यूपी में कांग्रेस का अंदरूनी असंतोष अभी नहीं पड़ा ठंडा, उठाने जा रहे हैं नया कदम

पांच राज्यों में हार के बाद कांग्रेस को राजनीतिक संकट से निकालने के लिए पार्टी कार्यसमिति ने अध्यक्ष सोनिया गांधी को संगठन के हर स्तर पर फौरी बदलाव करने की खुली छूट भले दे रखी हो, मगर हाईकमान को इन राज्यों में बदलाव को अंजाम देने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को चुनाव से ठीक पहले कमान सौंपने के नाकाम प्रयोग के मद्देनजर इन राज्यों के फेरबदल में नेतृत्व कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। कांग्रेस के लंबे सियासी संघर्ष की राह को देखते हुए स्टारडम वाले बड़े चेहरों की जगह युवा चेहरों को तरजीह दी जा रही है। मणिपुर तथा गोवा कांग्रेस में हुए बदलाव इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

कांग्रेस की करारी चुनावी पराजय के तुरंत बाद सोनिया गांधी ने पांचों राज्यों-उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के प्रदेश अध्यक्षों का इस्तीफा तत्काल मांग लिया था। लेकिन तीन हफ्ते बाद पिछले दो दिनों में गोवा और मणिपुर के संगठनात्मक बदलाव को ही अमली जामा पहनाया गया है। अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में संगठन के नए ढांचे को स्वरूप देना नेतृत्व के लिए न केवल अहम बल्कि बेहद चुनौतीपूर्ण है। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की विदाई की कीमत पर नवजोत सिंह सिद्धू पर दांव लगाने को लेकर असंतुष्ट खेमे के नेताओं ने सवाल भी उठाया था। मगर नेतृत्व ने तब इसकी परवाह नहीं की थी। इसी तरह उत्तराखंड में हरीश रावत को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने और गणेश गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के फैसले पर भी पार्टी में मशविरा नहीं किए जाने की बात हार की समीक्षा के लिए बुलाई गई कार्यसमिति की बैठक में उठी थी।

यूपी में कांग्रेस का अंदरूनी असंतोष और कशमकश अभी नहीं पड़ा ठंडा

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को पार्टी की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की पसंद माना जाता रहा है। नेतृत्व की पसंद के चेहरों के बावजूद पंजाब और उत्तराखंड में सत्ता कांग्रेस के हाथों में आने से दूर रह गई। उत्तर प्रदेश में दो सीटों के साथ पार्टी अब तक के सबसे खराब दौर में पहुंच गई है। पार्टी की इस हालत को लेकर कांग्रेस का अंदरूनी असंतोष और कशमकश अभी ठंडा नहीं पड़ा है। इसके मद्देनजर इन राज्यों में बदलाव को अमली जामा पहनाने से पहले नेतृत्व बाहरी ही नहीं अपने भीतरी सियासी समीकरणों का भी आकलन कर लेना चाहता है। हालांकि, गुरुवार को 38 साल के अमित पाटकर को गोवा कांग्रेस का नया अध्यक्ष, पायलट से नेता बने 37 वर्षीय यूरी अलिमाओ को कार्यकारी अध्यक्ष और 46 साल के माइकल लोबो को विपक्ष का नेता बनाकर हाईकमान ने गोवा कांग्रेस को पूरी तरह नई पीढ़ी के हाथों में सौंप दिया है। कांग्रेस विधायक दल का उप नेता भी 46 साल के संकल्प अमोनकर को बनाया गया है। चुनाव में गोवा के पर्यवेक्षक रहे वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने शुक्रवार को कहा भी कि गोवा कांग्रेस में पीढ़ीगत बदलाव कर युवा चेहरों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। हम आश्वस्त हैं कि वे इस पर खरा उतरते हुए लोगों का समर्थन हासिल करेंगे।

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