
पारंपरिक मक्के से मीठे मक्के (स्वीट कॉर्न) की ओर बढ़ें अवध के किसान
आकांक्षा, शोध छात्रा (सस्य विज्ञान विभाग),
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर, उत्तर प्रदेश।
अवध क्षेत्र के किसानों के लिए पारंपरिक मक्का की तुलना में स्वीट कॉर्न अधिक लाभकारी फसल है। यह 70-90 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि सामान्य मक्का को 100-120 दिन लगते हैं। इसकी बुवाई खरीफ में जून-जुलाई तथा जायद में फरवरी-मार्च के दौरान उपयुक्त रहती है। कम वर्षा में भी यह अच्छी उपज देती है तथा कम पानी और उर्वरक की आवश्यकता होती है। प्रति हेक्टेयर लगभग 120 किग्रा नाइट्रोजन, 60 किग्रा फास्फोरस और 40 किग्रा पोटाश पर्याप्त हैं। बुवाई के 15 दिन बाद फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक जैसे कीटों की नियमित निगरानी करें। प्रकोप होने पर सुबह या शाम पत्तों एवं पौधों में कीटनाशक का छिड़काव करें तथा आवश्यकता अनुसार 10-12 दिन बाद दोहराएँ।
जुड़ाई से पहले अनुशंसित प्रतीक्षा अवधि अवश्य रखें। उत्तर प्रदेश में सामान्य मक्का का भाव ₹1,850-2,150 प्रति क्विंटल रहता है, जबकि स्वीट कॉर्न हरे भुट्टों का भाव ₹2,800-3,500 तथा मांग के समय ₹5,500-6,000 प्रति क्विंटल तक मिल सकता है। दोनों निकालकर बेचने पर ₹70-90 प्रति किलो मूल्य मिलता है। बचा हरा भाग पशु चारे के रूप में उपयोगी है। फ्रोजन स्वीट कॉर्न को कोल्ड स्टोरेज में माइनस तापमान पर रखा जा सकता है और ऑफ-सीजन में मॉल, पिज़्ज़ा कंपनियों व होटल चेन को ₹100 से ₹150 प्रति किलो की प्रीमियम दर पर सप्लाई किया जा सकता है।
अवध क्षेत्र के लिए कुछ अनुकूल किस्में हैं: माधुरी, प्रिया स्वीट कॉर्न, विन-ऑरेंज, स्वीट-75 और गोल्डन स्वीट कॉर्न। अच्छी कमाई के लिए किसान नजदीकी शहरों के थोक विक्रेताओं से सीधा संपर्क कर सकते हैं, जहाँ ताज़ी स्वीट कॉर्न की मांग तेजी से बढ़ रही है। साथ ही किसान एफपीओ और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़कर स्वीट कॉर्न को अवध के किसानों के लिए एक टिकाऊ और समृद्धिदायक विकल्प बना सकते हैं।
यह जानकारी चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर की शोध छात्रा आकांक्षा द्वारा विशेष रूप से अवध क्षेत्र के किसानों के लिए तैयार की गई है, ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से इस लाभकारी फसल को अपना सकें।