नव वर्ष 2024-22 जनवरी 2024 को बजेगा भारत का आध्यात्मिक डंका

 

विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा-प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024

रामोत्सव 22 जनवरी 2024-प्रभु श्रीराम का टेंट विराजमान से विशाल पक्के आध्यात्मिक घर में विराजमान अनमोल ऐतिहासिक यादगार क्षण बनेगा-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर दुनियां का हर देश नए वर्ष 2024 की खुशियों में सारोबार होकर मना रहा हैहर देश में नववर्ष 2024 का जोरदार ढंग से स्वागत किया जा रहा है जहां मदिरा पान से लेकर डिजिटल डांस तक तो वही श्रद्धा सुमन सादगी से लेकर आध्यात्मिक भाव से झूम कर अपने-अपने आध्यात्मिक स्थलों पर नववर्ष 2024 का स्वागत करने में दुनियां मशगूल है, परंतु भारत में सबकी नज़रें नववर्ष के प्राथमिक द्वारा यानें प्रथम माह की 22 जनवरी 2024 पर टिकी हुई है, जो प्रभु श्री राम के सैकड़ो वर्षों से टेंट विराजमान से विशाल पक्के आध्यात्मिक घर में विराजमान की अनमोल यादगारक्षण साक्षी बनेगा,जिसपर पूरी दुनियां की नज़रें लगी हुई है, जिसकी तैयारियों में संतरी से लेकर मंत्री तक लगे हुए हैं, जिसे यादगार पल बनाने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक हरस्तर की तैयारी का जायजा लेकर हजारों करोड रुपए की व्यवस्था कर कार्य किया जा रहा है जो सारी दुनियां ने दिनांक 30 दिसंबर 2023 को देखा कि माननीय पीएम, सीएम सहित अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तित्वो ने तैयारी का जायजा व अयोध्या धाम जंक्शन को सुगम बनाने प्रयासों की झड़ी लगा दी है। चूंकि रामोत्सव 22 जनवरी 2024 नव वर्ष 2024 को बजेगा भारत में आध्यात्मिक डंका, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024
साथियों बात अगर हम 22 जनवरी 2024 को प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की करें तो, हिंदू धर्म में 22 जनवरी 2024 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा, क्योंकि इस दिन सालों बाद अयोध्या में रामलला अपने भव्य राम मंदिर में विराजित होंगे। श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां अंतिम दौर में है। पूरी दुनियां इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनेगी।अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की रूपरेखा तय हो चुकी है। 15 जनवरी से 22 जनवरी तक कई अनुष्ठान होंगे। हर घर अयोध्या बनाने की तैयारी न्यास के द्वारा 22 जनवरी को राम उत्सव मनाने के लिए विभिन्न बैठकों में महिलाओं से लाल व पीले रंग के पारंपरिक परिधान पहनने, मेंहदी रचाने, घरों में रंगोली सजाने, पूरे दिन भजन कीर्तन करने सहित शाम को दीपोत्सव का कार्यक्रम आयोजन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
साथियों बात अगर हम पूरे विश्व में मूल भारतीयों द्वारा 22 जनवरी 2024 को रामोत्सव मनाने की करें तो, वैश्विक स्तरपर दुनियां के कोने-कोने में बसे मूल भारतीयों की अपने वतन भारत के प्रति आध्यात्मिक आस्था उनके रग रग में समाई है, यही कारण है कि हजारों किलोमीटर सात समंदर पार अपने वतन से दूर रहने के बावजूद वहां अपने देश में विभिन्न भगवानों का मंदिर बनाकर नित्य नियम पूजा पाठ करते हैं, जिसका सटीक उदाहरण हम ब्रिटेन के पीएम द्वारा हिंदू त्योहार मनाने मंदिर जाने और जी-20 के समय भारत आने पर अक्षरधाम मंदिर का दौरा करना इस आस्था की पुष्टि करता है। भारत में दिनांक 22 जनवरी 2024 को प्रस्तावित प्रभु श्री राम मंदिर की संभावित प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन की घोषणा के उपरांत अमेरिका सहित पूरी दुनियां में मूल भारतीयों द्वारा वहां स्थित मंदिरों में तैयारियां शुरू की गई है। अमेरिका के शिकागो के एक समुदाय नेता ने प्रेस में बताया कि, यह सपने सच होने जैसा है। वीएचपी ऑफ अमेरिका इन समारोहों में शामिल होने, हजार से अधिक मंदिरों और व्यक्तियों की भागीदारी की सुविधा के लिए वेबसाइट भी लॉन्च कर दी है। यह जानकारी अमेरिका के डॉक्टर साहब ने दी जो 22 जनवरी 2024 के मंदिर उद्घाटन समारोह में अमेरिकी अतिथियों में से एक है।चूंकि मंदिर उद्घाटन की तिथि घोषित की गई है, श्रद्धालियों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है और वीवीआईपी आमंत्रण में माननीय प्रधानमंत्री राष्ट्रपति से लेकर तमाम नेता शामिल होंगे, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, भारत अमेरिका सहित पूरी दुनियां में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन धार्मिक रैलीयां दीप वंदन सहित अनेक कार्यक्रम कर देश खुशी मनाएगा।
