शुल्क विवरण नहीं देने वाले विद्यालयों को अंतिम नोटिस, एक लाख रुपये तक जुर्माने की चेतावनी

शुल्क विवरण नहीं देने वाले विद्यालयों को अंतिम नोटिस, एक लाख रुपये तक जुर्माने की चेतावनी

प्रतापगढ़। जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा ने बताया है कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं संशोधन अधिनियम, 2020 के तहत निर्धारित शुल्क व्यवस्था का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए शुल्क संबंधी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने वाले विद्यालयों को अंतिम अवसर दिया गया है। ऐसे विद्यालयों को एक सप्ताह के भीतर मांगी गई सूचना, अभिलेख, स्पष्टीकरण एवं शपथ-पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में उपलब्ध कराने होंगे। उन्होने बताया है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 23 मई 2026 को हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में जनपद के सभी संबंधित विद्यालयों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे। विद्यालयों से शैक्षिक सत्र 2024-25 एवं 2025-26 की शुल्क संरचना, शुल्क वृद्धि का आधार, वार्षिक शुल्क वृद्धि का प्रतिशत, शुल्क संबंधी अभिलेख तथा विद्यालय की वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर प्रदर्शित शुल्क विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया था। कुछ विद्यालयों ने जानकारी उपलब्ध करा दी है, जबकि सभी विद्यालयों की सूचना अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

अंतिम अवसर के तहत विद्यालयों को एक सप्ताह के भीतर दोनों शैक्षिक सत्रों की वर्षवार एवं मदवार शुल्क संरचना तथा शुल्क वृद्धि का तुलनात्मक विवरण देना होगा। यदि किसी वर्ष शुल्क बढ़ाया गया है तो उसके औचित्य एवं आधार की जानकारी भी देनी होगी।
इसके अलावा विद्यालय में यूनिफार्म, जूते, मोजे एवं पुस्तकें किस माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं और क्या किसी अभिभावक अथवा छात्र को किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, इसका स्पष्ट विवरण देना होगा। विद्यालय में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्य पुस्तकें संचालित हैं अथवा किसी अन्य प्रकाशन की पुस्तकें लगाई जा रही हैं, इसकी भी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। विद्यालय प्रबंधन को शपथ-पत्र देकर यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश शुरू होने से 60 दिन पूर्व शुल्क का विवरण विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करने के साथ सूचना पट्ट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। किसी छात्र से कैपिटेशन शुल्क नहीं लिया जाएगा तथा प्रत्येक शुल्क या प्रभार की रसीद दी जाएगी।
विद्यालय किसी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे अथवा यूनिफार्म किसी विशिष्ट दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। साथ ही लगातार पांच शैक्षणिक वर्षों के भीतर विद्यालय की पोशाक में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। आवश्यकता होने पर परिवर्तन के लिए जनपदीय शुल्क नियामक समिति की पूर्व अनुमति और समुचित औचित्य आवश्यक होगा। अधिनियम की धारा-10 में शुल्क संबंधी नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है। पहली बार अधिसूचित शुल्क से अधिक वसूली पाए जाने पर अतिरिक्त राशि वापस कराने के साथ एक लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है। दूसरी बार उल्लंघन पर अतिरिक्त वसूली की वापसी के साथ पांच लाख रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया जा सकता है। तीसरी बार उल्लंघन की स्थिति में विकास निधि की अनुमति वापस लेने के साथ संबंधित परिषद की मान्यता अथवा संबद्धता वापस लिए जाने की संस्तुति किए जाने का प्रावधान है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ओमकार राणा ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित एक सप्ताह की अवधि में मांगी गई सूचना, अभिलेख, स्पष्टीकरण, साक्ष्य एवं शपथ-पत्र उपलब्ध नहीं कराने अथवा प्रस्तुत उत्तर/आख्या असंतोषजनक पाए जाने पर संबंधित विद्यालय के विरुद्ध अधिनियम की धारा-10 के तहत एक लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाते हुए विधिक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रशासन की होगी। उन्होंने सभी संबंधित विद्यालयों को इसे अंतिम अवसर मानते हुए निर्धारित समयावधि में आवश्यक अभिलेख एवं सूचनाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

नमस्कार,नैमिष टुडे न्यूज़पेपर में आपका स्वागत है,यहाँ आपको हमेसा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9415969423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें