
बाबागंज ब्लॉक में मनरेगा भुगतान को लेकर उठे सवाल
सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं के मजदूरी करने और सरकारी भुगतान लेने की चर्चाएं, जांच की मांग
कुंडा/प्रतापगढ़। बाबागंज ब्लॉक क्षेत्र में मनरेगा समेत विकास कार्यों में मजदूरी भुगतान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ नेता भी विकास विभाग के कार्यों में मजदूर के रूप में दर्ज हैं और उनके खातों में सरकारी धन का भुगतान किया जा रहा है।
चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधान और पंचायत सचिवों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कथित तौर पर मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मामला गंभीर होने के कारण संबंधित ग्राम पंचायतों के मस्टर रोल, जॉब कार्ड, आधार/बैंक भुगतान विवरण, कार्यस्थल की उपस्थिति और एमआईएस रिकॉर्ड की जांच कराए जाने की मांग उठ रही है। यदि रिकॉर्ड में ऐसे लोगों के नाम मजदूर के रूप में दर्ज पाए जाते हैं जो वास्तव में कार्यस्थल पर मजदूरी नहीं कर रहे थे, तो सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आ सकता है।
*जांच से साफ होगी हकीकत*
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मौके पर भौतिक सत्यापन के साथ-साथ ऑनलाइन रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कराए जाने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप महज चर्चाएं हैं या वास्तव में सरकारी धन के भुगतान में अनियमितता हुई है।
अब सवाल यह है कि बाबागंज ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में मजदूरी भुगतान के रिकॉर्ड की जांच कौन करेगा और यदि नियमों के विपरीत भुगतान मिला तो जिम्मेदारी किसकी तय होग??