राजकीय अतिथि गृह निर्माण मे हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासन और बीजेपी विधायक के तोते उड़े

राजकीय अतिथि गृह निर्माण मे हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासन और बीजेपी विधायक के तोते उड़े
भूमि पूजन के बाद हाईकोर्ट की रोक, सत्ता पक्ष पर उठे सवाल*
ट्रांसपोर्टनगर सुल्तानपुर का मामला

सुल्तानपुर। ट्रांसपोर्ट नगर में प्रस्तावित राजकीय अतिथि गृह का मामला अब सीधा अदालत की चौखट पर है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुस्ताक अहमद व अन्य बनाम राजस्व बोर्ड न्यायिक सदस्य, लखनऊ व अन्य प्रकरण में सुनवाई करते हुए विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का सख्त आदेश दिया है। अगली सुनवाई 3 अप्रैल 2026 को होगी। यह वही जमीन है जहां हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के विधायक विनोद सिंह और जिलाधिकारी समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बड़े धूमधाम से भूमि पूजन कराया गया था। कार्यक्रम की भव्यता जितनी चर्चा में रही उतना ही यह सवाल भी उठा कि नगरपालिका अध्यक्ष, कर्मचारियों और सभासदों को आखिर क्यों दूर रखा गया?
हाईकोर्ट के ताजा आदेश ने पूरे घटनाक्रम पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि जब तक मामला विचाराधीन है तब तक जमीन की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसे में भूमि पूजन और निर्माण की तैयारियों को लेकर सत्ता पक्ष की जल्दबाजी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पयागीपुर निवासी दीपक मिश्रा का कहना है कि वे वर्ष 2015 से इस भूमि को लेकर न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि संबंधित लोग अलग-अलग आदेशों का हवाला देकर निर्माण शुरू करा देते हैं, जबकि भूमि पर उनका वैध दावा है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि क्या बिना विवाद सुलझे भूमि पूजन कराया जाना उचित था? क्या प्रशासन ने जमीन की कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट किए बिना कार्यक्रम आयोजित किया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि अगला कदम क्या उठाते हैं।

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