
महाराजगंज (जौनपुर): ग्राम पंचायत अधिकारी पर आईजीआरएस में भ्रामक रिपोर्ट लगाने और हैंडपंप रीबोर भुगतान में अनियमितता का आरोप
जौनपुर /ब्यूरो चीफ/ अरुण कुमार दुबे/ नैमिष टुडे
महाराजगंज विकासखंड, जौनपुर में ग्राम पंचायत अधिकारी सत्येंद्र यादव पर आईजीआरएस पोर्टल पर कथित रूप से भ्रामक एवं एक जैसी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों के निस्तारण में अनियमितता करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि तीन अलग-अलग विषयों पर दर्ज शिकायतों के बावजूद एक ही प्रकार की रिपोर्ट प्रस्तुत कर सरकारी पोर्टल को गुमराह किया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, संदर्भ संख्या 40019426045174, 40019426045328 तथा 40019426045179 अलग-अलग विषयों से संबंधित थीं। इनमें चकरोड की पैमाइश, नए इंडिया मार्का हैंडपंप की स्थापना तथा हैंडपंप रीबोर कार्य से जुड़े मामले शामिल थे। आरोप है कि इन तीनों शिकायतों पर ग्राम पंचायत अधिकारी ने एक जैसी रिपोर्ट लगाते हुए वास्तविक तथ्यों को छिपाया और शिकायतों का गलत निस्तारण किया।
इसी मामले में शिकायतकर्ता ने 4 जुलाई 2026 को आईजीआरएस के माध्यम से पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी जौनपुर को अलग-अलग शिकायतें भेजकर ग्राम पंचायत अधिकारी के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचना एवं सरकारी अभिलेखों में भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले पांच वर्षों में इंडिया मार्का हैंडपंपों के रीबोर एवं मरम्मत के नाम पर ग्राम पंचायत के विभिन्न खातों से लाखों रुपये का भुगतान किया गया, जबकि कई स्थानों पर न तो रीबोर कार्य हुआ और न ही नए हैंडपंप लगाए गए। उनका कहना है कि वर्ष 2021 से 2026 के बीच अलग-अलग तिथियों पर ₹18,000, ₹18,200, ₹18,400, ₹18,500, ₹31,500, ₹64,738, ₹97,106, ₹97,107 तथा ₹1,89,000 सहित विभिन्न राशियों का भुगतान रीबोर एवं मरम्मत के नाम पर किया गया।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जिन स्थानों पर रीबोर एवं मरम्मत का भुगतान दर्शाया गया है, वहां की स्थलीय जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित इंडिया मार्का हैंडपंप किस योजना अथवा निधि से स्थापित किए गए थे, किन-किन स्थानों पर रीबोर कराया गया तथा प्रत्येक कार्य की तकनीकी जांच किस अधिकारी द्वारा की गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि 17 जून 2026 को इस संबंध में खंड विकास अधिकारी, महाराजगंज को भी प्रार्थना पत्र दिया गया था, जिसकी प्राप्ति रसीद उनके पास उपलब्ध है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत कर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारियों अथवा ग्राम पंचायत अधिकारी का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन संभव होगा।