साथियों बात अगर हम माननीय पीएम द्वारा दिनांक 30 दिसंबर 2023 को अयोध्या में प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा उत्सव संबंधी अपने संबोधन और बयान की करें तो, ये ऐतिहासिक क्षण, बहुत भाग्य से हम सभी के जीवन में आया है। हमें देश के लिए नव संकल्प लेना है, खुद को नई ऊर्जा से भरना है। इसके लिए 22 जनवरी को आप सभी अपने घरों में, मैं पूरे देश के 140 करोड़ देश्वासियों को अयोध्या की इस पवित्र भूमि से प्रार्थना कर रहा हूं, अयोध्या की प्रभु राम की नगरी से प्रार्थना कर रहा हूं, मैं 140 करोड़ देश्वासियों को हाथ जोड़कर के प्रार्थना कर रहा हूं, कि आप 22 जनवरी को जब अयोध्या में प्रभु राम विराजमान हों, अपने घरों में भी श्रीराम ज्योति जलाएं, दीपावली मनाएं। 22 जनवरी की शाम पूरे हिन्दुस्तान में जगमग-जगमग होनी चाहिए। लेकिन साथ ही, मेरी सभी देशवासियों से एक करबद्ध प्रार्थना और भी है। हर किसी की इच्छा है कि 22 जनवरी को होने वाले आयोजन का साक्षी बनने के लिए वो स्वंय अयोध्या आएं लेकिन आप भी जानते हैं कि हर किसी का आना संभव नहीं है। अयोध्या में सबका पहुंचना बहुत मुश्किल है और इसलिए सभी राम भक्तों को, देशभर के राम भक्तों को, उत्तर प्रदेश के विशेषकर के राम भक्तों को मेरा हाथ जोड़कर के प्रणाम के साथ प्रार्थना है। मेरा आग्रह है कि 22 जनवरी को एक बार विधिपूर्वक कार्यक्रम हो जाने के बाद, 23 तारीख के बाद, अपनी सुविधा के अनुसार वो अयोध्या आएं, अयोध्या आने का मन 22 तारीख को न बनाएं। प्रभु राम जी को तकलीफ हो ऐसा हम भक्त कभी कर नहीं सकते हैं। प्रभु राम जी पधार रहे हैं तो हम भी कुछ दिन इंतजार हरें, 550 साल इंतजार किया हैं, कुछ दिन और इंतजार कीजिए। और इसलिए सुरक्षा के लिहाज से, व्यवस्था के लिहाज से, मेरी आप सबसे बार-बार प्रार्थना है कि कृपा कर, क्योंकि अब प्रभु राम के दर्शन अयोध्या का नव्य, भव्य, दिव्य मंदिर आने वाली सदियों तक दर्शन के लिए उपलब्ध है। आप जनवरी में आए, फरवरी में आए, मार्च में आए, एक साल के बाद आए, दो साल के बाद आए, मंदिर है ही। और इसलिए 22 जनवरी को यहां पहुंचने के लिए भीड़-भाड़ करने से आप बचिये ताकि यहां जो व्यवस्था है, मंदिर के जो व्यवस्थापक लोग हैं, मंदिर का जो ट्रस्ट है, हमें इतना पवित्र उन्होंने काम किया है, इतनी मेहनत करके किया है, पिछले 3-4 साल से दिन-रात काम किया है, उनको हमारी तरफ से कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए, और इसलिए मैं बार-बार आग्रह करता हूं कि 22 को यहां पहुंचने का प्रयास न करें। कुछ ही लोगों को निमंत्रण गया है वे लोग आएंगे और 23 के बाद सारे देश्वासियों के लिए आना बड़ा सरल हो जाएगा।प्राचीन काल में अयोध्यानगरी कैसी थी, इसका वर्णन खुद महर्षि वाल्मीकि जी ने विस्तार से किया है।उन्होंने लिखा हैकोसलो नाम मुदितः स्फीतो जनपदो महान्। निविष्ट सरयूतीरे प्रभूत-धन-धान्यवान्। अर्थात्, वाल्मीकि जी बताते हैं कि महान अयोध्यापुरी धन-धान्य से परिपूर्ण थी, समृद्धि के शिखर पर थी, और आनंद से भरी हुई थी। यानी, अयोध्या में विज्ञान और वैराग्य तो था ही, उसका वैभव भी शिखर पर था।अयोध्या नगरी की उसी पुरातन पहचान को हमें आधुनिकता से जोड़कर वापस लाना है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि नव वर्ष 2024-22 जनवरी 2024 को बजेगा भारत का आध्यात्मिक डंका विश्व को नए वर्ष 2024 का नायाब तोहफा-प्रभु श्री राम की प्राणप्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024।रामोत्सव 22 जनवरी 2024-प्रभु श्रीराम का टेंट विराजमान से विशाल पक्के आध्यात्मिक घर में विराजमान अनमोल ऐतिहासिक यादगार क्षण बनेगा।

*-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र*

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