देश का इतिहास लिख दे जो लहू से वह युवा है – कमलेश मौर्य मृदु

देश का इतिहास लिख दे जो लहू से वह युवा है – कमलेश मौर्य मृदु

राष्ट्रीय युवा दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न

बिसवां -सीतापुर। साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु की अध्यक्षता में राष्ट्रीय युवा दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार के तत्वाधान में मेरा युवा भारत -सीतापुर के द्वारा स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन मछरेहटा ब्लॉक के स्वर्गीय परागी लाल बाल कन्या विद्या मंदिर भवानीपुर में बाल एवं युवा सुधार युवा मंडल के अध्यक्ष प्रत्यूष सिंह चौहान द्वारा आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन कसे पूर्व इस अवसर पर
कार्यक्रम में विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका विषय पर निबंध प्रतियोगिता तथा मोबाइल के डिजिटल युग में पुरा आदर्श अप्रासंगिक है विषय पर वाद विवाद प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। रोहित विश्वकर्मा के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ पिंकी अरविंद प्रजापति की वाणी वंदना से हुआ जिसमें कवि अमरेंद्र सिंह चौहान ,कु.दिव्या वर्मा विद्यार्थी , प्रियंका सिंह आदि कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शो का प्रतिपादन किया तथा उपस्थित युवाओं में राष्ट्रीय अस्मिता का संचार किया। निबंध प्रतियोगिता में पूजा प्रथम बुद्ध गौरवी द्वितीय तथा शिवानी सिंह तृतीय रही। भाषण प्रतियोगिता में अभिषेक सिंह को प्रथम वर्षा तिवारी को द्वितीय तथा पलक सिंह को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ सभी प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि श्री सुधाकर वर्मा प्रधानाचार्य प्राथमिक विद्यालय डिहुआ द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया। काव्यपाठ करते हुए अमरेंद्र सिंह चौहान ने कहा *युवा जागे जवानी में नए कुछ छंद बन जाए*
*थोड़ा भी अगर समझे विवेकानंद बन जाए*
राष्ट्रीय युवा दिवस को रेखांकित करते हुए
कवि रोहित विश्वकर्मा ने पढ़ा
सभी को जीत लैं कविता के जैसे छंद बनते हैं।
उन्हीं कान्हा के सच में तो पिता भी नंद बनते हैं।
यहाँ सन्यास माँ के गर्भ से धारण जो कर लेते।
वही लड़के ही भारत में विवेकानंद बनते है।
अध्यक्षता कर रहे साहित्य भूषण कमलेश मौर्य मृदु ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा
अनय अत्याचार का जो ज्वार रोकें वह युवा है।
काल के भी सामने जो ताल ठोके वह युवा है।
सिर्फ चर्चा गोष्ठी गप्पे न हांके,
देश का इतिहास लिख दे जो लहू से वह युवा है।
कुमारी दिव्या वर्मा विद्यार्थी ने पढ़ा
जो नया वर्ष है जीवन की आशाएं नई क्या लाया है।
या गत वर्षों की भांति सिर्फ हालत दोहराने आया है।
धर्म जाति को भूल सभी क्या आपस में मिल जाएंगे ।
या मंदिर मस्जिद के कारण मानवता को ही भुलायेंगे।
दिल से दिल के रिश्ते को क्या आज निभाने आया है।
या गत वर्षों की भांति सिर्फ हालत दोहराने आया है।।
अंत में संयोजक अमरेंद्र सिंह चौहान ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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