
विधानसभा में गरजा खेरागढ़: विधायक भगवान सिंह कुशवाह ने सिंचाई-बिजली पर सरकार को दिलाई जमीनी हकीकत की याद
विष्णु सिकरवार
आगरा। प्रदेश की उत्तर प्रदेश विधानसभा में खेरागढ़ की गूंज उस समय सुनाई दी जब विधायक भगवान सिंह कुशवाह ने दमदार और शायराना अंदाज में क्षेत्र की समस्याओं को पूरे जोर के साथ उठाया। काबिले तारीफ है अंदाज एक-एक काम का, गा रहा है गीत यूपी मुख्यमंत्री के नाम का… से शुरू हुए उनके भाषण में जहां सरकार की योजनाओं की सराहना थी, वहीं जमीनी सच्चाइयों को भी मजबूती से रखा गया।
विधायक ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण बजट में 30 प्रतिशत वृद्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पहले खेरागढ़ में नहरों का पानी अंतिम टेल तक नहीं पहुंच पाता था और किसान मजबूर होकर निजी साधनों पर निर्भर रहते थे। अब स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन इसे और मजबूत करने की जरूरत है ताकि हर खेत तक पानी सुनिश्चित हो सके।
बिजली के मुद्दे पर उन्होंने जगनेर क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। अरावली पर्वतमाला से घिरे इस इलाके में भूजल स्तर अत्यधिक नीचे होने के कारण सिंचाई पूरी तरह बिजली पर निर्भर है। ऐसे में उन्होंने मौजूदा 10 घंटे की आपूर्ति को बढ़ाकर कम से कम 14 घंटे करने की जोरदार मांग रखी।
सदन में उन्होंने जनकल्याण की भावना को रेखांकित करते हुए कहा, “वृक्ष कबहुं न फल भखे, नदी न पिएं नीर…”, अर्थात सरकार की योजनाएं भी उसी भावना से संचालित हों, जिससे अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचे।
विधायक ने जगनेर क्षेत्र में बने कच्चे बांधों की जर्जर स्थिति को गंभीर खतरा बताते हुए चेताया कि पानी के दबाव में इनके टूटने से कभी भी बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने तत्काल इन्हें पक्का कराने की मांग करते हुए कहा कि यह केवल विकास नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का भी विषय है।
अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने क्षेत्र की अन्य आधारभूत समस्याओं को भी मजबूती से उठाया और स्पष्ट किया कि खेरागढ़ के विकास के लिए ठोस और त्वरित निर्णय अब समय की मांग है। उनका यह भाषण न केवल सराहना का केंद्र बना, बल्कि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को सदन के पटल पर प्रभावी ढंग से स्थापित करने में सफल रहा।