
लखनऊ अपराधों पर नियंत्रण करने हेतु एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ । संगोष्ठी के उद्घाटन में तीन बेटियाँ बनी मां के पूजन से हुआ गोष्ठी । सीमा यादव ने कहा जेलों में बंद अपराधी कभी बच्चे थे।
बड़े होकर वह शातिर अपराधी बने और वे जेलों में बन्द है । यदि बच्चों को उचित शिक्षा दी जाए तो उन्हें उचित अनुचित का ज्ञान होगा तभी अपराधों पर नियंत्रण पा.या जा सकता है। प्रधानाचार्या श्रीमती लक्ष्मी सिंह ने बच्चों को संगोष्ठी में बताया बच्चों यदि तुम्हें सही और गलत का ज्ञान हो जाएगा जो हमारे समाज में कोई अपराधी नहीं होगा । और जब अपराधी नहीं होंगे तब जनता खुशहाल होगी और जेल खाली होती नजर आएगी एक बच्चा जो स्कूल में पेंसिल चुराता था।धीरे-धीरे बड़ा हुआ और शातिर अपराधी बना उसे फांसी की सजा हुई। अंतिम इच्छा में मां से मिलने की इच्छा जतायी मां का कान मुंह से काट लिया मां ने थप्पड़ मारा बेटे ने कहा माँ अगर यह थप्पड़ उस समय मारा होता तो आज मुझे मृत्यु दंड नहीं होता इससे ज्ञात होता है , कि माता-पिता एवं स्कूलों को छोटी-छोटी गलतियों पर ध्यान रखना होगा।
अंत में विद्यालय के प्रबंधक महादेव यादव जी ने कहा बच्चों को अपराधी होने की शिक्षा माता-पिता गुरु स्कूल नहीं मोबाइल टीवी के द्वारा प्रसारित होने वाले सीरियल दे रहे हैं। और फिल्मों में कलाकार जो कुछ सीखा रहे हैं । मार-धाड़ अपराधों को करके उनसे बचना दारू पीना आदि सीखाते हैं । बच्चे सीख लेते हैं और उनके कॉपी करते हैं सेंसर बोर्ड उन्हें पास कर देता है ।और एन्ड्राइड फोन इतने सस्ते हो गए । घर-घर में बच्चे के पास फोन है अपराधों के बहाने के यही कारण है । अनुचित उचित की शिक्षा विद्यालयों में अवश्य दी जानी चाहिए ।