
शोपीस बने शराब ठेकों के सीसीटीवी कैमरे, क्या प्रशासन को नहीं परवाह?
महमूदाबाद-सीतापुर।
नगर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार द्वारा सभी देशी शराब ठेकों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। सरकार की मंशा थी कि इन कैमरों के जरिए दुकानों पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। लेकिन, स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते आज यह कैमरे सिर्फ ‘शोपीस’ बनकर रह गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब से ये कैमरे लगाए गए हैं, तब से आज तक किसी भी प्रशासनिक या आबकारी अधिकारी ने इनकी फुटेज को चेक करने की जहमत नहीं उठाई। कैमरों की रिकॉर्डिंग चालू है या नहीं, या फिर इनमें क्या रिकॉर्ड हो रहा है, इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। निगरानी के अभाव में लाखों रुपये का यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहा है।
इस लापरवाही का सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि क्षेत्र के कुछ शराब ठेकों पर 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिग बच्चे भी बेखौफ होकर शराब खरीदते देखे जा चुके हैं। कानूनन नाबालिगों को शराब बेचना एक गंभीर अपराध है। यदि प्रशासन इन ठेकों की सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्षता से जांच करे, तो इस बात की सौ फीसदी पुष्टि हो सकती है और दोषी दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
जागरूक नागरिकों का मानना है कि मामला सिर्फ नाबालिगों को शराब परोसने तक ही सीमित नहीं है। यदि आबकारी और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से इन सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की नियमित चेकिंग शुरू कर दे, तो ठेकों के आसपास होने वाली अन्य अनैतिक और संदिग्ध गतिविधियों का भी पर्दाफाश हो सकता है। देर रात तक ठेकों के बाहर लगने वाला जमघट, ओवररेटिंग (तय दाम से अधिक वसूली) और मिलावटी शराब की बिक्री जैसे मामलों पर भी आसानी से लगाम लगाई जा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार ने जिस उद्देश्य से कैमरे लगवाए थे, क्या अधिकारी उसे पूरा करना ही नहीं चाहते? क्या किसी बड़ी घटना या हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी?
स्थानीय जनता ने जिला प्रशासन और आबकारी कमिश्नर से मांग की है कि महमूदाबाद के सभी शराब ठेकों के कैमरों का औचक निरीक्षण किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों के लाइसेंस तुरंत निरस्त किए जाएं।