महमूदाबाद: मानपुर संगत में सरकारी राजस्व को लाखों की चपत, आंधी में गिरे कीमती पेड़ों को ‘लकड़ी चोरों’ ने मिली भगत से बेचा

महमूदाबाद: मानपुर संगत में सरकारी राजस्व को लाखों की चपत, आंधी में गिरे कीमती पेड़ों को ‘लकड़ी चोरों’ ने मिली भगत से बेचा

🔸• ग्रामीणों का गंभीर आरोप- शिकायत के बाद जांच से बचने के लिए तहसील प्रशासन ने शुरू किया ‘नीलामी का दिखावा’
🔸• सरकारी लकड़ी को सुरक्षित डिपो के बजाय ग्राम प्रधान के निजी ईंट-भट्टे पर डंप करने से उठे गंभीर सवाल

महमूदाबाद सीतापुर
तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मानपुर संगत में सरकारी संपत्ति की खुलेआम लूट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन और हलके के लेखपाल की कथित मिलीभगत से दबंग लकड़ी तस्करों ने सरकारी जमीन पर गिरे और खड़े लाखों रुपये के कीमती यूकेलिप्टस (नीलगिरी) के पेड़ों को रातों-रात काटकर गायब कर दिया। मामले में ग्रामीणों द्वारा पुरजोर विरोध दर्ज कराने के बाद अब तहसील प्रशासन कागजी खानापूर्ति और ‘दिखावे की नीलामी’ की प्रक्रिया में जुट गया है, जिससे क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है।

▪️आंधी की आड़ में चला तस्करों का आरा

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मानपुर संगत गांव में सरकारी भूमि पर कई दशक पुराने यूकेलिप्टस के करीब आधा सैकड़ा (50 से अधिक) विशालकाय पेड़ लगे हुए थे। बीते दिनों क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण ये कीमती पेड़ जड़ से उखड़कर जमीन पर गिर गए। बाजार में इन गिरे हुए पेड़ों की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही थी। नियमानुसार वन विभाग और राजस्व विभाग को इसकी पैमाइश कर खुली नीलामी करानी चाहिए थी, ताकि सरकारी खजाने को राजस्व मिल सके। लेकिन, आरोप है कि हलके के जिम्मेदार कर्मचारियों ने इस आपदा को अवसर में बदल दिया।

▪️रात के अंधेरे में साफ की गई सरकारी संपत्ति

ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आंधी में गिरे पेड़ों को उठाने के बहाने लकड़ी माफियाओं ने क्षेत्र में पैर पसार लिए। स्थानीय प्रशासन के कुछ भ्रष्ट चेहरों के संरक्षण में न केवल गिरे हुए पेड़, बल्कि वहां लगे कई अन्य हरे-भरे खड़े पेड़ों पर भी आरा चला दिया गया। कई रातों तक चले इस अवैध कटान के बाद कीमती लकड़ियों को ट्रकों में लादकर चोरी-छिपे ऊंचे दामों पर बाजार में बेच दिया गया। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, तब तक सरकारी राजस्व को लाखों का चूना लगाया जा चुका था।

▪️जनता जगी तो बदला गया खेल का पैंतरा, प्रधान के भट्टे पर डंप हुई लकड़ी

इस खुली लूट के खिलाफ जब क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर आवाज उठानी शुरू की और मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करने की चेतावनी दी, तो महमूदाबाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया। खुद की गर्दन फंसती देख आनन-फानन में एक नया ड्रामा रचा गया। प्रशासन ने बचे-कुचे कुछ चंद पेड़ों को कटवाकर उन्हें ग्राम प्रधान के निजी ईंट-भट्टे पर एकत्र करवा दिया। स्थानीय लोगों को शांत करने के लिए अधिकारियों द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि इन लकड़ियों का मूल्यांकन (Value Assessment) कराया जा रहा है और जल्द ही इनकी सरकारी नीलामी की जाएगी।

▪️नीलामी सिर्फ एक स्वांग, उच्च स्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि प्रशासन की यह नीलामी प्रक्रिया महज एक दिखावा और अपनी चमड़ी बचाने का स्वांग है। कीमती और भारी मात्रा में लकड़ी पहले ही दबंगों और तस्करों की जेबें भर चुकी है। अब जो बचा है, वह सिर्फ फाइलों को दुरुस्त करने के लिए छोड़ा गया है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर सरकारी लकड़ी को किसी सुरक्षित डिपो या सरकारी परिसर के बजाय ग्राम प्रधान के निजी ईंट-भट्टे पर क्यों रखवाया गया? क्षेत्र की जनता ने इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष उच्च अधिकारी से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सरकारी राजस्व की वसूली करने की मांग की है।

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