
सिलवानी तहसील के नगर साईखेड़ा में अनूठी गणेश विसर्जन यात्रा देखी गई तख्ती पर विराजे बप्पा, महाराष्ट्रीयन पहनावे और अखाड़े के करतबों ने मोहा सबका मन
✍🏼शिवकुमार साहू पत्रकार
साईखेड़ा (सिलवानी)। सिलवानी तहसील के अंतर्गत आने वाले नगर साईखेड़ा में इस वर्ष हुए श्री गणेश विसर्जन के दौरान एक बेहद अनोखी और भव्य झांकी देखने को मिली, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। आम तौर पर बड़े-बड़े वाहनों और भव्य रथों पर निकलने वाली विसर्जन यात्राओं के बीच, यहाँ के स्थानीय दुकानदार मनोज भाई की पान की गुमटी (दुकान) में स्थापित किए गए विघ्नहर्ता की विसर्जन यात्रा आकर्षण का केंद्र बनी रही।
मनोज भाई ने अपनी छोटी सी दुकान में श्री गणेश भगवान की एक सुंदर छोटी प्रतिमा स्थापित की थी। जब विसर्जन का समय आया, तो उनकी पूरी टीम ने इस विसर्जन को यादगार बनाने के लिए एक अनूठी परंपरा और सादगी को चुना।
महाराष्ट्रीयन पहनावा और सिर पर बप्पा
इस विसर्जन यात्रा की सबसे खास बात इसकी पारंपरिक झलक थी। मनोज भाई और उनकी टीम के सभी सदस्य पारंपरिक महाराष्ट्रीयन पहनावे (धोती-कुर्ता और साफा) में नजर आए। उन्होंने बप्पा की छोटी प्रतिमा को किसी वाहन के बजाय एक सुंदर रूप से सजाई गई लकड़ी की तख्ती (पटिए) पर विराजमान किया। इसके बाद टीम के सदस्यों ने बप्पा को अपने सिर पर धारण किया।
क्रमबद्ध नगर भ्रमण और श्रद्धालुओं का श्रद्धा भाव
विसर्जन यात्रा जैसे-जैसे नगर के मार्गों से गुजरी, दृश्य बेहद भावुक और सुंदर होता गया। रास्ते में खड़े श्रद्धालुओं ने बप्पा के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा दिखाते हुए बारी-बारी से उन्हें अपने सिर पर स्थान दिया। अनुशासन ऐसा था कि सभी सदस्य और नगरवासी क्रमबद्ध (लाइन से) एक-दूसरे के सिर पर बप्पा को सौंपते हुए आगे बढ़ रहे थे। पूरा नगर ‘गणपति बाप्पा मोरया’ के जयकारों से गूंज उठा।
आगे अखाड़ा और पीछे भक्ति का सैलाब
यात्रा में केवल पारंपरिक पहनावा ही आकर्षण नहीं था, बल्कि बप्पा की अगवानी में आगे-आगे पारंपरिक अखाड़ा चल रहा था। अखाड़े के युवाओं ने एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिसने विसर्जन यात्रा के उत्साह को दोगुना कर दिया। अखाड़े के हैरतअंगेज प्रदर्शन और पीछे सिर पर बप्पा को उठाए चल रहे भक्तों के इस अद्भुत संगम ने एक बेहद विहंगम और सुंदर नजारा पेश किया।
नगर भ्रमण के पश्चात, पूरी मर्यादा, हर्षोल्लास और विधि-विधान के साथ लाडले बप्पा को विदाई दी गई और उनका विसर्जन किया गया। सादगी, संस्कृति और भक्ति रस से सराबोर यह अनोखी झांकी आसपास के पूरे क्षेत्र में कौतूहल और तारीफ का विषय बनी हुई है।