
विकास खण्ड बसखारी में फागिंग मशीन क्रय केनाम पर शासकीय धनराशि की लूट सहायक विकासअधिकारी पंचायत उमाशंकर सिंह की भूमिका अहम शिकायत की जांच से कतरा रहे खण्ड विकास अधिकारी सतीश सिंह
अम्बेडकर नगर
सरकार भले ही जीरो टालरेन्श की नीति अपनाकर लगातार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के शतत प्रयास कर रही है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि मानों विकास विभाग द्वारा इस नीति को विफल बनाने का ज़िद ठान लिया गया है।मामला
विकास खण्ड बसखारी के लगभग समस्त ग्राम पंचायतों में फागिंग मशीन के क्रय से जुड़ा बताया जा रहा है। शासन/ विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-2026 में ग्राम पंचायतों में फागिंग मशीन क्रय किए जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी किया गया था। जिसके क्रम में सम्बन्धित ग्राम पंचायत के सचिवों द्वारा ग्राम निधियों के खाते से रूपये 30,000 से अधिक की धनराशि आहरित की गई है जबकि वास्तविकता में फागिग मशीन की निकटतम बाजारी खुदरा मूल्य अधिकतम रूपये 10-15 हजार रुपए से अधिक नहीं है तथा अधिकांश ग्राम पंचायतों के ग्राम पंचायत सचिवो द्वारा सम्बन्धित फागिंग मशीन के क्रय रसीद भी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है जिनके द्वारा अपलोड भी किया गया है वह ऐसे फर्म के नाम की है जो की फागिंग मशीन आपूर्ति के लिए अधिकृत ही नहीं है। जबकि जनपद के अन्य विकास खण्डों में यही फागिंग मशीन सम्बन्धित ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा अपने स्तर से भिन्न भिन्न आपूर्ति कर्ताओं के माध्यम से 15-20 हजार रूपए तक में क्रय किया गया है। सबसे बडा प्रश्न यह है कि विधि विरुद्ध ढंग से ऐसे फर्म से फागिंग मशीन का क्रय क्यों और किन परिस्थितियों में किया गया जो की फागिंग मशीन आपूर्ति हेतु अधिकृत ही नहीं है तथा जब उक्त मशीन नजदीकी जनपद में और कम मूल्य पर उपलब्ध है तों इसे गैर जनपद से क्रय मूल्य से अपेक्षाकृत लगभग दो-तीन गुना अधिक मूल्य भुगतान कर एक ही फर्म से क्यों मंगाया गया? दोनों प्रश्न ही अपने आप में दृढ़ एवं तर्कसंगत है।
मीडिया पड़ताल में सूत्रों से प्राप्त जानकारी एवं प्राप्त जानकारी पर उठे सवाल
सम्बन्धित प्रकरण के पड़ताल में तह से सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार फागिंग मशीन का क्रय वर्तमान सहायक विकास अधिकारी पंचायत विकास खण्ड बसखारी उमाशंकर सिंह द्वारा अपने चहेते फर्म को फागिंग मशीन क्रय मूल्य का भुगतान सम्बन्धित ग्राम पंचायतों के सचिवों एवं ग्राम प्रधानों पर अनाधिकृत रूप से दबाव बनाकर ग्राम निधि के खाते से अधिक धनराशि का भुगतान करवाया गया है।किसी भी सचिव द्वारा अपने स्तर से फागिंग मशीन क्रय नही किया गया है।यदि तथ्य सही है तों सवाल यह उठता है कि सम्बन्धित ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा अनाधिकृत रूप से दबाव में आकर मशीन की वास्तविक कीमत जानने के बावजूद भी अधिक धनराशि का भुगतान क्यों किया गया? क्या उक्त की जानकारी विभाग के अन्य अधिकारियों को नही दी गई?यदि दी गई तो उच्च अधिकारियों द्वारा इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया गया? यदि सचिवों द्वारा भुगतान का विरोध कर इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को नहीं दी गई तों क्यों?
शिकायत की जांच से कतराये खण्ड विकास अधिकारी,बसखारी सतीश सिंह
प्रकरण की जांच के सम्बन्ध में जन सुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायत को जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के बजाय खण्ड विकास अधिकारी बसखारी सतीश सिंह द्वारा अपने स्तर से सम्बन्धित ना बताकर जिला पंचायत राज अधिकारी के पोर्टल पर भेजनें सम्बन्धी आख्या के माध्यम से शिकायत का निस्तारण कर दिया गया । सबसे बडा सवाल यह है कि खण्ड विकास अधिकारी विकास खण्ड कार्यालय का विभागाध्यक्ष हैं तों जांच की जिम्मेदारी क्यों नहीं?
जनपद के आला अधिकारियों की स़ज्ञानता एवं कार्यवाही पर टिकी निगाहें
अब देखना यह होगा कि विकास खण्ड बसखारी में बड़े पैमाने पर हुएं शासकीय धनराशि के बन्दर बांट के जांच का पासा किस अधिकारी के पालें में पडता है और कार्यवाही की गांज किन किन कर्मचारियों पर गिरतीं है।या फिर प्रकरण को पूर्व की परम्परा की भांति कार्यालय की फाइलों में धूल फांकने हेतु सदा के लिएं कैद कर दिया जाता है।