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	<title>भक्ति Archives - Naimish Today</title>
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	<title>भक्ति Archives - Naimish Today</title>
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		<title>वीर संत हनुमंत के जन्म पर बन रहा है शुभ मंगलकारी योग संयोग। ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2024 13:27:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; इस बार त्रेता युग की तरह बन रहा है योग। चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है।&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>इस बार त्रेता युग की तरह बन रहा है योग।</p>
<p>चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार हनुमान जन्मोत्सव 23 अप्रैल को मनाया जायेगा। हनुमान जी श्रीराम के अनन्य भक्त थे और उन्हीं की भक्ति में लीन रहते थे। हनुमान जी की माता अंजना और पिता वानरराज केसरी थे इसलिए इन्हें अंजनी पुत्र और केसरीनंदन भी कहा जाता है। हनुमान जी को भगवान शिव का 11 वां अंश भी कहा जाता है।इसी शुभ दिन पर हनुमान जी का जन्म माता अंजनी की कोख से हुआ था। हनुमान जी के जन्मदिन को जयंती की बजाय जन्मोत्सव कहना उचित होगा, क्योंकि बजरंगबली अमर हैं, और जयंती का प्रयोग उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जो अब इस दुनिया में जीवित नहीं है। हनुमान जी ऐसे देवता हैं जिन्हें अगर सच्चे मन से याद किया जाए तो वे हर संकट में भक्तों की रक्षा करते हैं, इसलिए उन्हें संकट मोचन कहा जाता है। आपको बता दें कि इस बार हनुमान जन्मोत्सव पर बेहद शुभ योग बन रहे हैं<br />
खास यह है कि इस बार त्रेता युग की तरह अंजनी पुत्र के जन्म जैसा मंगलकारी संयोग बन रहा है। चैत्र पूर्णिमा पर संकट मोचन का प्रिय दिन मंगलवार रहेगा। ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री के अनुसार शास्त्रों में राम भक्त का जन्म चैत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन होना बताया गया है। पूर्णिमा तिथि मंगलवार को सुबह 3.25 से बुधवार प्रात काल 5.18 बजे तक रहेगी। मीन राशि में पंचग्रही योग बन रहा है। मेष राशि में बुधादित्य, कुंभ राशि में शनि शश राजयोग का संयोग बनेगा। योग 23 अप्रैल की सुबह से लेकर 24 अप्रैल को प्रात: 04 बजकर 57 मिनट तक है।चित्रा नक्षत्र भी 23 अप्रैल को सुबह से लेकर रात 10 बजकर 32 मिनट तक है, उसके बाद स्वाति नक्षत्र शुरू हो जाएगा। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं और हनुमानजी का प्रिय दिन भी मंगलवार है।वहीं, वज्र योग साहस, बल और पराक्रम का परिचायक है। ऐसे में मंलगवार के दिन, चित्रा नक्षत्र और वज्र योग में हनुमाजनी का जन्मोत्सव मनाना बड़ा ही शुभ होगा। भक्तों को कई गुना फल मिलेगा।<br />
ज्योतिष गुरु पंडित अतुल शास्त्री की मानें तो हनुमान जन्मोत्सव पर भद्रावास योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण शाम 04 बजकर 25 मिनट तक हो रहा है। इस समय में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। इस दौरान भद्रा पाताल में रहेंगी। भद्रा के पाताल में रहने के दौरान पृथ्वी पर उपस्थित समस्त जीव जंतु एवं मानव जाति का कल्याण होता है। ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री बता रहे हैं कि इस दिन कौन सा उपाय करके आप भी अपने कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।<br />
हनुमान जन्मोत्सव के दिन आपको हनुमान जी के आगे चमेली के तेल का दीपक जलाकर उनके इस दशाक्षर मंत्र का कम से कम एक माला, यानी 108 बार जप करना चाहिए। इस दिन इस मंत्र का जप करने से आपको विद्या और धन की प्राप्ति होगी। नौकरी में आपको अच्छे पद की प्राप्ति होगी। साथ ही विरोधियों से आपको छुटकारा मिलेगा।हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से आपको शनि दोष से छुटकारा मिल सकता है। ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री जी बताते है कि हनुमान जी को सिंदूर बेहद प्रिय है। ऐसे में शनि दोष और जीवन में चल रही सभी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए इस दिन भगवान हनुमान को सिंदूर का चोला चढ़ाएं। इससे बजरंगबली प्रसन्न होकर आपको सुख- समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।<br />
