जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स -2026 पर कैपिसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप नगर निगम स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में संपन्न

जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स -2026 पर कैपिसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप नगर निगम स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में संपन्न

 

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स -2026 अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी होगा लागू, ग्रामीण क्षेत्रों के वल्क वेस्ट जेनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी) को भी किया जाएगा सूचीबद्ध

 

विष्णु सिकरवार
आगरा। मंगलवार को जिलाधिकारी श्री मनीष बंसल जी की अध्यक्षता में नगर निगम स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में “कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप ऑन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स -2026” का आयोजन किया गया।
वर्कशॉप में जिलाधिकारी द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली-2026 के अनुपालन, अधिकृत, अनाधिकृत ठोस अपशिष्ट डंपिंग की निगरानी, रोकथाम, निस्तारण, मॉनिटरिंग एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता संवर्धन संबंधी समीक्षा भी की गई।
वर्कशॉप में पंकज भूषण, मुख्य अभियंता पर्यावरण, नगर निगम द्वारा पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से पर्यावरण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन(एसब्ल्यूएम) के अधिसूचित किये गए नए नियम, मा. सुप्रीमकोर्ट की दी गई विभिन्न गाइडलाइंस आदि को बताया गया।
उन्होंने बताया कि मा.सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जनपद स्तर पर स्पेशल सेल का गठन का प्रावधान है जो जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित की जा चुकी है, जनपद में अब डंपिंग साइट नहीं बनेगी, आगरा में 20 लाख मीट्रिक टन डंपिंग वेस्ट का निस्तारण किया गया है।जो डंपिंग साइट कही शेष हैं उन्हें चिह्नित कर उनका अति शीघ्र निस्तारण किया जाएगा तथा उक्त की साप्ताहिक, मासिक रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रेषित की जाएगी।
*वर्कशॉप को जिलाधिकारी ने संबोधित करते हुए कहा कि नवीन नियमावली में अब ग्रामीण क्षेत्रों के वल्क वेस्ट जेनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी) को भी शामिल किया गया है*

*जिलाधिकारी ने बताया कि वल्क वेस्ट जेनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी) में ऐसी संस्थाएँ शामिल हैं जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, या जिनकी जल खपत 40,000 लीटर या उससे अधिक प्रतिदिन है, या जिनका ठोस अपशिष्ट उत्पादन 100 किलोग्राम या उससे अधिक प्रतिदिन है को शामिल किया गया है, उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल नगर निकायों का दायित्व नहीं, बल्कि सभी विभागों, सेवा प्रदाताओं एवं नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स – 2026 का प्रत्येक स्तर पर शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा नियमों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार प्रवर्तन (Enforcement) की कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने 15 दिन में सभी संबंधित विभाग यथा एडीए, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, होटल, उद्योग विभाग, मंडी, जिला पंचायत राज,आदि सभी संबंधित विभाग,वल्क वेस्ट जेनरेटर्स (बीडब्ल्यूजी) को सूचीबद्ध कर रिपोर्ट तैयार करें, उक्त नवीन नियमावली की जानकारी तथा लागू किए जाने हेतु सभी हितधारकों से संपर्क, बैठक कर जानकारी दी जाए तथा समुचित प्रचार प्रसार किया जाए।*

इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
वर्कशॉप में बताया गया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित सभी सूचनाओं के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया गया है, जिस पर अपशिष्ट संग्रहण, प्रसंस्करण, कम्पोस्ट एवं RDF उत्पादन, लेगेसी वेस्ट के बायो-माइनिंग एवं बायो-रिमेडिएशन की प्रगति, शेष लेगेसी वेस्ट, माहवार प्रगति एवं प्रदूषण संबंधी विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा।
सभी स्थानीय निकायों एवं संबंधित संस्थाओं को वित्तीय वर्ष 2025-26 का Form-4 जुलाई माह के अंत तक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। इसके उपरांत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेकित Form-5 के माध्यम से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को रिपोर्ट प्रेषित करेगा।
वर्कशॉप में अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण, प्रसंस्करण, मॉनिटरिंग एवं नियमित रिपोर्टिंग को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देने की बात कही,ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सफलता नागरिकों द्वारा स्रोत स्तर पर गीले एवं सूखे कचरे के पृथक्करण पर निर्भर करती है,इसलिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है।
वर्कशॉप में बताया गया कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के अंतर्गत पहली बार ग्रामीण स्थानीय निकायों को भी शामिल किया गया है। अब ग्राम पंचायतें एवं ग्रामीण क्षेत्र भी इन नियमों के अनुपालन के लिए समान रूप से उत्तरदायी होंगे। बल्क वेस्ट जनरेटर (Bulk Waste Generator) के लिए विकसित ऑनलाइन पोर्टल की जानकारी देते हुए बताया गया कि सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कर प्रत्येक वित्तीय वर्ष का वार्षिक रिटर्न ऑनलाइन प्रस्तुत करना होगा। उन्हें अपने परिसर में उत्पन्न अपशिष्ट का स्रोत पर पृथक्करण, स्थानीय स्तर पर जैविक अपशिष्ट का कम्पोस्टिंग, बायो-मीथनेशन अथवा अन्य स्वीकृत तकनीकों से प्रसंस्करण तथा शेष अपशिष्ट को स्थानीय निकाय अथवा अधिकृत एजेंसी को उपलब्ध कराना होगा। पोर्टल पर प्रस्तुत विवरण के आधार पर नगर निगम अथवा अधिकृत एजेंसी द्वारा Bulk Waste Generator Certificate (BWG Certificate) जारी किया जाएगा, जो भविष्य में उद्योगों, होटलों एवं अन्य संस्थानों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए अनिवार्य दस्तावेज होगा।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद के सभी संभावित बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान के लिए शिक्षा विभाग, उद्योग विभाग, पर्यटन विभाग, स्वास्थ्य विभाग,जिला स्तरीय कार्यालयों, होटल, मैरिज होम, मॉल, मल्टीप्लेक्स, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग तथा अन्य संबंधित विभागों से सूचनाएं प्राप्त कर व्यापक सूची तैयार की जाए। सभी चिन्हित संस्थानों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पोर्टल पर पंजीकरण एवं नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी किए जाएं।

उन्होंने कहा कि यह कार्य Solid Waste Management Rules, 2023 के नियम-6 तथा उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप किया जाना है। यदि कोई संस्थान निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुपालन नहीं करता है तो पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा-5 के अंतर्गत आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित संस्थानों के जल एवं विद्युत कनेक्शन विच्छेद करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

जिलाधिकारी ने सभी ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों एवं नगर पालिकाओं को निर्देशित किया कि आगामी 15 दिवस के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों के प्रमुख डंपिंग स्थलों एवं अनधिकृत कूड़ा निस्तारण स्थलों की पहचान कर उनका विवरण उपलब्ध कराएं। साथ ही सभी बल्क वेस्ट जनरेटरों की सूची तैयार कर समय-समय पर उसका अद्यतन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूर्ण किया जाए क्योंकि इसकी प्रगति रिपोर्ट उच्च स्तर पर प्रस्तुत की जानी है।
आगरा जनपद ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के दृष्टिकोण से संवेदनशील श्रेणी में है तथा इस विषय से संबंधित विभिन्न प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसलिए सभी विभाग, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतें एवं संबंधित संस्थाएं पूर्ण समन्वय, गंभीरता एवं समयबद्धता के साथ कार्य करते हुए नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन-जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति नागरिकों को निरंतर जागरूक किया जाए, ताकि स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल आगरा के निर्माण का लक्ष्य समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सके।

वर्कशॉप में बताया गया कि ठोस कचरे का स्रोत पर ही चार-स्तरीय पृथक्करण अनिवार्य किया गया है तथा थोक कचरा उत्पादकों के लिए स्पष्ट उत्तरदायित्व परिभाषित किए गए हैं,नए नियमों में प्रदूषणकारी भुगतान सिद्धांत के आधार पर उल्लंघन के लिए पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान किया गया है।
ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के तहत संपूर्ण ठोस कचरा प्रबंधन प्रक्रिया की ऑनलाइन ट्रैकिंग और निगरानी और कचरा प्रसंस्करण के लिए भूमि आवंटन में तेजी लाई गई।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लेते हैं। ये नियम पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत अधिसूचित किए गए हैं और 1 अप्रैल, 2026 से पूर्णतः प्रभावी हैं। संशोधित नियमों में चक्रीय अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को एकीकृत किया गया है, जिसमें कुशल अपशिष्ट पृथक्करण और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नियमों में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के आधार पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाने का प्रावधान है, जिसमें पंजीकरण के बिना संचालन, गलत रिपोर्टिंग, जाली दस्तावेज प्रस्तुत करना या ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की अनुचित प्रथाएं शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) संबंधित दिशानिर्देश तैयार करेगा, जबकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियां पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाएंगी।

