काशीपुर डुबकी में 2.17 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

काशीपुर डुबकी में 2.17 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने दिए जांच के निर्देश, मनरेगा समेत कई योजनाओं के कार्यों की होगी पड़ताल

कुंडा/प्रतापगढ़। बिहार विकासखंड की ग्राम पंचायत काशीपुर डुबकी में सरकारी योजनाओं के तहत कराए गए विकास कार्यों में कथित 2.17 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के आधार पर विकास कार्यों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। आदेश के बाद पंचायत में कराए गए कार्यों और सरकारी धन के इस्तेमाल की पड़ताल का रास्ता साफ हो गया है।याचिकाकर्ता सुरेश गुप्ता की ओर से दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, पंचम वित्त और राज्य वित्त आयोग सहित विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों में अनियमितताएं की गई हैं। आरोप है कि कई कार्य अभिलेखों में पूरे दर्शाए गए, जबकि मौके पर अधूरे हैं या कराए ही नहीं गए। फर्जी मस्टररोल के जरिए भुगतान निकालने और सरकारी धन के दुरुपयोग की भी शिकायत की गई है।याचिका में सड़कों, नालियों, चकरोड, तालाबों की खुदाई और सामुदायिक कार्यों में अभिलेखों तथा मौके की स्थिति में अंतर होने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिला प्रशासन और विकास विभाग के अधिकारियों से शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने आठ सितंबर 2026 को आदेश पारित किया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी प्रत्येक शिकायत के संबंध में अलग-अलग विस्तृत अभ्यावेदन संबंधित सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें।न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभ्यावेदन मिलने के बाद प्रत्येक स्वीकृत विकास कार्य की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता और खर्च की गई धनराशि के उपयोग की जांच की जाए। यदि जांच में बिना उचित कारण कार्य अधूरे मिलने या सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। हालांकि, 2.17 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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