
शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में गुरु से मिलता ज्ञान है,गुरु ही अमृत की खान है,और बिना शिक्षा और ज्ञान के धरा पर जीवन शमशान है,अनीता गौतम
आगरा शिक्षा और शिक्षक दोनों सिक्के के दो पहलू हैं।जिनका अपना अलग-अलग महत्व है। दोनों ही एक दूसरे के बिना अपूर्ण हैं। जब बात शिक्षा की आती है तो, शिक्षक के साथ-साथ शिक्षा का साथ स्वतः ही हो जाता है,पर आज शिक्षा और शिक्षक दोनों के ही मायने बदल चुके हैं, गुरु का स्थान गूगल ले चुका है और गुरुकुल का स्थान कोचिंग सेंटर ले चुके हैं, दोनों ही एक दूसरे से भ्रमित हो चुके हैं।गुरुकुल में शिक्षा मिलती थी तो गुरु भी सम्माननीय थे और शिक्षा ग्रहण करने वाले शिष्य भी श्रेष्ठ थे, पर आज इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया ने सबकुछ परिवर्तित कर दिया है। वास्तविकता यह है कि ,एक सच्चा गुरु आज भी अपनी रोजी रोटी के लिए भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर कोचिंग सेंटर व्यवसाय की होड़ में सबसे आगे दौड़ रहे हैं, आज शिक्षा ज्ञान नहीं व्यापार बन चुका है, शिक्षा का वास्तविक ज्ञान वह कहलाता है,जिसके द्वारा हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति करते हैं, जो हम बनना चाहते हैं ,परंतु आज छात्रों को विषय का पाठ्यक्रम के अनुसार ज्ञान न देकर छात्रों को भ्रमित करके उनके अभिभावकों से अच्छी-खासी फीस वसूली जाती है। छात्रों को विषयों में फेल करके अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया जाता है। ,ज्ञान के स्थान पर छात्रों में विफल होने का भय पैदा किया जाता है। जिससे मजबूरन अभिभावक उनकी मुंहमाँगी फीस देते हैं। सोचिए!कि एक गुरु की प्रतिमा को रखकर एकलव्य श्रेष्ठ धनुर्धारी बन सकता है और गुरुद्रोणचार्य आज भी इतिहास में पूज्यनीय व सम्माननीय है वहीं दूसरी ओर मिसाइल मैन अब्दुल कलाम जी जो कि छात्रों को सिर्फ ज्ञान ही बाँटते थे। आज भी हम उन पर अभिमान करते हैं। और वहीं एक ओर सर्वपल्ली राधा कृष्णन एक वरिष्ठ शिक्षक के रुप मे पूरे विश्व में विख्यात हुये। कहने का आशय यह है कि शिक्षा ज्ञान और सम्मान दिलाते हैं और व्यवसाय आपको धन दे सकते हैं सम्मान नहीं आज हमारी केंद्र सरकार को वास्तविक गुरुओं के सम्मान और उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनकी आय का समाधान करना चाहिए। क्योंकि,गुरु तो गुरु होते हैं चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट दोनों का ही सम्मान समानता से होना चाहिए। आज शिक्षक प्राइवेट संस्थानों में कार्यरत हैं पूरा दिन परिश्रम भी पाँच गुना होता है परंतु उनका शोषण दस गुना होता है , यह अति निंदनीय है , जितना परिश्रम उतना ही वेतन हो तो कोई भी परेशान व दुखी नहीं होगा अपना जीवन सम्मान और सुकून से व्यतीत कर सकता है बस आवश्यकता है शिक्षा के महत्व को समझने की और एक श्रेष्ठ गुरु के सम्मान करने की।
क्योंकि–गुरु से मिलता ज्ञान है,
गुरु ही अमृत की खान है,
और बिन शिक्षा और ज्ञान के धरा पर जीवन शमशान है,और बिन शिक्षा और ज्ञान के, मानव पशु और पाषाण समान है