हनुमान जन्मोत्सव के दिन एक नारियल लेकर हनुमान मंदिर जाएं। उसके बाद इसे अपने ऊपर से सात बार फेरते हुए हनुमान जी के सामने फोड़ दें। ऐसा करने से आपकी सारी बाधाएं दूर हो सकती हैं।हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली को गुलाब की माला अर्पित करें। उसके बाद 11 पीपल के पत्ते लेकर इसपर श्री राम का नाम लिख दें फिर इनकी माला बना लें और हनुमान जी को चढ़ा दें। इससे बजरंगबली की विशेष कृपा मिलती है और शनि देव भी प्रसन्न होते हैं। हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुबह पीपल के जड़ में जल दें। इसके साथ ही इस दिन सरसों के तेल में थोड़ा सा उड़द की दाल और 1 सिक्का डालकर इसे जला दें। ऐसा करने से शनि भगवान खुश होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।</p>
<p>ज्योतिष गुरू पंडित अतुल शास्त्री<br />
ज्योतिष सेवा केंद्र<br />
09594318403/9820819501</p>
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		<title>हमारे राघव से सीखें पिता की आज्ञा का पालन करना &#8211; आचार्य करण शास्त्री</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/22171</link>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Apr 2024 04:28:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; विरार। पिता श्री की आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिए श्री राम से सीख लेनी चाहिए। अपने पिता दशरथ की आज्ञा के पालन हेतु भगवान श्री राम ने राजपाठ&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/22171">हमारे राघव से सीखें पिता की आज्ञा का पालन करना &#8211; आचार्य करण शास्त्री</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>विरार। पिता श्री की आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिए श्री राम से सीख लेनी चाहिए। अपने पिता दशरथ की आज्ञा के पालन हेतु भगवान श्री राम ने राजपाठ छोड़कर तपस्वी का भेष बनाकर चौदह वर्ष वन में रहने के लिए चले गए। जीवदानी माता के निकट, सहकर नगर, विरार पूर्व में चल रही श्री राम कथा का रसपान कराते हुए यह बातें अयोध्या के प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य करण शास्त्री महाराज जी ने अपने मधुर मुखारविंद से कही।</p>
<p>द जानकी फाउंडेशन एवं बहुजन विकास आघाड़ी महिला स्लमसेल द्वारा आयोजित श्री रामकथा के छठे दिवस पर शास्त्री जी ने राम बनवास, केवट प्रसंग का बहुत ही सुंदर गुडगान किया। सैकड़ों की तादात में आए रामभक्त संगीतमय कथा से झूम उठे।<br />
यज्ञाचार्य अर्जुन शास्त्री जी द्वारा पूजन विधि किया जा रहा है।मुख्य यजमान उपेन्द्र सिंह है।<br />
महाराज करन शास्त्री ने संदेश दिया कि जिस तरह वायुमंडल में हवा रहती है परंतु हमें एहसास तो होती है पर दिखाई नहीं देती और जब गर्मियों में पंखा चलाते हैं तो हमें ठंडक का अधिक एहसास होता है। ठीक उसी तरह हर जगह भगवान का वास है और जब हम मंदिर ,धार्मिक स्थल या सत्संग और संतवाणी सुनते हैं तो हमारा मन एकाग्रचित्त होकर ईश्वर में और अधिक लगता है।<br />
बतादे कि अयोध्या के करण और अर्जुन जी सगे जुड़वा भाई हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनलों पर अयोध्या से प्रसारित कोई भी धार्मिक कार्यक्रम में देखे जा सकते हैं।<br />
दोनों महाराज जी जन्मदिवस के अवसर पर कथा श्रवण करने पहुंचे प्रसिद्ध ज्योतिषी ज्योतिष गुरू पंडित अतुल जी और वरिष्ठ पत्रकार एच पी तिवारी ने शॉल ओढ़ाकर बधाई दी। महाराज जी ने प्रसाद स्वरूप श्री रामलला जी की दिव्य तस्वीर से दोनों का स्वागत किया।</p>
<p>इस दौरान अतुल शास्त्री जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जब भी जीवन में किसी बड़ी उपलब्धि पर मन में गर्व आए तो श्रीराम की विनम्रता को याद कर लेना। श्री राम और श्री कृष्ण दोनों में मात्र इतना अंतर है कि जहां श्री कृष्ण अपने प्रभाव से जाने जाते हैं, वही श्रीराम अपने सरल शील स्वभाव से जाने जाते हैं। उन्होंने समाज में मर्यादाएं कायम की।<br />
आयोजक मंडल ने बताया कि कथा का शुभारंभ 14 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा निकाल कर की गई। हज़ारों लोगों ने इस यात्रा में शामिल हुए। 21 अप्रैल को श्री राम राज्याभिषेक, श्री हनुमानचरित्र , हवन, पूर्णाहुति और महाभंडारे के साथ कथा का विश्राम होगा। लोगों से कथा लाभ लेने की अपील की जा रही है।</p>
<p>मारे राघव से सीखें पिता की आज्ञा का पालन करना &#8211; आचार्य करण शास्त्री</p>
