
रामगांव बाजार में एक जामुन और दो अर्जुन के हरे-भरे पेड़ कटे, वन विभाग और जिला पंचायत के दावों में विरोधाभास
ब्यूरो चीफ भोलू तिवारी
बहराइच। राजी चौराहा से बहराइच संपर्क मार्ग पर रामगांव बाजार में सड़क किनारे लगे एक जामुन और दो अर्जुन के हरे-भरे पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पेड़ों के स्वामित्व और कटाई की जिम्मेदारी को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सही कौन है और जिम्मेदार कौन?
वन दरोगा लालचंद यादव ने क्या कहा?
वन दरोगा लालचंद यादव के अनुसार, तीनों पेड़ों की नीलामी हुई थी और ये पेड़ वन विभाग के अधीन आते हैं। उनका कहना है कि इन पेड़ों पर जिला पंचायत विभाग का कोई अधिकार नहीं है।
रेंजर मोहम्मद साकिब का बयान अलग
वहीं, वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) मोहम्मद साकिब का कहना है कि सड़क किनारे लगे पेड़ों से वन विभाग का कोई वास्ता नहीं है और ये पेड़ जिला पंचायत के अधीन आते हैं।
दो बयानों से उठे सवाल
एक ओर वन दरोगा लालचंद यादव तीन पेड़ों की नीलामी और वन विभाग के अधिकार की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर रेंजर मोहम्मद साकिब पेड़ों को जिला पंचायत का बता रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर पेड़ों का वास्तविक स्वामित्व किस विभाग के पास था और कटाई किसकी अनुमति से हुई?
यदि तीनों पेड़ों की नीलामी हुई थी, तो नीलामी के दस्तावेज, स्वीकृति और सरकारी राजस्व जमा होने के रिकॉर्ड सामने आने चाहिए। साथ ही, यह भी जांच होनी चाहिए कि पेड़ों की कटाई नियमानुसार हुई या नहीं और सरकारी संपत्ति अथवा राजस्व को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचा।
जांच के बाद ही सामने आएगा सच
अब जिला प्रशासन, वन विभाग और जिला पंचायत विभाग की जिम्मेदारी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर पेड़ों के स्वामित्व, नीलामी और कटाई से जुड़े अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें।
सबसे बड़ा सवाल—एक जामुन और दो अर्जुन के हरे-भरे पेड़ों की कटाई किसकी अनुमति से हुई? वन दरोगा लालचंद यादव और रेंजर मोहम्मद साकिब के अलग-अलग बयानों में सही कौन है? सरकारी राजस्व का हिसाब क्या है? इन सवालों के जवाब संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आएंगे।