
ऑनलाइन हाजिरी में मजदूरों की लंबी फेहरिस्त, मौके पर कितने मौजूद? फखरपुर में VB राम जी योजना की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल, पूरे ब्लॉक की जांच की मांग
ब्यूरो चीफ भोलू तिवारी
बहराइच। जनपद बहराइच के विकासखंड फखरपुर में VB राम जी योजना के तहत दर्ज ऑनलाइन हाजिरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन दर्ज मजदूरों की संख्या और मौके पर उनकी वास्तविक मौजूदगी का सत्यापन किए जाने की जरूरत है। सामने आए आंकड़ों के अनुसार, कई ग्राम पंचायतों में मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति काफी अधिक दर्ज की गई है। अब सवाल यह है कि क्या इन सभी मजदूरों की मौके पर मौजूदगी सुनिश्चित की जा रही है और क्या जिम्मेदार अधिकारी कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर रहे हैं?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत टटेहरा में 61, सौगहना में 93, पट्टी कमालपुर में 103, बहुरा में 112, बौंडी में 214, बसौना में 100, कंडौसा में 96 और अमवा तेतारपुर में 152 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों के आधार पर वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है। आरोप है कि पूरे विकासखंड में कई स्थानों पर ऑनलाइन हाजिरी और मौके पर मौजूद मजदूरों की संख्या के बीच अंतर हो सकता है। ऐसे में प्रशासन को प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थलीय सत्यापन कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
आखिर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज होने के बाद मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति की निगरानी कौन कर रहा है? यदि रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद दिखाए जा रहे हैं, तो क्या संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर इसकी पुष्टि करते हैं? क्या ऑनलाइन मस्टर रोल, कार्यस्थल की तस्वीरों और वास्तविक मजदूरों की संख्या का मिलान किया जा रहा है? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब विकासखंड स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक को देना चाहिए।
सरकार ग्रामीण विकास और गरीब मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं के माध्यम से धन आवंटित करती है। लेकिन यदि कहीं ऑनलाइन उपस्थिति और वास्तविक स्थिति में अंतर मिलता है, तो यह सरकारी धन के इस्तेमाल, निगरानी व्यवस्था और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है। इसलिए फखरपुर की ग्राम पंचायत टटेहरा, सौगहना, पट्टी कमालपुर, बहुरा, बौंडी, बसौना, कंडौसा और अमवा तेतारपुर में दर्ज हाजिरी की जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
इस मामले में ग्राम प्रधानों के साथ-साथ संबंधित सचिवों, खंड विकास अधिकारी और जिला स्तर पर मनरेगा की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। यदि किसी ग्राम पंचायत में ऑनलाइन दर्ज उपस्थिति और मौके पर मौजूद मजदूरों की संख्या में अंतर पाया जाता है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ, किस स्तर पर लापरवाही हुई और भुगतान किस आधार पर किया गया। जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या फखरपुर की निगरानी व्यवस्था केवल ऑनलाइन आंकड़ों के भरोसे चल रही है? यदि पूरे ब्लॉक में ऐसी स्थिति होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिला प्रशासन को सभी ग्राम पंचायतों की जांच करानी चाहिए। केवल कुछ कार्यस्थलों का निरीक्षण करके पूरे विकासखंड को सही मान लेना पर्याप्त नहीं होगा। ऑनलाइन हाजिरी, मस्टर रोल, मजदूरों के बयान, कार्य की वास्तविक प्रगति और भुगतान विवरण का आपस में मिलान जरूरी है।
इस कथित अनियमितता का सबसे अधिक नुकसान उन गरीब मजदूरों को हो सकता है, जिनके लिए रोजगार योजनाएं आजीविका का सहारा हैं। यदि किसी मजदूर के नाम पर गलत उपस्थिति दर्ज की जाती है या वास्तविक कार्य और भुगतान में गड़बड़ी होती है, तो उसके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए इस मामले को हल्के में लेना उचित नहीं होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार से सवाल है कि गांवों में संचालित रोजगार योजनाओं की जमीनी निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है? सरकारी योजनाओं की सफलता का प्रमाण केवल ऑनलाइन आंकड़े नहीं, बल्कि वास्तविक काम, पारदर्शी भुगतान और मजदूरों को मिलने वाला रोजगार है। यदि शिकायतों के बावजूद जांच नहीं होती, तो जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जिलाधिकारी बहराइच और जिला स्तर पर मनरेगा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। फखरपुर की सभी ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन हाजिरी और वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन कराया जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि कितने मजदूर वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद थे, कितना काम हुआ और भुगतान किस आधार पर किया गया।
सवाल सीधा है—ऑनलाइन हाजिरी में दर्ज मजदूर यदि मौके पर मौजूद नहीं हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? फखरपुर में उठ रहे इन सवालों का जवाब आरोपों को नजरअंदाज करने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने से ही मिलेगा। गरीब मजदूरों के हक और सरकारी धन की सुरक्षा के लिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है।