वर्कशॉप में बताया गया कि
*स्रोत पर ठोस कचरे का चार-स्तरीय पृथक्करण*
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत स्रोत पर ठोस अपशिष्ट का चार-स्तरीय पृथक्करण अनिवार्य कर दिया गया है। अपशिष्ट को गीले अपशिष्ट, सूखे अपशिष्ट(सॉलिड वेस्ट), स्वच्छता अपशिष्ट(सैनेटरी वेस्ट)और विशेष देखभाल अपशिष्ट(स्पेशल केयर वेस्ट)में अलग करना आवश्यक है।

गीले कचरे में रसोई का कचरा, सब्जियां, फलों के छिलके, मांस, फूल आदि शामिल हैं, जिन्हें निकटतम सुविधा केंद्र में खाद बनाने या जैव-मीथेनीकरण प्रक्रिया द्वारा संशोधित किया जाएगा। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी और रबर आदि शामिल हैं, जिन्हें छँटाई और पुनर्चक्रण के लिए सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं (MRF) में ले जाया जाएगा। स्वच्छता संबंधी कचरे में इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी पैड, टैम्पोन और कंडोम आदि शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित रूप से लपेटकर अलग से संग्रहित किया जाएगा। विशेष देखभाल वाले कचरे में पेंट के डिब्बे, बल्ब, पारा थर्मामीटर और दवाइयाँ आदि शामिल हैं, जिन्हें अधिकृत एजेंसियों द्वारा एकत्र किया जाएगा या निर्दिष्ट संग्रहण केंद्रों पर जमा किया जाएगा।

*नवीन नियमावली में थोक अपशिष्ट उत्पादकों की स्पष्ट परिभाषा*

बड़े पैमाने पर अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली संस्थाओं में वे संस्थाएँ शामिल हैं जिनका क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक है, या जिनकी जल खपत 40,000 लीटर या उससे अधिक प्रतिदिन है, या जिनका ठोस अपशिष्ट उत्पादन 100 किलोग्राम या उससे अधिक प्रतिदिन है। इनमें केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, संस्थान, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और आवासीय समितियाँ आदि शामिल हैं। बड़े पैमाने पर अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किया जाए। इस प्रावधान से शहरी स्थानीय निकायों पर बोझ काफी कम होने और विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नियमों में स्थानीय निकायों के उपनियमों के अनुसार अपशिष्ट उत्पन्न करने वाली संस्थाओं पर उपयोगकर्ता शुल्क लगाने की भी अनुमति दी गई है।

नए नियमों में विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व (ईबीडब्ल्यूजीआर) भी शामिल किया गया है, जिसके तहत थोक अपशिष्ट उत्पादकों को उनके द्वारा उत्पन्न ठोस अपशिष्ट के लिए जवाबदेह बनाया गया है। थोक अपशिष्ट उत्पादकों को यथासंभव गीले अपशिष्ट का प्रसंस्करण परिसर में ही करना होगा या यदि परिसर में प्रसंस्करण संभव नहीं है तो ईबीडब्ल्यूजीआर प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा। इस ढांचे का उद्देश्य अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को सुदृढ़ करना है, क्योंकि थोक अपशिष्ट उत्पादक कुल ठोस अपशिष्ट उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा हैं।
अपशिष्ट प्रसंस्करण के लिए भूमि आवंटन में तेजी लाना और संपूर्ण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की ऑनलाइन निगरानी करना।
ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं के आसपास विकास के लिए नियमों में श्रेणीबद्ध मानदंड लागू किए गए हैं ताकि भूमि आवंटन में तेजी लाई जा सके। प्रतिदिन 5 टन से अधिक की स्थापित क्षमता वाली सुविधाओं के लिए आवंटित कुल क्षेत्र के भीतर एक बफर जोन बनाए रखना अनिवार्य है। सीपीसीबी (संसदीय स्वास्थ्य आयोग) सुविधा की क्षमता और प्रदूषण भार के आधार पर बफर जोन के आकार और उसके भीतर अनुमत गतिविधियों को निर्दिष्ट करने वाले दिशानिर्देश विकसित करेगा। इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के लिए भूमि आवंटन में तेजी आने की उम्मीद है।

