
सरयू का कटान बना किसानों के लिए आफत, खेत और मकान पर मंडराया खतरा
रामनगर-सूरतगंज में तेज हुई कटान, 30 बीघा से ज्यादा उपजाऊ जमीन नदी में समाई, प्रशासन ने सर्वे शुरू किया
बाराबंकी, नैमिष टुडे संवाददाता
जिले में सरयू नदी का रौद्र रूप एक बार फिर किसानों के लिए आफत बन गया है। रामनगर और सूरतगंज तहसील क्षेत्र में नदी का कटान लगातार तेज होता जा रहा है। नदी के किनारे बसे तराई के गांवों में उपजाऊ जमीन, खड़ी फसल और कच्चे मकान कटान की चपेट में आ गए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
कई बीघा जमीन नदी में समाई
सूरतगंज ब्लॉक के हेतमापुर सहित अकौना ग्राम पंचायत के कोयलीपुरवा गांव में कटान ने गंभीर रूप ले लिया है। स्थानीय किसानों के अनुसार जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बाद कटान तेज हो गई है।
बाढ़ पीड़ित किसानों की माने तो अब तक लगभग 30 बीघा से अधिक कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। कोयलीपुरवा गांव में निखिल अवस्थी की 10 बीघा, राजकुमार की 14 बीघा तथा रामचंद्र सिंह की पांच बीघा जमीन कटान की चपेट में आ चुकी है। ये खेत वर्षों से इन परिवारों की जीविका का मुख्य आधार थे, अब इनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
रामनगर तहसील के सुंदरनगर, बेलहरी, कोडरी, मदरहा, अकौना, बल्लोपुर और हेतमापुर के आसपास दो दर्जन से अधिक गांव खतरे के निशान से आधा मीटर ऊपर पानी पहुंचते ही जलमग्न हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान हर दिन बढ़ रहा है, जिससे मकानों पर भी खतरा पैदा हो गया है। कई जगह गन्ना और धान की खड़ी फसल भी नदी में समा रही है।
प्रशासन ने दिया भरोसा
मामले में रामनगर तहसीलदार विपुल सिंह ने बताया कि “सरयू नदी के किनारे बसे कुछ किसानों की भूमि कटान की वजह से प्रभावित हुई है। प्रशासन द्वारा सर्वे कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, और नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन की टीम लगातार बाढ़ और कटान प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाई जा सके। बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखा गया है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल बचाव कार्य शुरू करने, तटबंध को मजबूत करने, बोल्डर और बांस की बैरिकेडिंग लगाने और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा व राहत किट देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कटान नहीं रोका गया तो कई परिवारों को पलायन करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि हर साल बरसात में नेपाल के बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद सरयू का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर जाता है, जिससे बाराबंकी की तीन तहसीलों रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट के 80 से ज्यादा गांव प्रभावित होते हैं।