<p>विरार। पिता श्री की आज्ञा का पालन कैसे करना चाहिए श्री राम से सीख लेनी चाहिए। अपने पिता दशरथ की आज्ञा के पालन हेतु भगवान श्री राम ने राजपाठ छोड़कर तपस्वी का भेष बनाकर चौदह वर्ष वन में रहने के लिए चले गए। जीवदानी माता के निकट, सहकर नगर, विरार पूर्व में चल रही श्री राम कथा का रसपान कराते हुए यह बातें अयोध्या के प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य करण शास्त्री महाराज जी ने अपने मधुर मुखारविंद से कही।</p>
<p>द जानकी फाउंडेशन एवं बहुजन विकास आघाड़ी महिला स्लमसेल द्वारा आयोजित श्री रामकथा के छठे दिवस पर शास्त्री जी ने राम बनवास, केवट प्रसंग का बहुत ही सुंदर गुडगान किया। सैकड़ों की तादात में आए रामभक्त संगीतमय कथा से झूम उठे।<br />
यज्ञाचार्य अर्जुन शास्त्री जी द्वारा पूजन विधि किया जा रहा है।मुख्य यजमान उपेन्द्र सिंह है।<br />
महाराज करन शास्त्री ने संदेश दिया कि जिस तरह वायुमंडल में हवा रहती है परंतु हमें एहसास तो होती है पर दिखाई नहीं देती और जब गर्मियों में पंखा चलाते हैं तो हमें ठंडक का अधिक एहसास होता है। ठीक उसी तरह हर जगह भगवान का वास है और जब हम मंदिर ,धार्मिक स्थल या सत्संग और संतवाणी सुनते हैं तो हमारा मन एकाग्रचित्त होकर ईश्वर में और अधिक लगता है।<br />
बतादे कि अयोध्या के करण और अर्जुन जी सगे जुड़वा भाई हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनलों पर अयोध्या से प्रसारित कोई भी धार्मिक कार्यक्रम में देखे जा सकते हैं।<br />
दोनों महाराज जी जन्मदिवस के अवसर पर कथा श्रवण करने पहुंचे प्रसिद्ध ज्योतिषी ज्योतिष गुरू पंडित अतुल जी और वरिष्ठ पत्रकार एच पी तिवारी ने शॉल ओढ़ाकर बधाई दी। महाराज जी ने प्रसाद स्वरूप श्री रामलला जी की दिव्य तस्वीर से दोनों का स्वागत किया।</p>
<p>इस दौरान अतुल शास्त्री जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जब भी जीवन में किसी बड़ी उपलब्धि पर मन में गर्व आए तो श्रीराम की विनम्रता को याद कर लेना। श्री राम और श्री कृष्ण दोनों में मात्र इतना अंतर है कि जहां श्री कृष्ण अपने प्रभाव से जाने जाते हैं, वही श्रीराम अपने सरल शील स्वभाव से जाने जाते हैं। उन्होंने समाज में मर्यादाएं कायम की।<br />
आयोजक मंडल ने बताया कि कथा का शुभारंभ 14 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा निकाल कर की गई। हज़ारों लोगों ने इस यात्रा में शामिल हुए। 21 अप्रैल को श्री राम राज्याभिषेक, श्री हनुमानचरित्र , हवन, पूर्णाहुति और महाभंडारे के साथ कथा का विश्राम होगा। लोगों से कथा लाभ लेने की अपील की जा रही है।</p>
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		<item>
		<title>अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 16 नवंबर 2022 पर विशेष </title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/9452</link>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Nov 2022 14:13:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 16 नवंबर 2022 पर विशेष &#160; आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मज़बूत करें &#160; सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधता, अभिव्यक्ति के रूपों और&#8230; </p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 16 नवंबर 2022 पर विशेष</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मज़बूत करें</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधता, अभिव्यक्ति के रूपों और मानव होने के तरीकों का सम्मान, स्वीकृति और प्रशंसा है, सराहनीय थीम &#8211; एडवोकेट किशन भावनानी</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>गोंदिया &#8211; वैश्विक स्तरपर बढ़ते हिंसक चरमपंथ के इस युग में मानव जीवन के लिए एक बुनियादी अपेक्षा की जरूरत है, जो हम सदियों पूर्व मानवीय गुणों में समाहित प्राप्त होते थे, परंतु वक्त के परिवर्तित होते माहौल में उन मानवीय गुणों का दौर भी धीरे-धीरे परिवर्तित होते चला गया जिसमें माननीय हिंसा, द्वेष, भेदभाव, मनमुटाव, गुस्सा नकारात्मक प्रतिद्वंदिता, मानवीय तालमेल का अभाव, दूसरों को परिस्थितियों के अनुसार नीचा दिखाने की प्रवृत्ति दूसरे की टांग खींचना दिनों दिन बढ़ती जा रही है इसलिए हम सब को मिलकर सदियों पूर्व वाले मानवीय गुणों को वापस लाना है, जिससे फ़िर वोही आपसी सहयोग मानवता परोपकार प्रोत्साहन सज्जनता, कर भला तो हो भला निस्वार्थ और सहिष्णुता सहनशीलता उदारता जैसे अनेकों गुणों को फ़िर तीव्रता से माननीय हृदय मे विशालता से वापस लाने का दृढ़ संकल्प करना है और हम सब एक हैं के नारे की गूंज का अभियान चलाना होगा। चूंकि 16 नवंबर 2022 को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस है, जो मानवीय जीवन के लिए बुनियादी अपेक्षा की विशेषता सहिष्णुता है। इसलिए आज हम इस मानवीय अनमोल गुण पर विशेष चर्चा करेंगे कि आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मजबूत करें।</p>
<p>साथियों बात अगर हम सहिष्णुता सहनशीलता और शांति के मार्ग को अपनाने के प्रोत्साहन के कारणों की करें तो आज हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहां ग्रह पर हमारे साथी देशवासियों के बीच शांति और सौहार्दपूर्ण जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। राजनीतिक नकारात्मक प्रतिशोध भावना का बढ़ते जाना, धार्मिक कट्टरता, सांप्रदायिकता ध्रुवीकरण कोविड महामारी के बाद उत्पन्न स्थिति, जिंदगी की जटिलताएं और गिरता मानवीय आचरण, बढ़ता राजनीतिक द्वेष इत्यादि अनेक कारणों से आज मानवीय जीवन में सहिष्णुता की अत्यंत आवश्यकता आन पड़ी है जिसके लिए हमें आज न केवल इस वर्ष 16 नवंबर 2022 को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस को गंभीरता से जनजागरण कर मनाना है बल्कि वर्ष के प्रतिदिन इस दिवस को मनाने का संकल्प भी लेना है, ताकि हम असहिष्णुता को जीरो टॉलरेंस कर सकें। साथियों बात अगर हम सहिष्णुता के अर्थ को समझने की कोशिश करें तो करें तो सहिष्णुता में सह अस्तित्व का भाव विद्यमान होता हैं। सकारात्मक अर्थ में सहिष्णुता का आशय है उन विचारों, मतों या धर्मों आदि के अस्तित्व को भी स्वीकार करना तथा उनका सम्मान करना चाहे उसके विचार/मत/धर्म आपसे भिन्न हो सामाजिक समरसता और भाईचारे को बढ़ाने के लिए सहिष्णुता की अवधारणा का होना आवश्यक हैं। बुद्ध के पंचशील सिद्धांतों और नेहरू की पंचशील में सहिष्णुता की अवधारणा को ही प्रस्तुत किया गया हैं। सहिष्णुता का महत्वपूर्ण आधार लोकतांत्रिक दृष्टिकोण हैं,सहिष्णुता का प्रमुख संदर्भ धार्मिक सहिष्णुता से हैं विशेषकर भारत के सन्दर्भ में जहाँ अनेक धर्मों का अस्तित्व है वहां इसकी विशेष आवश्यकता हैं। भारत की पंथनिरपेक्षता की अवधारणा में विभिन्न धर्म, विचार और संस्कृतियों के प्रति सहिष्णुता के स्थान पर धार्मिक संदर्भ में सर्वध समभाव की अवधारणा को प्रसारित किया जिसमें विभिन्न धर्मों के सहअस्तित्व के साथ साथ सहभागिता का भाव विद्यमा हैं।</p>
<p>साथियों बात अगर हम इसे हर वर्ष मनाने की करें तो, हर साल 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्‍णुता दिवस मनाया जाता है। देश और दुनिया में लगातार उपद्रव, हिंसा, रंगभेद, जातिभेद, आगजनी की घटनाएं बढ़ रही है, तो मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। ये निम्न कारण देश दुनिया के विकास के रुकावट का कारण बन रहे हैं। विकासशील देश से विकसित देश बनना है तो इन सभी से परे सोचना होगा। इन सभी परिस्थितियों के बीच इंसानियत को बचाने, शांति और सौहार्द को कायम रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर यूनेस्‍को द्वारा लोगों को टॉलरेंस के खतरों के बारे में अधिक से अधिक जागरूक किया जाता है। आज के वक्त में कॉर्पोरेट ऑफिस में राजनीतिक क्षेत्र में इस तरह की दूरियों को मिटाने के लिए सामाजिक जिम्मेदारी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य है सांस्कृतिक विविधता और शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएं। अधिक से अधिक लोगों को प्राथमिक शिक्षा का हक मिलें। जिस पर देशभर के बड़े-बड़े नेताओं को एक छत के नीचे बैठकर जरूर विचार-विमर्श करना चाहिए। यूनेस्को ने वर्ष 1995 में महात्मा गांधी की 125 वीं जयंती के अवसर पर सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को- मदनजीत सिंह पुरस्कार की स्थापना की थी। यह पुरस्कार विज्ञान, कला, संस्कृति अथवा संचार के क्षेत्र में सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए काम के लिए दिया जाता है। सहिष्णुता और अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए यूनेस्को- मदनजीत सिंह पुरस्कार का शीर्षक है और सहिष्णुता और अहिंसा की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैज्ञानिक, कलात्मक सांस्कृतिक या संचार क्षेत्रों में महत्वपूर्ण गतिविधियों कोपुरस्कृत करता है। यह हर दो साल में 16 नवंबर को दिया जाता है।जिसमें एक लाख डॉलर का पुरस्कार दिया जाता है।</p>