इन नियमों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सभी चरणों, जिनमें अपशिष्ट उत्पादन, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान, साथ ही पुराने अपशिष्ट स्थलों का जैव खनन और जैव उपचार शामिल है, पर नज़र रखने के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के विकास का भी प्रावधान है। अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं का स्थानीय निकायों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों या प्रदूषण नियंत्रण समितियों के साथ पंजीकरण और प्राधिकरण सीपीसीबी द्वारा विकसित पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।
ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जाएगी, जिससे कई चरणों वाली भौतिक रिपोर्टिंग प्रक्रिया का स्थान लिया जाएगा । नियमों के अनुसार सभी अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं का ऑडिट अनिवार्य है। ऑडिट रिपोर्ट को केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना आवश्यक है।

*स्थानीय निकायों और सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं (एमआरएफ) के कर्तव्य*
संशोधित नियमों के तहत, स्थानीय निकाय ठोस कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और परिवहन के लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें एमआरएफ (मटेरियल रिफाइनरी सेंटर) के साथ समन्वय स्थापित करना होगा, जो ई-कचरा, विशेष देखभाल वाला कचरा, स्वच्छता संबंधी कचरा और अन्य प्रकार के कचरे को आगे की प्रक्रिया के लिए जमा करने के केंद्र के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। एमआरएफ को ठोस कचरे के छँटाई के लिए औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है।
स्थानीय निकायों को कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिम्मेदार विभाग को शहरी उपक्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है।

*उद्योगों द्वारा अपशिष्ट से प्राप्त ईंधन (आरडीएफ) का उपयोग*
नए नियमों के अनुसार, अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) को उच्च कैलोरी मान वाले नगरपालिका ठोस अपशिष्ट को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर और सुखाकर उत्पादित ईंधन के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से गैर-पुनर्चक्रणीय प्लास्टिक, कागज और वस्त्र शामिल होते हैं। सीमेंट संयंत्रों और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों सहित औद्योगिक इकाइयाँ जो वर्तमान में ठोस ईंधन का उपयोग करती हैं, उन्हें इसे आरडीएफ से बदलने के लिए अनिवार्य किया गया है। ईंधन प्रतिस्थापन दर वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़कर छह वर्षों में 15 प्रतिशत हो जाएगी।

*अपशिष्ट पदार्थों के डम्प को भरने और उनके सुधार पर प्रतिबंध*
इन नियमों में लैंडफिलिंग पर प्रतिबंधों को और कड़ा किया गया है और पुराने कचरा स्थलों के सुधार पर भी ध्यान दिया गया है। लैंडफिल में केवल गैर-पुनर्चक्रणीय, गैर-ऊर्जा-पुनर्प्राप्त करने योग्य और अक्रिय पदार्थ ही डाले जा सकेंगे। स्थानीय निकायों के लिए अविभाजित कचरे को स्वच्छता लैंडफिल में भेजने के लिए उच्च लैंडफिल शुल्क निर्धारित किया गया है। अविभाजित कचरे के लिए लैंडफिल शुल्क, विभाजित कचरे के पृथक्करण, परिवहन और प्रसंस्करण की लागत से अधिक होगा। नियमों में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा लैंडफिल का वार्षिक ऑडिट भी अनिवार्य किया गया है,और लैंडफिल के प्रदर्शन की निगरानी जिला कलेक्टरों द्वारा की जाएगी।
नवीन नियमों के तहत सभी पुराने कचरा स्थलों का मानचित्रण और मूल्यांकन अनिवार्य है और समयबद्ध जैव खनन और जैव उपचार का प्रावधान है , जिसके तहत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से त्रैमासिक प्रगति रिपोर्टिंग की जाएगी।

बैठक में नगरायुक्त श्री संतोष कुमार वैश्य, पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अमित मिश्रा सहित सेवा प्रदाता संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

नमस्कार,नैमिष टुडे न्यूज़पेपर में आपका स्वागत है,यहाँ आपको हमेसा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9415969423 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें