
फर्जी टीसी पर सरकारी मुहर की साजिश!
बिना मान्यता प्राप्त स्कूल की जालसाजी का बड़ा खेल बेनकाब, बीईओ कार्यालय तक पहुंचाए गए कूटरचित रजिस्टर
प्रतापगढ़ शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि क्षेत्र में संचालित एक बिना मान्यता प्राप्त विद्यालय की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) को वैध साबित कराने के लिए कूटरचित अभिलेख तैयार कर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय तक पहुंचा दिए गए। यदि यह प्रयास सफल हो जाता, तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को वैधता दिलाने की कोशिश पूरी हो सकती थी।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में दो व्यक्तियों ने कथित रूप से बैकडेट में स्कॉलर रजिस्टर और उपस्थिति रजिस्टर तैयार किए। आरोप है कि इन अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियां, कूटरचित सील और रिकॉर्ड तैयार कर उन्हें वास्तविक दस्तावेजों के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि विद्यालय के प्रबंधक को भी इस पूरी गतिविधि की जानकारी नहीं थी और अभिलेख उनकी जानकारी के बिना ही विभाग तक पहुंचा दिए गए।
फर्जी स्कूल, फर्जी रिकॉर्ड और सरकारी मुहर की कोशिश
शिक्षा विभाग के नियम स्पष्ट हैं कि बिना मान्यता प्राप्त विद्यालय द्वारा जारी ट्रांसफर सर्टिफिकेट को वैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं होती। ऐसे में यदि किसी टीसी पर बीईओ का काउंटर साइन प्राप्त हो जाए, तो आगे प्रवेश प्रक्रिया में उसे वास्तविक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। यही कारण है कि कथित रूप से पूरे षड्यंत्र की पटकथा तैयार की गई।
आरोप है कि पहले फर्जी छात्रवृत्ति एवं प्रवेश रिकॉर्ड तैयार किए गए, फिर छात्र उपस्थिति का ऐसा विवरण बनाया गया जिससे यह प्रतीत हो कि विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययनरत थे। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर टीसी को वैधता दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया गया।
बीईओ कार्यालय की सतर्कता से खुली परतें
बताया जा रहा है कि बीईओ कार्यालय में दस्तावेजों की जांच के दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। रजिस्टरों की लिखावट, प्रविष्टियों की शैली, सीलों की बनावट तथा रिकॉर्ड की निरंतरता पर संदेह होने के बाद गहन परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच में कथित तौर पर दस्तावेज संदिग्ध पाए गए।
जब विद्यालय प्रबंधक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कथित रूप से स्पष्ट किया कि ऐसे किसी रजिस्टर को तैयार कराने अथवा विभाग में जमा कराने की जानकारी उन्हें नहीं है। इसके बाद पूरा मामला संदेह के घेरे में आ गया और कथित जालसाजी की परतें खुलने लगीं।
यह सिर्फ टीसी नहीं, पूरी शिक्षा व्यवस्था पर हमला
यदि कोई व्यक्ति फर्जी विद्यालय के रिकॉर्ड तैयार कर सरकारी कार्यालय में जमा करा सकता है, तो यह केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है। ऐसे मामलों में मासूम विद्यार्थियों का भविष्य भी संकट में पड़ सकता है। वर्षों बाद यदि ऐसे प्रमाणपत्र अमान्य घोषित होते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान छात्रों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है।
कई बड़े सवाल खड़े करता मामला
– आखिर वे कौन लोग हैं जिन्होंने कथित रूप से फर्जी रजिस्टर तैयार किए?
– बिना अधिकृत अभिलेखों के सरकारी कार्यालय तक दस्तावेज कैसे पहुंचे?
– क्या इससे पहले भी इसी तरीके से अन्य टीसी पर काउंटर साइन कराने का प्रयास किया गया?
– क्या इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है?
– क्या क्षेत्र में संचालित अन्य बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों की भी जांच होगी?
कानूनी दृष्टि से गंभीर मामला
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला कूटरचना, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा सरकारी अधिकारी को गुमराह करने जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में लागू कानून और धाराएं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय करती हैं।
स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराने, बिना मान्यता प्राप्त विद्यालयों के सत्यापन अभियान चलाने, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने तथा यदि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
फिलहाल मामला जांचाधीन बताया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी या दोष तय होगा। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़े के सबसे गंभीर मामलों में से एक माना जा सकता है।