
बेंती के सान बड़ा न्यारा लगे हो… अर्चना यादव का गीत हुआ वायरल
अवधी गायिका अर्चना यादव बेंती के बाबा हौदेश्वरनाथ और राजा भइया पर आधारित गीत को मिल रहा अपार स्नेह, बागेश्वर धाम की कथा के लिए किया आह्वान
कुंडा, प्रतापगढ़। कुंडा क्षेत्र की अवधी गायिका अर्चना यादव बेंती इन दिनों अपने लोकगीतों को लेकर चर्चा में हैं। बाबा हौदेश्वरनाथ और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंडा के विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री कुंवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया पर आधारित उनका गीत सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है। वहीं बागेश्वर धाम सरकार की कथा को लेकर गाया गया उनका नवीनतम गीत भी लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।अर्चना यादव का चर्चित गीत है, बेंती के सान बड़ा न्यारा लगे हो, बाबा हौदेश्वरनाथ बड़ा प्यारा लगे हो, राजा भइया हमरे बेंती के सान बाटेन, नेता महान बाटेन, राजा भइया हमरे कुंडा के शान बाटेन, नेता महान बाटेन, जाने दुनिया। यह गीत गांव से लेकर कस्बों तक सुना जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसे लोग अपनी रील, स्टेटस और आयोजनों में प्रयोग कर रहे हैं। विवाह, मुंडन, पूजा और अन्य सामाजिक आयोजनों में भी यह गीत सुनाई दे रहा है। बेंती के बाजार और चौराहों पर भी इन दिनों यही गीत सुनाई दे रहा है, जिसे सुनकर लोग ठहरकर गीत को पूरा सुन रहे हैं।उनका नवीनतम गीत है, चलो भक्तों कर लो तैयारी, पहले से आएंगे बागेश्वर जी, बेंती नगरिया। इस गीत के माध्यम से उन्होंने 17, 18, 19 और 20 तारीख को राजभवन में आयोजित होने वाली बागेश्वर धाम सरकार की कथा में सम्मिलित होने के लिए श्रद्धालुओं का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह कथा आस्था, संस्कार और सनातन परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सभी को सहभागिता करनी चाहिए।लोकमित्र से विशेष वार्ता में अर्चना यादव ने कहा कि यह सब बाबा हौदेश्वरनाथ की कृपा से संभव हुआ है। विगत एक वर्ष में उनके अनेक गीत प्रसारित हुए हैं। उन्होंने कहा कि राजा भइया जनता के सुख-दुख को समझते हैं और उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करते हैं। जो सत्यता उन्होंने देखी, उसी को गीत के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया है।अर्चना यादव के पति दरोगा यादव क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं। वे कुंडा के कादमपुर के निवासी हैं। क्षेत्र में उनकी भी अपनी पहचान है। अर्चना यादव का कहना है कि पति के सहयोग और परिवार के आशीर्वाद से ही वे इस स्तर तक पहुंची हैं। घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वे लोकगीतों के माध्यम से अपनी माटी और संस्कृति को संरक्षित करने का कार्य कर रही हैं।अर्चना यादव के गीतों में सहजता है। उनकी आवाज में अवधी मिट्टी की सोंधी सुगंध है, जो श्रोताओं को सहज ही आकर्षित करती है। यही कारण है कि उनके गीत बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी की जुबान पर हैं।