<p>साथियों बात अगर हम इसके इतिहास की करें तो, साल 1995 में यूनेस्को द्वारा सहिष्णुता दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। 1996 में इस दिवस को मनाने के लिए यूनेस्को ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को आमंत्रित किया। इसके बारे में जागरूकता फैलाने, सौहार्द की भावना पैदा करने के लिए एक अभियान जारी किया। जिसका नाम दिया टुगेदर। जिसका उद्देश्य लोगों के बीच आ रही सामाजिक दूरियों को कम करना और देशों, समुदायों और प्रवासियों के बीच मजबूती पैदा करना। इसके बाद से हर साल 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है।</p>
<p>अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस 16 नवंबर 2022 तक विशेष है।आओ मिलकर सहिष्णुता के भाव को मजबूत करें।सहिष्णुता हमारी दुनिया की संस्कृतियों की समृद्ध विविधताअभिव्यक्ति के रूपों और मानव होने के तरीकों का सम्मान, स्वीकृति और प्रशंसा है जो सराहनीय थीम है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>*-संकलनकर्ता लेखक &#8211; कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र*</p>
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		<item>
		<title>7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/9113</link>
					<comments>https://www.naimishtoday.com/archives/9113#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Nov 2022 02:39:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.naimishtoday.com/?p=9113</guid>

					<description><![CDATA[<p>7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन &#160; घुइसरनाथ धाम, प्रतापगढ़।सांगीपुर इलाके के डभियार गांव में सेवानिवृत्त शिक्षक लाल अवधेश बहादुर सिंह के संयोजन में हो रही संगीतमयी सात&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/9113">7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>घुइसरनाथ धाम, प्रतापगढ़।सांगीपुर इलाके के डभियार गांव में सेवानिवृत्त शिक्षक लाल अवधेश बहादुर सिंह के संयोजन में हो रही संगीतमयी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को समापन हुआ। भागवत कथा में चार वेद, पुराण, गीता एवं श्रीमद् भागवत महापुराण की व्याख्या, प्रभुपाद विनोदानन्द शास्त्री महाराज के मुखारवृंद से उपस्थित भक्तों ने श्रवण किया। विगत सात दिनों तक भगवान श्री कृष्ण जी के वात्सल्य प्रेम, असीम प्रेम के अलावा उनके द्वारा किए गए विभिन्न लीलाओं का वर्णन कर वर्तमान समय में समाज में व्याप्त अत्याचार, अनाचार, कटुता, व्यभिचार को दूर कर सुंदर समाज निर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित किया। इस धार्मिक अनुष्ठान के सातवें एवं अंतिम दिन भगवान श्री कृष्ण के सर्वोपरी लीला श्री रास लीला, मथुरा गमन, दुष्ट कंस राजा के अत्याचार से मुक्ति के लिए कंसबध, कुबजा उद्धार, रुक्मणी विवाह, शिशुपाल वध एवं सुदामा चरित्र का वर्णन कर लोगों को भक्तिरस में डुबो दिया। इस दौरान भजन गायन ने उपस्थित लोगों को ताल एवं धुन पर नृत्य करने के लिए विवश कर दिया। शास्त्री जी ने सुंदर समाज निर्माण के लिए गीता से कई उपदेश के माध्यम अपने को उस अनुरूप आचरण करने को कहा जो काम प्रेम के माध्यम से संभव है, वह हिंसा से संभव नहीं हो सकता है। समाज में कुछ लोग ही अच्छे कर्मों द्वारा सदैव चिर स्मरणीय होता है, इतिहास इसका साक्षी है। लोगों ने देर शाम तक इस संगीतमयी भागवत कथा का आनंद उठाया। इस सात दिवसीय भागवत कथा में आस-पास गांव के अलावा दूर दराज से काफी संख्या में महिला-पुरूष भक्तों ने इस कथा का आनंद उठाया। सात दिनों तक इस कथा में पुरा वातावरण भक्तिमय रहा। आभार प्रदर्शन संजय सिंह ने किया।इस मौके पर विकास सिंह, सूरज सिंह, शुभम श्रीवास्तव, रमेश सिंह, लाल संजीव सिंह, सौरभ सिंह, प्रधान संजय पांडेय, सुजीत सिंह, अरुण प्रताप सिंह, अमित सिंह, अर्पित सिंह, लाल बृजेश सिंह, आकाश सिंह, रवि सिंह, प्रमोद सिंह, करुणेश सिंह, सत्येंद्र सिंह, कुमकुम सिंह, ज्योति सिंह आदि मौजूद रहे।</p>
