बाराबंकी के बुनकरों ने लिखी सफलता की नई कहानी, छोटे करघे से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

बाराबंकी के बुनकरों ने लिखी सफलता की नई कहानी, छोटे करघे से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार

ओडीओपी योजना बनी संबल, पारंपरिक हुनर से बने आत्मनिर्भर, दर्जनों युवाओं को दिया रोजगार*

बाराबंकी। नैमिष टुडे संवाददाता

एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना ने बाराबंकी के परंपरागत बुनकरों की किस्मत बदल दी है। जिले के दो युवा बुनकरों ने अपने पुश्तैनी हुनर, कड़ी मेहनत और सरकारी योजना के सहयोग से लगभग एक करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा कर मिसाल पेश की है। छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका काम आज बड़े पैमाने पर चल रहा है और कई जरूरतमंद लोगों के लिए रोजगार का जरिया बन गया है।

बाराबंकी में हैंडलूम उत्पादों का निर्माण किसी एक निश्चित मानक पर आधारित नहीं होता, बल्कि यह कपड़े की पसंद, डिज़ाइन की विविधता और ग्राहकों की मांग के अनुसार बदलता रहता है। जिले के लिए हथकरघा एवं वस्त्र उत्पाद को ODOP के तहत चयनित किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के ये दोनों बुनकर पहले स्थानीय बिचौलियों पर निर्भर थे और सीमित आय में काम कर रहे थे। ओडीओपी योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र से संपर्क किया।

*सरकारी मदद से मिला विस्तार*
उद्योग विभाग के अनुसार बाराबंकी में हथकरघा उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए सहायता योजना चलाई जा रही है, जिसमें 25 लाख से लेकर डेढ़ करोड़ रुपये तक का लोन अनुदान पर दिया जाता है। इसी के तहत इन बुनकरों को मार्जिन मनी और आसान किस्तों पर लोन की सुविधा मिली। इससे उन्होंने नए करघे लगाए, कच्चे माल की खरीद की और स्टोल, दुपट्टा, ड्रेस मटेरियल जैसे उत्पादों की रेंज बढ़ाई।

शुरुआत में उन्होंने घर से ही काम शुरू किया था। आज उनके उत्पाद न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश के कई राज्यों में सप्लाई हो रहे हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग और मेले-प्रदर्शनी के माध्यम से उनकी पहुंच सीधे ग्राहकों तक हो गई है।

कई लोगों को मिला रोजगार
इस सफलता की सबसे बड़ी बात यह है कि इन दो बुनकरों ने अकेले आगे बढ़ने के बजाय अपने साथ गांव के कई अन्य युवाओं और महिलाओं को भी जोड़ा है। आज उनकी यूनिट में 15 से 20 लोग नियमित रूप से काम कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों को भी आर्थिक सहारा मिला है।

यह सफलता बताती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए और स्थानीय कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए तो ग्रामीण युवा भी बड़े उद्यमी बन सकते हैं। बाराबंकी के बुनकरों की यह कहानी जिले के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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