि यदि जिलाधिकारी न्यायालय ने राजस्व अभिलेखों की त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे । तो उसके बाद उसी गाटा संख्या की भूमि का बैनामा और दाखिल-खारिज किस आधार पर हुआ ।
फिलहाल शिकायतकर्ता ने एसडीएम मिश्रित से पूरे प्रकरण की जांच कराकर जिलाधिकारी के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि तहसील प्रशासन इस विवादित भूमि और राजस्व अभिलेखों की स्थिति को लेकर क्या कार्यवाही करता है।

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