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		<title>नवरात्र के पावन पर्व पर मन्दिरों में बढ़ी भीड़ शीतला चौकिया धाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Sep 2022 15:27:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>*नवरात्र के पावन पर्व पर मन्दिरों में बढ़ी भीड़ शीतला चौकिया धाम* *पूर्वांचल में आस्था का केन्द्र बना है* जौनपुर मां शीतला का दर्शन व पूजन चौकियां धाम में करने&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>*नवरात्र के पावन पर्व पर मन्दिरों में बढ़ी भीड़ शीतला चौकिया धाम*</p>
<p>*पूर्वांचल में आस्था का केन्द्र बना है*</p>
<p>जौनपुर</p>
<p>मां शीतला का दर्शन व पूजन चौकियां धाम में करने के बाद ही मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन करने पूर्व</p>
<p>मां शीतला का दर्शन व पूजन चौकियांव धाम में करने के बाद ही ¨विध्यवासिनी देवी का दर्शन करने पूर्वाचल के अधिसंख्य लोग जाते हैं। मान्यता है कि यहां के बाद ही वहां जाने पर लोगों की मनौती पूर्ण होती है। यही कारण है कि गोरखपुर, देवरिया, बलिया, आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, फैजाबाद, अंबेडकरनगर समेत कई जनपदों के श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है।</p>
<p>इतिहास : इस सिद्धपीठ से संबंधित कुछ किवदंतियां हैं जो ऐतिहासिकता को प्रमाणित करती हैं। लोग बताते हैं कि देवचंद माली के नाम पर शीतला चौकियां के गांव का नाम देवचंदपुर पड़ा। कहते हैं कि देवचंद के परिवार में शीतला नाम की भक्त महिला थी। उसके पति की अल्पायु में ही मृत्यु हो गई। इसके बाद वह सती हो गई। उसी सती स्थल पर ईट की चौकी तथा पत्थर रखकर देवचंद पूजा-अर्चना करने लगे। यह घटना 1772 के आस-पास की बताई जाती है। धीरे-धीरे यह स्थान एक शक्तिपीठ के रूप में तब्दील हो गया। एक अन्य कथानक के अनुसार जब इब्राहिम शाह शर्की ने गोमती नदी के किनारे प्रेमराजपुर स्थित विजय मंदिर जो शीतला देवी का मंदिर था, को ढहवाने लगा तो कुछ ¨हदू भक्त शीतला देवी की मूर्ति उठा ले गए। उसे देवचंदपुर में स्थापित कर दिया। वहीं शीतला देवी मंदिर धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात हो गया। यहां समय-समय पर सौंदर्यीकरण भी कराया जाता रहा है। प्रसिद्ध सरोवर, लक्ष्मी नारायण मंदिर इस देवी स्थल की रौनकता को बढ़ाते हैं। इस शक्ति पीठ पर पूजा तथा दर्शन करने के लिए प्रधामनंत्री जवाहर लाल नेहरू, पं. कमलापति त्रिपाठी, श्रीप्रकाश जी, जय प्रकाश नारायण समेत कई दिग्गज राजनीतिज्ञ और फिल्म अभिनेता गो..वदा आ चुके हैं।</p>
<p>पौराणिकता जिला मुख्यालय से महज छह किलोमीटर की दूरी पर पूर्वोत्तर की दिशा में मां शीतला चौकियां धाम है। मार्कण्डेय पुराण में उल्लिखित&#8217;शीतले तू जगन्नमाता, शीतले तू जगत्पिता, शीतले तू जगत्धात्री, शीतलाय नमो नम:&#8217;से शीतला देवी की पौराणिकता का पता चलता है। यह पावन स्थल स्थानीय व दूर-दराज से प्रतिवर्ष आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था एवं विश्वास का केंद्र ¨बदु बना हुआ है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु मनोवांछित कामना करके आता है। कोई मनौती मानने आता है तो कोई मनौती पूर्ण होने पर सोहारी और लप्सी चढ़ाता है। यहां वर्ष पर्यंत शादी-विवाह, मुंडन और जनेऊ संस्कार भी होते रहते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र में इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि स्थल कम पड़ जाता है।</p>
<p>तैयारी : शक्तिपीठ में वैसे को बारहो मास बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन -पूजन के लिए आते हैं लेकिन नवरात्र में रेला उमड़ता है। पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन व कड़ाही चढ़ाते हैं। यहां दर्शन के बाद ¨वध्याचल धाम को रवाना होते हैं। पर्व की तैयारी चल रही है। शक्तिपीठ परिसर में साफ-सफाई की गई है। श्रद्धालुओं को बिजली, पानी की पर्याप्त व्यवस्था रहेगी। प्रशासन से पर्याप्त पुलिस बल की मांग की गई है। धाम परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दस सीसी टीवी कैमरे लगाए गए हैं। बाहरी गेट पर दो मेटर डिटेक्टर लगा है। इसी से होकर श्रद्धालुओं को दर्शन हेतु प्रवेश करना होता है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। जहां से लाउडस्पीकर के माध्यम से दर्शनार्थियों की सहायता की जाएगी।</p>
