
ब्राह्मण और दलित समाज को गाली देने वाले सपा नेता दिलीप यादव पर केस
नवाबगंज में एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज, दलित ब्लॉक प्रमुख को गाली देने का ऑडियो वायरल से हड़कंप, चुनाव से पहले ही सपा का असली चेहरा बेनकाब, अखिलेश के पीडीए पर सवाल
कुंडा प्रतापगढ़। चुनाव से पहले ही समाजवादी पार्टी का असली चेहरा सामने आ गया है। जो पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए का नारा देकर सत्ता में आने का सपना देख रही है, उसी पार्टी के एक कथित नेता का ऐसा घृणित कारनामा सामने आया है जिसने पूरे पीडीए की पोल खोल दी है। ताजा मामला नवाबगंज थाना क्षेत्र के संग्रामपुर गांव का है, जहां सपा से जुड़ा बताने वाला एक कथित नेता सरेआम ब्राह्मण, पासी समाज के साथ-साथ पूरे दलित समाज और दलित ब्लॉक प्रमुख को भी मां बहन की भद्दी और जातिसूचक गालियां देता सुनाई दे रहा है। पुलिस अभिलेखों के अनुसार इस घृणित कृत्य का आरोपी ग्राम संग्रामपुर थाना नवाबगंज निवासी दिलीप यादव उर्फ भोले पुत्र जमुना यादव है। क्षेत्र में यह व्यक्ति स्वयं को समाजवादी पार्टी का नेता बताता है। इसी के विरुद्ध थाना नवाबगंज पर मुकदमा अपराध संख्या 0172/2026 के तहत गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। इस ऑडियो के प्रसारित होते ही पूरे कुंडा-नवाबगंज क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।जानकारी के अनुसार 10 अक्टूबर को दिन में लगभग ढाई बजे वादी रमेश सरोज पुत्र सूर्यबली अपने समर्थकों के साथ आलापुर बाजार स्थित संजय त्रिपाठी के कार्यालय पर बैठे थे। वहां कई लोग पहले से मौजूद थे। उसी दौरान सामाजिक मीडिया पर प्रसारित एक ऑडियो बजा, जिसमें आरोपी दिलीप यादव उर्फ भोले द्वारा अत्यंत अश्लील और जातिसूचक गालियों का प्रयोग किया जा रहा था। ऑडियो में दलित ब्लॉक प्रमुख को भी गाली देने और पूरे दलित समाज को अपमानित करने की बात साफ सुनाई दे रही है। ऑडियो सुनते ही वहां मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया।तहरीर में बताया गया है कि आरोपी ने ग्राम संग्रामपुर के निवर्तमान प्रधान के पति ओम प्रकाश उर्फ जोखू को फोन पर गाली गलौज की थी, वही ऑडियो बाद में प्रसारित हो गया। आरोप है कि जानबूझकर समाज में वैमनस्यता और जातिगत विद्वेष फैलाने की नीयत से यह कृत्य किया गया है। इधर इस घटना ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कार्यशैली और उनकी सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्षेत्र के लोगों का साफ कहना है कि यह वायरल ऑडियो सिर्फ सपा नेता दिलीप यादव उर्फ भोले की जुबान नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मानसिकता और पार्टी की असली सोच को दर्शाता है।लोगों में चर्चा है कि यह कोई अकेले दिलीप यादव उर्फ भोले की भाषा नहीं है, बल्कि यह समाजवादी पार्टी की असली सोच को दर्शाती है। जब चुनाव सिर पर है और पार्टी के नेता ही इस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्टी के भीतर दलित और सवर्ण समाज के प्रति कितना सम्मान है। लोगों का कहना है कि चुनाव से पहले ही जब यह हाल है तो चुनाव बाद क्या हाल होगा, यह सोचकर ही लोग सिहर जा रहे हैं। वहीं इस मामले को लेकर पटेल समाज में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। पटेल समाज के लोगों का कहना है कि समाजवादी पार्टी में सिर्फ एक विशेष वर्ग की ही सुनी जा रही है। पीडीए के नाम पर बात तो सभी की की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पटेल, ब्राह्मण, पासी सहित अन्य जातियों को सिर्फ वोट बैंक समझा जा रहा है। जब उनके ही नेता खुलेआम गालियां दे रहे हैं तो बाकी समाज का क्या सम्मान रह गया। यही कारण है कि इस ऑडियो के बाद पटेल समाज भी खुद को अपमानित महसूस कर रहा है।लोगों का कहना है कि आज जब पूरे देश में संत महात्मा सनातन की एकजुटता के लिए सभी जातियों को जोड़ने में लगे हैं, ब्राह्मण, पटेल, पासी, यादव, दलित सबको एक करने का आह्वान कर रहे हैं, तब समाजवादी पार्टी समाज को बांटने में लगी है। एक तरफ संत समाज राष्ट्रहित में एकता की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सपा के कथित नेता समाज में जहर घोल रहे हैं। इससे साबित होता है कि सपा का पीडीए केवल कागजी नारा है, असलियत में जमीन पर कुछ और ही चल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना सपा के दोहरे चरित्र को उजागर करती है। मंच से पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक की बात और मंच के पीछे उन्हीं वर्गों को गाली, इससे बड़ा पाखंड नहीं हो सकता। चुनाव से पहले ही सपा का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है। जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।पीड़ित पक्ष की तहरीर पर नवाबगंज पुलिस ने आरोपी दिलीप यादव उर्फ भोले के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 तथा एससी एसटी अधिनियम की धारा 3(1)ट और 3(1)ध के तहत अभियोग पंजीकृत कर विवेचना सीओ कुंडा को सौंपी है। पुलिस ऑडियो की सत्यता की जांच कर रही है। बहरहाल, इस ऑडियो के सामने आने के बाद ब्राह्मण, पासी, पटेल और दलित समाज सहित दलित ब्लॉक प्रमुख के समर्थकों में भी भारी आक्रोश है और लोग आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।