सीएम योगी लगाने जा रहे हैं छुट्टा पशुओं पर लगाम

यूपी में छुट्टा जानवरों की समस्या से लोगों को जल्द निजात मिल सकती है. 100 दिन का एक्शन प्लान तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंगलवार को बैठक में इसके निर्देश दिए गए हैं.इस समस्या के लिए पहले 100 दिन में ही कार्ययोजना तैयार काम शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही सभी विभागों को प्राथमिकता तय करते हुए 100 दिन, 6 महीने और 1 साल की योजना बनानी होगी. वहीं 12 अप्रैल से विभागों का प्रेजेंटेशन शुरू होगा, जिसमें खुद मंत्रियों को कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी.

 

योजनाओं के क्रियान्वयन तक योगी की होगी नजर

 

दोबारा यूपी के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ के लिए शुरुआती 100 दिन अहम हैं. जनता की नजर योगी सरकार पर है. ऐसे में 100 दिन के एक्शन प्लान का खाका खींचने के लिए मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों के साथ बैठक की. इसमें निर्देश दिए गए कि 100 दिन में ही हर विभाग को कुछ बातों कर अमल करना होगा. इसके लिए न सिर्फ प्राथमिकताएं तय करनी होंगी बल्कि वायदे को हकीकत में बदलने के लिए रास्ता बनाना होगा यानी योजना बनाने से लेकर क्रियान्वयन तक अब सीएम योगी की कड़ी नजर रहेगी.

 

सियासी मुद्दा बना था छुट्टा जानवर की समस्या

 

बैठक में छुट्टा जानवरों की समस्या की बात भी हुई. यूपी के विधानसभा चुनाव में यह अहम मुद्दा बनकर उभरा था. इस बात को लेकर बीजेपी न सिर्फ सियासी विरोधियों के निशाने पर थी बल्कि लोगों ने भी इसको लेकर अपनी समस्या जाहिर की थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी छुट्टा जानवरों की समस्या पर बात करते हुए लोगों को आश्वासन देना पड़ा था. अब बारी पीएम मोदी के इस भरोसे को सही साबित करने की है. सीएम योगी और उनकी टीम के लिए यह एक बड़ी चुनौती है. पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि यह बड़ी चुनौती है लेकिन इसकी शुरुआत हो जाएगी. इसके लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं.’

 

हर हाल में विकासकार्य शुरु करना है प्राथमिकता

 

सरकार की कोशिश है कि कम से कम वायदों को साकार करने की पहल शुरू होनी चाहिए, जिससे 100 दिन के रिपोर्ट कार्ड में सरकार अपनी कुछ बातों को लोगों के सामने रख सके. पंचायती राज विभाग में पहले से चल रही कई योजनाओं पर काम 100 दिन के अंदर और तेज किया जाएगा तो ग्राम विकास विभाग में विकास को हकीकत में बदलने की शुरुआत की जाएगी. सरकार का लक्ष्य है कि भले ही 100 दिन वायदे पूरे करने के लिए नाकाफी हों लेकिन ये काम होते हुए दिखें. बेसिक शिक्षा मंत्री (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह का कहना है कि पूरे दो साल से कोविड की वजह से परिषदीय विद्यालय बंद थे. अब खुले हैं तो यूनिफॉर्म, किताबें देना, बच्चों को स्कूल तक लाना चुनौती है. आबकारी विभाग को अभियान चलाकर जहरीली शराब और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए.

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