<p>वासंतिक नवरात्र में 4.30बजे प्रथम आरती शुरू की जाएगी। इसके बाद दर्शनार्थियों के लिए मंदिर का कपाट खोल दिया जाएगा। दूसरी आरती अपराह्न 2.30 बजे होगी। दल। पर्व पर शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ आदि कार्यक्रम मंदिर परिसर में संपन्न कराए जाते हैं।</p>
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		<title>मथुरा बांके बिहारी मंदिर में मची भगदड़ से 2 लोगों की हुई मौत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Aug 2022 02:24:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
		<category><![CDATA[मथुरा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मथुरा: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया, लेकिन मथुरा के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दर्दनाक हादसा हो गया। देर रात हुई मंगला आरती&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मथुरा</strong>: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया, लेकिन मथुरा के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में दर्दनाक हादसा हो गया। देर रात हुई मंगला आरती के दौरान मची भगदड़ में दो भक्तों की मौत हो गईजानकाीर के कारण श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर ठाकुर बिहारी मंदिर में मंगला आरती के दौरान भारी भीड़ के कारण श्रद्धालुओं का दम घुटने लगा। आधा दर्जन से अधिक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना में नोएडा सेक्टर 99 निवासी निर्मला देवी और वृंदावन के रुक्मिणी विहार कॉलोनी निवासी 65 वर्षीय राम प्रसाद विश्वकर्मा की मौत हो गई। राम प्रसाद मूल रूप से जबलपुर के रहने वाले थे।</p>
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		<title>अगर आपको सपने में दिखती है ये चीज, तो ये है शुभ संकेत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Jul 2022 02:28:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>धार्मिक: सपने सभी को आते है. फिर चाहे वो अच्छे हो या बुरे. हर सपने का महत्व भी अलग-अलग होता है. स्वप्नशास्त्र के मुताबिक, रात में आने वाला सपना आपके&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>धार्मिक</strong>: सपने सभी को आते है. फिर चाहे वो अच्छे हो या बुरे. हर सपने का महत्व भी अलग-अलग होता है. स्वप्नशास्त्र के मुताबिक, रात में आने वाला सपना आपके भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देता है.हम में से बहुत से लोग तो रात की गहरी नींद में आने वाले सपनो को भूल भी जाया करते हैं. सपनों की दुनिया में हम वो भी कर लेते हैं, जो सामान्य जीवन में करना मुश्किल होता है. कुछ लोग अपने सपनों में तरह-तरह के जानवर देखते हैं. तो, कुछ जलीय जंतु भी देखते हैं. जिनमें से एक मछली भी है. स्वप्नशास्त्र में ऐसा बताया गया है कि सपनों में मछली दिखाई देना बहुत महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है. तो, चलिए आज आपको सपने में मछली के दिखाई देने का अर्थ बताते हैं.स्वप्नशास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सपने में मछली का दिखाई देती है. तो ये शुभ संकेत माना जाता है. हिन्दू धर्म में मछली को धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ जोड़कर देखा जाता है.</p>
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		<item>
		<title>अब विदेश में भी गूंजेगा का बम बम भोले, यहां विराजमान होंगे 25 किलो के काशी विश्वनाथ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Jul 2022 02:24:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वाराणसी: महादेव का प्रिय सावन का पवित्र महीना 14 जुलाई से शुरू है. श्रद्धालु भगवान महादेव की भक्ति के नशे में डूबे हुए हैं, गली, चौराहों, सड़कों पर हर हर&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाराणसी</strong>: महादेव का प्रिय सावन का पवित्र महीना 14 जुलाई से शुरू है. श्रद्धालु भगवान महादेव की भक्ति के नशे में डूबे हुए हैं, गली, चौराहों, सड़कों पर हर हर महादेव का नारा गुंजायमान हो रहा है.इस दौरान भगवान शिव की नगरी काशी में भी भक्तों का हुजूम उमड़ा हुआ है. सावन के इस पवित्र महीने में बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने के लिए जहां लाखों की संख्या में शिवभक्त विश्वनाथ धाम में पहुंच रहे हैं तो वहीं अब लंदन में रहने वाले भोले भक्तो को उनके ही शहर में बाबा श्री काशी विश्वनाथ का दर्शन मिलेगा.</p>
