सावधान!गुड़ का शौक कहीं न बना दे सेहत को गोबर।

 

देशी गुड़ में सफेदी के लिए धड़ल्ले से प्रयोग किए जा रहे घातक रसायन-खाद्य विभाग अनजान।

सकरन/सीतापुर(सुधीर सिंह कुम्भाणी):देशी गुड़ खाना अब स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं बल्कि हानिकारक ही नहीं जीवन के लिए खतरनाक हो गया है।बाजार की प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए गुड़ उद्योग से जुड़े लोग जन स्वास्थ्य की चिंता न कर मानकों की अनदेखी कर अप्रत्याशित मात्रा में घातक रसायनों कैल्शियम हैड्रॉक्साइड,सोडियम हाइड्रो सल्फाइट(हाईड्रोस),सोडियम फार्मेल्डिहाइड एसिड,सिशेल्स,बेकिंग सोडा,अरंडी आयल के साथ कृत्रिम खाद्य रंगों(नारंगी-लाल पाउडर)का धड़ल्ले से प्रयोग कर जानलेवा गुड़ तैयार कर बेच रहे हैं।यही नहीं सकरन क्षेत्र में ग़ैरजनपदों से आए गुड़ निर्माता तो घातक केमिकल्स के साथ धड़ल्ले से आयातित शीरे व लकड़ी बुरादे के साथ ही मुल्तानी व बलुई मिट्टी,धान की पिसी भूसी इत्यादि से तैयार गुड़ को बेचने में भी नहीं हिचकिचाते,ऐसा नहीं है कि खाद्य विभाग को इस गोरखधंधे की जानकारी नहीं है उद्योग से जुड़े जानकारों की माने तो इसके लिए विभागीय अधिकारियों को चढ़ावा भी चढ़ता है।क्षेत्र में दर्जनों गुड़ भट्ठियां प्रतिदिन सैकड़ों कुंतल मिलावटी गुड़ तैयार करके बाजार में सप्लाई करती हैं।
गुड़ एक गैर-केन्द्रपसारक स्वीटनर है जो गन्ने के रस के थर्मो रासायनिक उपचार द्वारा निर्मित होता है,सोडियम हाइड्रो सल्फाइट(हाइड्रोस)गुड़ उद्योग में इसका रंग सुधारने के लिए आमतौर पर प्रयोग किया जाने वाला रसायन है पर महंगाई के दौर में ज्यादा मुनाफा के चक्कर में क्षेत्र में आए बाहरी गुड़ निर्माताओं ने अखाद्य पदार्थों के साथ बेहद जहरीले पदार्थों को मिलाकर गुड़ बनाकर बेचना प्रारंभ कर दिया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि चढ़ावा को भूलकर जिम्मेदार खाद्य विभाग मिलावटखोर गुड़ भट्टी संचालकों व कारोबारियों के खिलाफ क्या करता है कार्यवाई?

क्या कहते हैं जानकर-सेहत के लिए नफा नुकसान के बारे में विशेषज्ञों की मानें तो गुड़ साफ करने के लिए रसायनों का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यंत ही घातक है फिर रसायनों की एक निश्चित मात्रा से अधिक प्रयोग व मिलावट तो जीवन के लिए अत्यंत घातक है।
रसायनयुक्त गुड़ खाने से लीवर की गंभीर बीमारी यहां तक कि लीवर कैंसर तक हो सकता है।कोलाइटिस भी हो सकता इसलिए ज्यादा चमक पर न जाकर सादा एवं कम चमकीला गुड़ सेवन करना ही उचित होगा।

फ़ूड विभाग दे ध्यान।

औषधि एवं प्रशासन विभाग के फ़ूड इंस्पेक्टर दुकानों पर बिकने वाली सामग्री आदि की तो जांच करते हैं,लेकिन गुड़ बनाने की प्रक्रिया क्षेत्र में संवहालित होने के बावजूद भी गुड़ के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले घातक रासायनिक पदार्थों का निरीक्षण नहीं करते हैं,यही कारण है कि गुड़ बनाने वाले धड़ल्ले से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों का अप्रत्याशित रूप से प्रयोग कर जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर असमय मौतों को खुलेआम बांट रहे हैं।

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