<p>वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के तर्ज पर लंदन में भी बाबा श्री काशी विश्वनाथ का मंदिर बनाया गया है, इस मंदिर में दो दिनों के बाद काशी से शिवलिंग ले जाकर स्थापित किया जाएगा. लंदन में शिवलिंग की स्थापना से पहले धर्म की नगरी काशी में तीन दिन तक 108 ब्राह्मणों की मौजूदगी में नाट्यकोटी समुदाय के लोगों ने विशेष अनुष्ठान किया है.</p>
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		<title>भोले बाबा रात को आए सपने में, दिन में कावड़ लेने चल दिए फैज मोहम्मद, पढ़ें पूरी खबर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Jul 2022 02:05:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुजफ्फरनगर: सावन में शिवभक्त कांवड़ लेकर उनका जलाभिषेक करने के लिए अपने घरों से निकले हैं। भोलेनाथ को जल चढ़ाने वाले में गरीब-अमिर सभी समान होते हैं और आश्चर्य की&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/6937">भोले बाबा रात को आए सपने में, दिन में कावड़ लेने चल दिए फैज मोहम्मद, पढ़ें पूरी खबर</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुजफ्फरनगर</strong>: सावन में शिवभक्त कांवड़ लेकर उनका जलाभिषेक करने के लिए अपने घरों से निकले हैं। भोलेनाथ को जल चढ़ाने वाले में गरीब-अमिर सभी समान होते हैं और आश्चर्य की बात है कि सावन की शिव कांवड़ यात्रा जाति-धर्म के बंधनों से परे होती है। इसका ताजा उदाहरण है उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले फैज मोहम्मद।</p>
<p>जी हां, अल्पसंख्यक युवा फैज मोहम्मग बीते 5 सालों से कांवड़ लेकर शिव को जल अर्पित करने के लिए अपने घर से निकल रहे हैं। फैज इस कांवड़ यात्रा के पीछे एक दिलचस्प कहानी सुनाते हैं। उनके मुताबिक 5 साल पहले भगवान शिव ने उन्हें सपने में दर्शन दिया। बकौल फैज खुद भगवान शिव ने उन्होंने कांवड़ लेकर जल अर्पण करने की बात कही।</p>
<p>फैज बताते हैं कि उस घटना ने उन्हें कट्टर शिव भक्त बना दिया और यही कारण है कि फैज मोहम्मद बीते पांच सालों से लगातार कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं। इतना ही नहीं शिव की भक्ति में सराबोर फैज मोहम्मद ने अपना उपनाम भी ​​शंकर लिखना शुरू कर दिया है।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक फैज मोहम्मद मुजफ्फरनगर जिले के कधली गांव के निवासी हैं। वह स्थानीय कंपनी में मजदूरी करते हैं। फैज मोहम्मद के द्वारा शिव के सपने की बात को उनका पूरा गांव भी मानता है। यही कारण है कि कधली गांव के लोग फैज को शिवभक्त मानते हुए उन्हें बहुत सम्मान देते हैं।</p>
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		<title>मुस्लिम लोगों ने कावड़ियों पर बरसाए पुष्प, और पुलिस वालों ने कावड़ियों के घावों को किया साफ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 Jul 2022 01:24:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[खास खबर]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली: इन दिनों सावन का महीना चल रहा है। यह महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए खास माना जाता है। देश भर में भक्त शिव मंदिरों में भगवान भोले&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/6897">मुस्लिम लोगों ने कावड़ियों पर बरसाए पुष्प, और पुलिस वालों ने कावड़ियों के घावों को किया साफ</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दिल्ली</strong>: इन दिनों सावन का महीना चल रहा है। यह महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए खास माना जाता है। देश भर में भक्त शिव मंदिरों में भगवान भोले को जल अर्पित करते हैं।इसके लिए भक्त विभिन्न पवित्र जल स्रोतों से पानी लेकर शिवमंदिर जाते हैं। बहुत से श्रद्धालु कांवड़ में जल भरकर पैदल शिवमंदिर जाते हैं। इन्हें कांवड़िया कहा जाता है। पवित्र यात्रा के दौरान लोग कांवड़ियों की सेवा करते हैं। दिल्ली में मुसलमानों ने गुलाब के फूल बरसाकर कांवड़ियों का स्वागत किया। वहीं, उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारी ने शिव भक्त के पांव के जख्म साफ किए।कांवड़ यात्रा पर निकले शिवभक्तों की सेवा का बहुत महत्व है। मेरठ में कांवड़ियों की सुविधा के लिए कैंप लगाए गए हैं। एक ऐसे ही कैंप में शिव भक्त के पांव के जख्म साफ करते पुलिस अधिकारी।</p>
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